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संपादकीय
विपक्ष की जीत का इंतजार
भारतीय
लोकतंत्र अब इस दौर में आ खड़ा हुआ है कि विपक्ष की जीत को ही अब लोकतंत्र माना
जा सकता है। भाजपा पर अब यह इल्जाम और गहरा हो गया है कि वह वोट चोरी करके
चुनाव जीत रही है। चुनाव आयोग एसआईआर के जरिए भाजपा को चुनाव जीताने में मदद
करता है। यही वजह है कि अब लोग इस बात पर नजर रखने लगे हैं कि देश के किस
हिस्से में भाजपा चुनाव हारती है। निकट भविष्य में अब पश्चिम बंगाल के चुनाव
हैं और यहां भी यही माना जा रहा है कि यहां भाजपा उन्हीं पैंतरों से सरकार बना
लेगी जैसे उन्होंने हरियाणा के बाद अपनी जीत का क्रम जारी रखा हुआ है।
बंगाल में चुनाव बहुमत के लिए नहीं हो रहा है। यहां के चुनाव में यही देखा जाना
बाकि है कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी चुनावी हेराफेरी मास्टरों से निपटने में
सफल हो पाती है या नहीं। ऐसा तभी संभव हो सकता है जब पूरा बंगाल ममता बनर्जी के
पक्ष में एक तरफा मतदान करने पर उतर जाए और हेराफेरी के वोट को एक तरफा मतदान
को मात न दे सकें। बंगाल में ममता के लंबे शासनकाल के कारण ब्यूरोक्रेसी और
सरकारी कर्मचारियों पर ममता बनर्जी के कब्जे में हैं और यही चुनाव आयोग की
हेराफेरी के आरोपों को पलट सकते हैं। यही देखना बकि रह गया है कि बंगाल में
विपक्ष जीतता है या केन्द्र की सत्ता।
बंगाल से ज्यादा चरचा अब उत्तर प्रदेश की होने लगी है। यहां भी एसआईआर का जिन
बाहर निकल चुनाव है। यहां भाजपा के लिए हेराफेरी करके चुनाव जीतना ज्यादा आसान
है क्योंकि यहां कई पार्टियां हैं और हेराफेरी को ढंकने के लिए कई तरह की बातें
गढ़ी जा सकती है। जैसा कि महाराष्ट्र में हो गया। दिल्ली में केजरीवाल कभी चुनाव
न हारते पर यहां आधी-अधूरी सरकार होने के कारण सरकार पर नियंत्रण भाजपा की
केन्द्र सरकार का ही है। वहां भाजपा की वह चाल सफल हो गई। कहा जाता है कि
हरियाणा राज्य विधानसभा के बाद जितने भी चुनाव हुए हैं वह एक ही तरह की
हेराफेरी से हुए हैं।
भाजपा अब सदियों तक इस आरोप से अपना पिंड नहीं छुड़ा पाएगी कि वह चुनाव हेराफेरी
से ही जीत सकती है। इसीलिए अब लोगों को भाजपा की जीत से ज्यादा विपक्ष की जीत
का इंतजार रहता है। लोग अब लोकप्रियता की बात चुनाव परिणाम आने के बाद नहीं
करते हैं। वह बातें करते हैं कि किसने चुनाव में कैसे गच्चा दे दिया। यह बात
लोकतंत्र को मजबूत करने वाली नहीं कही जा सकती है। भाजपा हिमाचल जैसे एक्का
दुक्का छोटे राज्यों में विपक्ष की जीत को अच्छा मानने लगी है। क्योंकि वह इसके
पीछे अपना क्रूर चेहरा छुपाने का प्रयास कर लेती है।
लोगों का यह नजरिया इसलिए बना क्योंकि चुनाव परिणाम के दिन से ही चुनी हुई
सरकारें यह साबित नहीं कर पाती है कि वह अपनी लोकप्रियता से सत्ता तक पहुंची
है। दूसरे चुनाव आयोग पर जो हेराफेरी के आरोप लगते हैं उसका कोई संतोषजनक जवाब
जनता को नहीं मिलता है। चुनाव आयोग की भूमिका यह साबित करती जा रही है कि वह
ठीक से चुनाव नहीं करवा रहा है। |