1st Choice of Indian Politicians

हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र

Hindi Weekly News Paper of India

SANJAY HINDWAN   Editor

 

Saproon, Solan, Himachal Pradesh- 173211 (INDIA) Contact : +91 94181 04770

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     Gras is now a well known political weekly news paper of INDIA. People all over the world are visiting on our website regularly. This site was launched on 26th Jan. 2009 for the purpose of that more peoples of INDIA should know about our Constitution to built the Nation more strong. We got strong queries on our reporting. Now we are getting good response from our readers all over the world.

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सौ साल के बाद आरएसएस क्‍लीन बोल्‍ड

     अमेरिका में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के एक बयान से ही आरएसएस अपने सौ वर्ष में क्लीन बोल्ड हो गई। भागवत के बयान के यह मायने निकाले जा रहे हैं कि वह आरएसएस की हिन्दू राष्ट्र वाली छवि से पलट गए हैं। न्यूयार्क अमेरिका में भागवत के विदेशी दौरे के दौरान पहले से ही उनकी आलोचना शुरू हो गई थी। इसी प्रकार की आलोचना भागवत को कनाडा और ब्रिटेन में भी झेलनी पड़ी थी। एक समय तो ऐसा लग रहा था कि शायद भागवत के कार्यक्रम हो ही न पाएं। आखिर भागवत अमेरिका में मंच पर चढ़े और ऐसा भाषण दे डाला जैसा आरएसएस के सौ साल के इतिहास में किसी भी प्रमुख का नहीं है। भागवत ने कहा कि जो लोग भारत में मुसलमानों को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं वह हिन्दू ही नहीं हैं। पिछले सौ वर्षों में आरएसएस ने दुनियां भर में अपनी जो पहचान बनाई थी वह सिर्फ हिन्दुओं को साथ लेकर चलने की थी। आजादी के आंदोलन में आरएसएस का टकराव कांग्रेस से इसी बात को लेकर रहा है कि कांग्रेस ने भारत को एक धर्मनिपेक्ष राष्ट्र बनाने की ओर कदम बढ़ाए थे। जबकि आरएसएस भारत को एक हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहती थी। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के पीछे भी आरएसएस की यही सोच बताई जाती है। देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू का नाम लेने पर आग बबूला हो जाने वाले आरएसएस के लोग मोहन भागवत की जुबान से न्यूयार्क में मुसलमानों के पक्ष में दिए गए बयान को कैसे पचा रहे होंगे यह वह हर व्यक्ति समझ सकता है जिन्होंने देश भर में फैले स्वयं सेवकों की भाषा को कहीं पर भी मुसलमानों के खिलाफ सुना होगा।       जारी...

 

जंतर मंतर ने हिमाचल भाजपा के सपने को छूमंतर कर दिया

     दिल्ली के जंतर मंतर में चल रहे आंदोलन ने भाजपा के हिमाचल में सरकार बनाने के सपने को छूमंतर कर दिया है। देश भर में चल रहे भाजपा के खिलाफ जेन-जी आंदोलन के चलते राज्यों में भाजपा के कार्यक्रम महज नौटंकी लगने लगी है। प्रदेश इकाई की हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि वह राष्ट्रव्यापी मुद्दों से बचकर भागने लगी है। हिमाचल प्रदेश की भाजपा ने तो यहां तक कह दिया है कि वह कांग्रेस सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरेगी, लेकिन हिमाचल भाजपा के नेताओं की ओर आम जनता का कोई ध्यान नहीं है। पिछले दिनों भाजपा विधायक दल की बैठक में ये फैसला लिया गया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाए। भाजपा ने सरकार पर प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया है। भाजपा कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, आपदा राहत, कर्मचारियों की देनदारियों और गारंटियों के मुद्दे पर सरकार को घेरने की बात कह रही है। जबकि राष्ट्र स्तर पर पूरी भाजपा छात्रों और युवाओं के आंदोलनों से घिरी पड़ी है। देश में भाजपा विरोधी माहौल के चलते आम लोग भाजपा की प्रदेश इकाइयों से यह बयान चाहती है कि वह जेन-जी आंदोलन के प्रति अपने नजरिए को बताएं। सोशल मीडिया पर हिमाचल प्रदेश के कोने कोने में बैठे युवा प्रदेश भाजपा से जानना चाहते हैं कि वह पेपर लीक, बेरोजगारी और दमनकारी नीतियों के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करें ताकि कुछ ही महीनों बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में प्रदेश का जेन-जी भी यह तय कर सके कि उसे भाजपा को वोट देना है या नहीं। शिमला में आयोजित भाजपा की बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने की और प्रदेश अध्यक्ष डा. राजीव बिंदल विधायक न होने के बावजूद विशेष रूप से उपस्थित रहे।          जारी...

 

डा. हाब्‍बी को राष्‍ट्रपति मुर्मू से पुरस्‍कार मिला

    सिरमौर- सोलन के जाने पहचाने चेहरे डा. जोगिंदर हाब्बी को पिछले दिनों राष्ट्रपति के हाथों एक पुरस्कार प्राप्त हुआ। कुछ दिन पहले आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने सभी सहयोगियों का धन्यवाद भी किया। इस उपलब्धि से क्षेत्र की जनता में हर्ष का माहौल है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में डा. हाब्बी को पुरस्कार प्रदान किया। हिमाचल प्रदेश, विशेषकर सिरमौर की समृद्ध एवं विलुप्त होती लोक संस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोक कलाकार डा. जोगिंदर हाब्बी को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से अलंकृत किया गया है। उन्हें हिमाचल के लोक नृत्य ‘नाटी’ के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया है। डा. हाब्बी पदमश्री पुरस्कार प्राप्त श्री विद्यानंद सरैक के नाटी पर किए शोध पर अपनी प्रस्तुति करते हैं। वह अपने साथ श्री सरैक को देखकर सदा प्रफुल्लित रहते हैं और अक्सर उन्हीं के साथ मंच पर नजर भी आते हैं। गौर हो कि मूल रूप से जिला सिरमौर की तहसील राजगढ़ के गांव जालग निवासी डा. हाब्बी के नेतृत्त्व में लोक कलाकारों ने सिरमौरी नाटी सहित अनेक पारंपरिक विलुप्त होती लोक विधाओं को पिछले तीन दशकों से अधिक समय से रीमिक्स सिरमौर के रूप में पहचान दिलवाई है।          जारी...

 

हिमाचल कांग्रेस में हलचल तेज, बड़ा फैसला हो सकता है

     दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान हिमाचल प्रदेश को लेकर काफी गंभीर नजर आने लगा है। हिमाचल प्रदेश के प्रमुख नेताओं को दिल्ली के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश में भी इस बात को लेकर हलचल तेज हो गई है। कहते हैं कुछ दिनों में हिमाचल कांग्रेस में बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। कई प्रभावशाली नेताओं को आगे करने के प्रयास होंगे और कुछ सफेद हाथियों को हाशिए पर बिठा दिया जाएगा। कहते हैं हिमाचल विधानसभा आम चुनावों से पहले कांग्रेस की टीम बदली जाएगी। जाहिर है यह टीम मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चुनाव मैदान में उतरेगी। इसकी पृष्ठभूमि हलांकि प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार की नियुक्ति के समय ही तय कर ली गई थी। अब प्रदेश सरकार में मंत्रिमंडल को बदलकर इसके अगले चरण में प्रवेश किया जाएगा। हिमाचल के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर दिल्ली में पार्टी की टॉप लीडरशिप के साथ एक विस्तृत चरचा की गई है। कहते हैं इस बैठक में जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल की स्थिति को आलाकमान के समक्ष रखा वहीं इस बैठक में कांग्रेस के सबसे बड़े नेता राहुल गांधी, सांसद प्रियंका गांधी, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, हिमाचल कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार भी शामिल थे। सभी पक्षों को साधने के लिए उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को भी दिल्ली बुला लिया गया है।                जारी...

 

जस्टिस वर्मा पर शिकंजा

    पिछले दिनों दिख कि दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे जस्टिस यशवंत वर्मा पर शिकंजा कसता जा रहा है। अब सरकारी आवास में करोड़ों रुपए की जली हुई नकदी मिलने के मामले में जस्टिस वर्मा पर लगे आरोप लोकसभा की जांच समिति ने सही पाए हैं। समिति ने कहा, जस्टिस वर्मा पर नकदी का हिसाब न दे पाने (आरोप एक), सबूतों से छेड़छाड़ (आरोप दो) और असंतोषजनक स्पष्टीकरण (आरोप 3) के आरोप सही साबित होते हैं। समिति ने संसद के दोनों सदनों को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जस्टिस वर्मा अपने सरकारी आवास के स्टोर रूम में मिली नकदी की मौजूदगी, उसके स्रोत के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे पाए हैं। समिति की रिपोर्ट दो हिस्सों में है और इसमें जांच के दौरान दर्ज हुए मौखिक व दस्तावेजी सबूत शामिल हैं। तीन सदस्यों वाले पैनल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। समिति द्वारा जांच करने पर उनका स्पष्टीकरण टालमटोल भरा लगा। सील करने से पहले स्टोर रूम में सबूतों से छेड़छाड़ की गई। जस्टिस वर्मा का स्पष्टीकरण अपेक्षित ईमानदारी, पारदर्शिता और जिम्मेदारी नहीं दिखाता। धटना के अनुसार 14 मार्च, 2025 की रात जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लग गई थी। दमकलकर्मियों को एक स्टोररूम में भारी मात्रा में जली हुई नकदी मिली। इसकी सूचना पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को दी। तब के सीजेआई जस्टिस (रि) संजीव खन्ना ने यशवंत वर्मा को दिल्ली से हटाकर उनके मूल हाईकोर्ट इलाहाबाद भेज दिया और उनके खिलाफ जांच कमेटी गठित की थी।         जारी...

 

भारत में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के कारण नौकरियां बढ़ी

     आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर दुनियां भर में नौकरियां जाने की आशंका जताई जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि बड़े देशों में एआई के कारण नौकरियां कम हो रही है। जबकि छोटे देशों में एआई के कारण नौकरियों में इजाफा होता हुआ दिख रहा है। भारत की तस्वीर भी अलग नजर आ रही है। अब फिर से वैश्विक से वित्तीय कंपनी नोमुरा की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एआई से जुड़ी 83,100 नौकरियां बनी हैं, जबकि एआई के कारण 31,921 नौकरियों में कटौती या छंटनी हुई है। यानी जितनी नौकरियां प्रभावित हुईं, उनकी तुलना में करीब 51,000 अधिक नौकरियां एआई के कारण या उससे जुड़े क्षेत्रों में पैदा हुईं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका मतलब यह नहीं है कि एआई का रोजगार पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ रहा। तकनीक पारंपरिक कामकाज को तेजी से बदल रही है। कंपनियां दोहराए जाने वाले और नियमित कामों को स्वचालित कर रही हैं, जिससे कुछ भूमिकाओं की जरूरत कम हो रही है। दूसरी ओर एआई से जुड़े नए कौशल और भूमिकाओं की मांग बढ़ रही है। एआई निवेश से तकनीक के अलावा सेवाओं, उत्पादकता और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों को फायदा हो सकता है। नोमुरा के अनुसार एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में एआई से जुड़े कुल 1.31 लाख रोजगार बने हैं। भारत को एआई के रोजगार प्रभाव का अहम परीक्षण स्थल इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि देश बड़ी संख्या में युवाओं के साथ वैश्विक आइटी और बैक-आफिस सेवाओं का प्रमुख केंद्र है। भारत के रोजगार बाजार में दो अलग-अलग रुझान उभरने की बात कही गई है।            जारी...

 

भारत में करोड़ों युवाओं को मानसिक रोगी बना दिया है

    भारत में चल रही परेशानियों ने करोड़ों युवाओं को मानसिक रोगी बनाकर रख दिया है। जिस प्रकार की खबरें युवाओं को सोशल मीडिया, अखबारों और अन्य साधनों से मिल रही हैं, उससे देश का युवा परेशानी के गर्त में धंसा जा रहा है। सरकार की कार्य प्रणाली, देश में फैल रहा धार्मिक आडंबर और देश में मौजूद न्यायिक व्यवस्था युवाओं को आगे जीवन जीने के लिए कष्टदायी महसूस होने लगी है। युवाओं की समसे बड़ी चिंता यह है कि वह इन परिस्थितियों में कैसे एक सभ्य नारिक का जीवन जी पाएंगे। समस्या इतनी विकट है कि युवाओं में मानसिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। जो इस बात को साबित करने के लिए काफी है कि भारत में युवा वर्ग काफी परेशान है। एक आंकड़े के मुताबिक करीब 5.4 करोड़ और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में 2.8 करोड़ से ज्यादा युवा किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस ओर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में इसका असर न सिर्फ युवाओं के स्वास्थ्य, बल्कि शिक्षा, युवाओं की सुरक्षा, रोजगार और देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। ईयू-एशियन यूथ मेंटल हेल्थ कॉन्फ्रेंस ने भी हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया है कि पिछले तीन दशकों में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में युवाओं के मानसिक रोग के मामलों में 44 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है और 15 वर्ष से 34 वर्ष के आयु वर्ग के 2.8 करोड़ से अधिक युवा मानसिक रोगियों की तरह जीवन जीने को मजबूर हैं। जबकि यह अवस्था उनकी उच्च शिक्षा प्राप्त करने, स्वस्थ बने रहने और भविष्य को संवाने के लिए मेहनत करने पर केन्द्रित रहनी चाहिए।          जारी...

 

अमेरिका और ईरान के बीच कुछ बुरा भी हो सकता है

    अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में अब कुछ भी बुरा हो सकता है। यहां तनाव अभी भी करकरार है। पिछले दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि ईरान ने कोई कदम उठाया तो उसे नेस्तनाबूद कर दिया जाए। ट्रंप ने माना कि पिछले महीने तुर्किए में नाटो शिखर सम्मेलन के बाद उन्होंने सीक्रेट सर्विस के निर्देश पर गुपचुप तरीके से विमान बदला था। ट्रंप ने कहा कि यह कदम ईरान की संभावित हत्या की साजिश की आशंका के चलते उठाया गया। सूत्रों ने बताया कि ट्रंप को मिसाइल अटैक का इनपुट मिला था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि अगर ईरान ने उनकी हत्या की कोशिश की तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा। टूथ सोशल पर ट्रंप ने गरम होकर लिखा कि ईरान की ओर 1000 मिसाइलें तैयार हैं और जरूरत पड़ने पर हजारों और मिसाइलें दागी जाएंगी। अमेरिका ने तो अपने नागरिकों को खाड़ी देशों से स्वदेश लौटने को कहना शुरू कर दिया है। ट्रंप कहते हैं कि हमारे सामने ऐसा देश है, जो 50 वर्षों से मध्य पूर्व में दादागिरी करता रहा है। ऐसे में युद्धविराम और शांतिवार्ता के प्रयास कैसे सफल होंगे यह कहना मुश्किल है। हलांकि बीच बीच में इसके लिए प्रयास किए जाते हैं और फिर वही प्रयास शून्य में तब्दील हो जाते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिका ने ईरान को अल्टीमेटम देते हुए साफ कहा है कि वह सार्वजनिक रूप से यह ऐलान करे कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए खुला रहेगा और व्यापारिक जहाजों पर हमले बंद किए जाएंगे।             जारी...

 

संपादकीय         जब गुंडे ही पुलिसवाले बनें हों

     अब इस बात की पहचान करना मुश्किल हो गया है कि जो पुलिस लोगों की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरी है वह वास्तव में पुलिस है भी या गुंडे पुलिस की वर्दी में आ गए हैं। पहले यह बातें कहानियों और फिल्मों में दिखाई जाती थीं। लेकिन अब यह बातें साफ तौर पर सामने आने लगी हैं कि गुंडे और पुलिसवाले मिलकर निर्दोष जनता को पीटने निकल पड़ते हैं। जंतर मंतर में पुलिस का जो तथाकथित आपराधिक रूप सामने आया है वह देशवासियों को भयभीत करने वाला है। खबर तो यह है कि प्रदर्शनकारी छात्रों को पीटने के लिए पुलिस अपने बीच संगीन मामलों में पकड़े गए कैदियों को लेकर आई थी। इस आरोप पर फिलहाल जांच चल रही है।
     ऐसा पहली बार ही नहीं सुनने को मिल रहा है। कुछ वर्ष पहले दिल्ली में युनिवर्सिटी के छात्रों को पीटने के लिए भी कुछ गुंडे पुलिस की वर्दी और उनके लट्ठ उठाकर लाए थे। तब भी होस्टल के छात्रों ने यह आरोप लगाए थे कि गुंडों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त था और वह हॉस्टल में घुसकर छात्रों से मारपीट कर रहे थे। तब इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया था लेकिन अब जिस प्रकार की खबरें जंतर मंतर में 20 जुलाई को हुए जेन-जी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान की सामने आ रही हैं, उसमें बताया जा रहा है कि पुलिस दल में बहुत से लोग पुलिस की आधी अधूरी वर्दी में तो थे लेकिन उनकी वर्दी में नेम प्लेट नहीं थी और वह भी पुलिस बल के साथ लाठीजार्च कर रहे थे।       
....जारी

 

नीट पेपर लीक मामले को लेकर सीबीआई कोर्ट में

    जिस नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश के छात्रों में उबाल मचा हुआ है। इस मामले को लेकर शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तक हो चुका है। अब यह नीट पेपर लीक का मामला जेन-जी का बड़ा आंदोलन बन चुका है। अब इस मामले में अदालती कार्यवाही भी शुरू हो गई है। सीबीआई ने नीट पेपर लीक मामले में जांच करके कुछ तथ्य अदालत के सामने रखे हैं। अब बताया जा रहा है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले रची गई थी। नीट के एक्सपर्ट्स ने पेपर तैयार करने के दौरान ही सवाल याद कर लिए थे। सीबीआई ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट में यह दावा किया है। देश भर में लोगों को इस बात को जानने की जिज्ञासा है कि नीट पेपर लीक के पीठे कौन कौन लोग थे। यह मामला छात्रों के लिए आफत कैसे बन गया। सीबीआई ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आने का दावा किया है। 94 पेज की चार्जशीट में एजेंसी ने कहा है कि एनटीए के गोपनीय सेक्शन में विशेषज्ञों की जांच और तलाशी की व्यवस्था नहीं थी। यहां तक कि इस सेक्शन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग लाइव-फीड सीसीटीवी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम भी नहीं था। चार्जशीट 28 जुलाई को दाखिल की गई थी। इसकी जानकारी पिछले दिनों सामने आई है। इसके मुताबिक, एक्सपर्ट्स एनटीए ऑफिस से होटल लौटकर याद किए गए सवाल पर्चियों पर लिखते थे। इसके बाद इन्हें बिचौलियों और कोचिंग नेटवर्क के जरिए छात्रों तक पहुंचाया जाता था।         जारी...

 

राजीव गांधी पर लगा बोफोर्स दाग धुल गया

    विश्व भर में चरचा में रहा बोफोर्स गन घोटाला अब पूरी तरह से समाप्त हो गया है। इससे तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी पर लगाया गया दाग भी पूरी तरह से धुल गया है। इसी जांच कर रही सीबीआई अदालत में इस केस में लगे आरोपों को सही साबित नहीं कर पाई। यह केस इसलिए जाना जाता है कि इस केस के चलते भारी बहुमत वाली राजीव गांधी सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। अब करीब 40 साल पुराने बोफोर्स घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी याचिका भी खारिज कर दी है इसी के साथ ही अब यह मामला पूरी तरह समाप्त हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस केस में आगे सुनवाई की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने 2005 के दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली अपील भी सुनने से मना कर दिया, जिसमें हिंदुजा ब्रदर्स और बोफोर्स कंपनी को बरी कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब 2005 में ही केस खत्म हो चुका है और 2018 में सीबीआई की अपील भी खारिज हो गई थी तो अब आखिर बचा ही क्या है जिस पर सुनवाई की जाए। बता दें कि 1986 में भारत ने स्वीडिश कंपनी एबी बोफोर्स से 400 होवित्जर तोपों का सौदा किया था। यह डील 1,437 करोड़ रुपए की थी। वर्ष 1987 में आरोप लगे कि इस सौदे को हासिल करने के लिए कथित रूप से कमीशन (रिश्वत) दी गई थी। घोटाले के आरोप लगने से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1989 का चुनाव हार गए थे। बोफोर्स घोटाले की जांच पर करीब 250 करोड़ रुपए खर्च हुए, लेकिन इतने पैसे खर्च करने के बाद भी सीबीआई मजबूत सबूत नहीं जुटा पाई।          जारी...

 

कांग्रेस का सूचना के अधिकार का दावा खोखला

    कांग्रेस पार्टी के सूचना के अधिकार का दावा मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने फेल करके रख दिया है। हलांकि कांग्रेस अपनी उपलब्धियों में नागरिकों को दिए गए सूचना के अधिकार का ढिंढोरा हर जगह पीटती रही है। कहा जा रहा है कि अब इस पद को भरने के लिए मुख्यमंत्री ने अपने साथ एक कैबिनेट मंत्री और नेता प्रतिपक्ष के कमेटी गठित कर ली है। यह कमेटी फिर से राज्य सूचना आयोग को जिंदा कर पाएगी या नहीं यह समय बताएगा। करीब एक वर्ष से तो पूरा सूचना आयोग ही मरणासन की स्थिति में है। फिलहाल एक बार फिर सूचना आयोग में नई नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू की गई है। इससे पहले मुख्यमंत्री सुक्खविंदर सिंह, उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर की कमेटी सूचना आयुक्तों की नियुक्ति करने में विफल रही थी। अब उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री को इस चयन कमेटी से हटा दिया गया है और उनके स्थान पर कर्नल धनीराम शांडिल को लिया गया है। सूक्खू सरकार सूचना आयोग के गठन में इस कदर फेल साबित हुए हैं कि अंतिम बार मुख्य चुनाव आयुक्त नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर अपने मुख्य सचिव आरडी धीमान को ही राज्य का मुख्य सूचना आयुक्त बनवाने में सफल हो गए थे। इसके बाद मुख्य सूचना आयुक्त का पद पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त आरडी धीमान का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जून के 2025 से खाली है, जबकि राज्य सूचना आयुक्त का पद जुलाई, 2025 से रिक्त पड़ा है। इन पदों के लंबे समय तक खाली रहने से कांग्रेस का यह दावा पूरी तरह से फेल हो गया है कि उन्होंने देश के नागरिकों को सूचना के अधिकार से नवाजा है।          जारी...

 

भारत में सोने-चांदी के दाम कम करने के प्रयास

     भारत में सोने के दाम को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारत सरकार से तो अब लोगों की अपेक्षाएं ही नहीं बची हैं। एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हाथ खड़े करते हुए लोगों को सलाह दे रहे हैं कि वह सोने चांदी की कम खरीददारी करें। दूसरी ओर सोना खरीदना भारत में रहने वाले आम लोगों के बस से बाहर हो गया है। ऐसे में कहा जा रहा है कि भारत में सोने और चांदी की ऊंची इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर सरकार अब अपने फैसले पर दोबारा विचार कर सकती है। रत्न और आभूषण परिषद के चेयरमैन राजेश रोकड़े कहते हैं कि सरकार सोने और चांदी पर आयात शुल्क घटाने के विकल्प पर चर्चा कर रही है। ज्यादा इंपोर्ट ड्यूटी लगाने का उद्देश्य सोने-चांदी के आयात को कम करना था लेकिन इसका अपेक्षित असर देखने को नहीं मिला। इसके उलट, ऊंची ड्यूटी के कारण अवैध कारोबार यानी ग्रे मार्केट को बढ़ावा मिला है। ऐसे में सरकार सही समय देखकर इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती कर सकती है। बता दें कि केंद्र सरकार ने मई माह में सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी को छह फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया था। तभी से सोने के दामों ने कुलंचे भरनी शुरू कर दी थी और यह आम लोगों के बस से बाहर हो गया है। पिछले दिनों सोने-चांदी के दाम में भारी गिरवाट देखने को मिली है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक पिछले दिनों 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 4,453 रुपए गिरकर 1.55 लाख रुपए हो गया है। वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 8,437 रुपए गिरकर 2.35 लाख रुपए पर आ गई थी। सात महीने में चांदी के दाम में 1.51 लाख की गिरावट आई है।          जारी...

 

सोलन समाचार

एक साथ हजारों कार्यकर्ताओं को पार्टी पदों से नाजा कांग्रेस ने

दो दिन में पुलिस प्रशासन की धज्जियां उड़ती नजर आ गई

सोलन नियमित पेयजल सप्‍लाई से दूर

  जारी...

 

हिमाचल समाचार

अब सभी दवाओं की जानकारी क्‍यूआर कोड से ली जा सकेगी

क्‍या हमीरपुर में किसी और देश का कानून चलता है

भाजपा के पूर्व विधायक होशियार सिंह की होशियारी पकड़ी

  जारी...

 

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