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संपाकीय

औरंगजेब नहीं, जेब को देखो

     देश में अब जनता का ध्यान भटकाने के लिए औरंगजेब को आगे कर दिया गया है। लोगों को चाहिए वह औरंगजेब को नहीं अपनी जेब को देखें जो दिन प्रतिदिन खाली होती जा रही है। लोगों की जेब भरने के लिए सरकारों के पास कुछ भी नहीं है। देश को हर मोर्चे पर शिकस्त मिल रही है जिसके कारण लोग गरीबी के चक्रव्यूह में फंसते चले जा रहे हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो देश भुखमरी के दौर में पहुंच जाएगा। लोग खाना छीनकर अपना और अपने परिवार का पेट पालने की स्थिति तक पहुंच जाएंगे।
     औरंगाबाद महाराष्ट्र में खुल्दाबाद में औरंगजेब का प्राचीन किला है। इस किले में औरंगजेब की कब्र है। बस अब देश का ध्यान भटकाने और हिंदू मुसलमान का मुद्दा जिंदा रखने के लिए नया शगूफा छेड़ दिया गया है। औरंगाबाद जिसे संभाजीनगर भी कहा जाता है से करीब 11 किलोमीटर दूर यह औरंगजेब का किला है। लेकिन इसको लेकर उपद्रव नागपुर में मचाया जा रहा है जहां आरएसएस का मुख्य कार्यालय है। हिंदूवादी संगठनों ने इस औरंगजेब की कब्र को उखाड़ने का आंदोलन शुरू कर रखा है। इसकी हवा पूरे देश में सुनियोजित ढ़ंग से फैलाई जा रही है। वह भी ऐसे समय में जब लोग दो जून की रोटी कमाने के लिए दर दर भटक रहे हैं और पैसों को लेकर परेशान हैं।
     देश की हालत वैसे भी ठीक नहीं है। ग्रोक जहां भाजपा और आरएसएस की पोल खोलने में लगा है वहीं इनके मित्र संगठन हिंदू मुसलमान विवाद उठाकर देश का ध्यान भटकाने में लगे हैं। बेरोजगारी पर कोई बात नहीं है। देश की आर्थिक स्थिति पर कोई बात नहीं हो रही है। अमेरिका ने जो दबाव बना रखा है उससे देश की आर्थिक स्थिति सौ करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देने पर जा पहुंची है। मिडल क्लास का करीब 94 लाखों करोड़ रुपया शेयर मार्केट में डूब चुका है। उद्योगपतियों का करीब 16 लाख करोड़ रुपया सरकार माफ कर चुकी है। देश में उत्पादन लगभग ठप्प हो चुका है। इसके अलावा कहीं से कोई ऐसा समाचार नहीं मिल रहा है जो यह संदेश देशवासियों तक पहुंचाए कि देश कैसे खुशहाल बन पाएगा।
     बावजूद इसके देश में ऐसी बातें उछाली जा रही हैं जिससे देश के आर्थिक संकट से ध्यान भटकाया जा सके। औरंगजेब के मसले से क्या देश की हालत सुघर जाएगी। क्या कुंभ नाहने से देश की गरीबी दूर हो जाएगी। इस तरह की कहानियों से देश का पेट नहीं भरने वाला है। लोगों को चाहिए कि वह धार्मिक उन्माद फैलाने वाले मसलों से दूर रहें। जब लोग इस तरह की बातों की ओर ध्यान देना बंद कर देंगे तभी लोगों की खुशहाली की बात शुरू हो सकेगी। कुल मिलाकर देश सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सेवा क्षेत्र में काफी कमजोर हो चुका है। लोगों को वह दिखाया जा रहा है जिसे मौजूदा समय में दिखाने की जरूरत नहीं है। जिन लोगों को इस में राजनैतिक लाभ दिखता है उनकी ओर आम जनता को ध्यान नहीं देना चाहिए। क्योंकि अब विपक्ष को भी सदन में बोलने का समय नहीं दिया जा रहा है और पूरा सिस्टम संविधान की राह भटक चुका है। ऐसे में लोगों को सिर्फ आने वाले कल की चिंता करनी चाहिए।

 
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