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राजीव गांधी पर लगा बोफोर्स दाग धुल गया

सीबीआई कोर्ट में बोफोर्स घोटाला साबित नहीं कर पाई

विशेष संवाददाता

     विश्व भर में चरचा में रहा बोफोर्स गन घोटाला अब पूरी तरह से समाप्त हो गया है। इससे तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी पर लगाया गया दाग भी पूरी तरह से धुल गया है। इसी जांच कर रही सीबीआई अदालत में इस केस में लगे आरोपों को सही साबित नहीं कर पाई। यह केस इसलिए जाना जाता है कि इस केस के चलते भारी बहुमत वाली राजीव गांधी सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी।
     अब करीब 40 साल पुराने बोफोर्स घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी याचिका भी खारिज कर दी है इसी के साथ ही अब यह मामला पूरी तरह समाप्त हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस केस में आगे सुनवाई की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने 2005 के दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली अपील भी सुनने से मना कर दिया, जिसमें हिंदुजा ब्रदर्स और बोफोर्स कंपनी को बरी कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब 2005 में ही केस खत्म हो चुका है और 2018 में सीबीआई की अपील भी खारिज हो गई थी तो अब आखिर बचा ही क्या है जिस पर सुनवाई की जाए।
     बता दें कि 1986 में भारत ने स्वीडिश कंपनी एबी बोफोर्स से 400 होवित्जर तोपों का सौदा किया था। यह डील 1,437 करोड़ रुपए की थी। वर्ष 1987 में आरोप लगे कि इस सौदे को हासिल करने के लिए कथित रूप से कमीशन (रिश्वत) दी गई थी। घोटाले के आरोप लगने से तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1989 का चुनाव हार गए थे।
     बोफोर्स घोटाले की जांच पर करीब 250 करोड़ रुपए खर्च हुए, लेकिन इतने पैसे खर्च करने के बाद भी सीबीआई मजबूत सबूत नहीं जुटा पाई। मामले में कोई भी आरोप साबित करने में सीबीआई असफल रही। इसके बाद यह मामला देश के सबसे बड़े राजनीतिक घोटालों में शामिल हो गया। बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने 2005 के फैसले में कहा था कि सीबीआई आरोपों को साबित नहीं कर पा रही है।

 
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