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ग्रास साप्ताहिक, निर्मल निवास, सपरून, सोलन
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एक साथ हजारों कार्यकर्ताओं को पार्टी पदों से नाजा कांग्रेस ने
चुनावी वर्ष में जम्बों
कार्यकारिणी बना डाली कांग्रेस ने...
निजी संवाददाता
सोलन :
हिमाचल कांग्रेस ने
हजारों कार्यकर्ताओं को संगठन में पदों से नवाजा गया है। अकेले सोलन नगर में ही
कांग्रेस ने 5 वरिष्ठ उपाध्यक्ष और 35 महा सचिव नियुक्त कर डाले। हलांकि पहले
के तरह एक आदेश से आज की जा रही सभी नियुक्तियां रद्द की जा सकती हैं। प्रदेश
के अन्य भागों में भी कांग्रेस की एक बड़ी फौज खड़ी करने का प्रयास किया जा रहा
है। पर इससे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार फिर से सत्ता में लौट पाएगी यह बात
अभी से कह पाना काफी कठिन है।
प्रदेश में कांग्रेस सरकार बने हुए लगभग चार साल का समय
पूरा हो चुका है और अब पांचवें साल में कांग्रेस को आम राज्य विधानसभा चुनावों
में जाना है। कई वर्षों से सरकार और प्रदेश के बड़े नेताओं में इस बात को लेकर
टकराव रहा है कि प्रदेश में कांग्रेस का संगठन है ही नहीं और संगठन के लोगों को
सरकार में प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। इस टकराव के बीच जो मंत्री हिमाचल
सरकार में हैं उन्होंने तो अपने चेहतों को सरकार में भागीदारी दिलवा दी लेकिन
आम कार्यकर्ता की अनदेखी होती रही। अब हिमाचल की कांग्रेस को चुनाव में उतरने
से पहले यह ख्याल आया गया कि चुनाव तो पार्टी कार्यकर्ताओं के दम पर ही जीते जा
सकते हैं। उन मित्रों और रिश्तेदारों के दम पर तो चुनाव नहीं जीते जा सकते हैं
जिन्हें प्रदेश सरकार ने सत्ता में आने के बाद बड़े बड़े मलाईदार पदों से सुशोभित
कर दिया था।
अब कांग्रेस की जम्बों कार्यकारिणी का गठन हर स्तर पर
किया जा रहा है। सोलन में भी कांग्रेस में उन लोगों को अधिकतर पदों से नवाजा
गया है जो पिछले काफी समय से नाराज चल रहे थे। स्थानीय विधायक और मंत्री कर्नल
धनी राम शांडिल से उन्हें मिलने का अवसर और बात रखने का मौका भी नहीं मिलता था,
अगर मिलता भी था तो उनके काम नहीं होते थे। ऐसे आरोप कांग्रेस की बैठकों में
कार्यकर्ता लगाते रहे हैं। ऐसे कार्यकार्ता अब कांग्रेस के पदाधिकारियों की
सूचि में आ गए हैं। अब वह अंतिम वर्ष में बड़े कांग्रेसी नेता बनकर चुनावी कार्य
करेंगे भी या खिलाफ कार्य करेंगे कहा नहीं जा सकता है। निगम चुनावों में
जिन्होंने पार्टी के खिलाफ काम किया और कांग्रेस को नहीं जीतने दिया वह क्या अब
सबसे आगे चलेंगे।
फिलहाल इतना कहा जा सकता है कि चुनावी वर्ष में जाने के
कारण बनाई गई जम्बों कार्यकारिणी कुछ कमाल दिखाएगी या वह मलाई खाने वाले नेताओं
से ही काम करवाने को कह देगी इस वाक्य के साथ कि ‘जिसकी जितनी भागीदारी उतनी
उसकी जिम्मेवारी’। यूं भी चुनाव के बाद एक नोटिफिकेशन से उनके पद पहले की तरह
साफ हो जाएंगे।
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दो दिन में पुलिस प्रशासन की धज्जियां उड़ती नजर आ गई
सोलन में दो खूनी घटनाओं पर चिंता...
निजी
संवाददाता
सोलन :
सोलन नगर में कानून व्यवस्था की धज्जियां दो
दिनों में ही उड़ती नगर आई। जब दो अलग अलग जानलेवा घटनाओं में एक घटना में एक
युवक की मौत हो गई जबकि एक पीजीआई चंड़ीगढ़ में जिंदगी और मौत की जंग झेलता रहा।
इसके अतिरिक्त नगर में युवाओं में निरंतर बढ़ती जा रही खूनी झड़पें सोलन की कानून
व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रही हैं।
पिछले सप्ताह माल रोड पर शराब की खरीद से शुरू हुआ झगड़ा
एक युवा के लिए जानलेवा साबित हो गया। एक युवा के सिर पर बेल्चे से प्रहार किया
गया और उसका सिर बुरी तरह से फट गया। बाद में उसे पीजीआई इलाज के लिए भेज दिया
गया। चौक बाजार सोलन में हुई खूनी झड़प में कालका के एक युवक के पेट में छूरा
घौंप दिया गया अस्पताल पहुंचने पर उसे मृत घोषित कर दिया गया।
हलांकि दोनों घटनाओं में शामिल युवाओं को पुलिस ने
गिरफ्तार कर लिया है लेकिन इन घटनाओं में पुलिस प्रशासन पर प्रश्नचिन्ह लग रहे
हैं। लोगों का कहना है कि युवाओं में पुलिस का खौफ खत्म हो गया है। नगर में
अवैध नशे का बड़ा व्यापार चल रहा है और यहां एक तरह का अपराध पलने लगा है जो
किसी न किसी झगड़े के रूप में सामने आने लगे हैं। दो दिन में घटी घटनाएं इसका
स्टीक उदाहरण हैं।
माल रोड पर घटित घटना में शराब के नशे में घुत होकर युवा
बाजार में झगड़ा करते रहे, यदि पुलिस प्रशासन मुस्तैद होता तो शराब के नशे में
सड़कों पर हुड़दंग करने वाले युवाओं को हिरासत में ले लिया जाता तो शायद यह झड़प
खूनी खेल में तब्दील न होती। दूसरी घटना के पीछे भी नशे को ही जिम्मेदार माना
जा रहा है। क्योंकि चौक बाजार में जहां इस खूनी वारदात को अंजाम दिया गया वह
स्थान नशे वाली गली के नाम से मशहूर हो चुका है। स्थानीय लोग पुलिस में शिकायत
भी कर चुके हैं लेकिन यहां के नशे के कारोबार को रोकने में पुलिस सफल नहीं हो
पाई है।
लोग कहने लगे हैं कि पुलिस यदि छोटे अपराध को गंभीरता से
ले तो बड़े अपराध होने से बचा जा सकता है। लोगों का कहना यह भी है कि यदि पिछले
दो दिन की गंभीर खूनी झड़प के बाद भी पुलिस प्रशासन की नींद नहीं टूटी तो इस
प्रकार की घटनाएं सोलन नगर का दुर्भाग्य बन जाएंगी।
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बाजार से अतिक्रमण हटाया
निजी संवाददाता
सोलन : एक बार फिर
सोलन प्रशासन ने बाजारों से अतिक्रमण हटाने की मुहिम शुरू कर दी है। अपनी
हद से बाहर निकलने वाली दुकानों को तोड़ा जा रहा है। इससे लोगों को पता चल
गया है कि दशहरा-दीपावली पर्व आने वाले हैं।
पिछले कुछ वर्षों में देखा गया है कि शूलिनी मेला और
दीपावली से पहले ही बाजारों से अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही जिला प्रशासन
द्वारा की जाती है। जाहिर है कि इन दिनों सोलन नगर में अपेक्षा से अधिक भीड़
होने लगती है। लोगों को अतिक्रमण से कोई असुविधा न हो इसलिए बाजार पर जिला
प्रशासन अपनी पैनी नजर दौड़ाना शुरू कर देता है।
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सोलन नियमित पेयजल सप्लाई से दूर
विरोध करने वाले बदल गए, समस्या वहीं खड़ी है...
निजी
संवाददाता
सोलन :
सोलन नगर में दो दो पेयजल परियोजनाओं के होने
के बावजूद सोलनवासियों को नियमित पेयजल सप्लाई कभी नहीं मिल पाई है। पहले जहां
तीसरे-चौथे दिन पेयजल की सप्लाई की जाती थी वहीं अब यह सप्लाई आठ से दस दिन में
की जाने नगी है। फिलहाल लोगों ने नगर निगम और जलशक्ति विभाग के आश्वासनों को
विभाग की लीपापोथी कहना शुरू कर दिया है।
जब कांग्रेस नगर निगम सोलन में सत्ता पर विराजमान थी तो
भी सोलनवासिों को आठ नौ दिन बाद ही पेयजल नसीब होता था और भाजपा इसका विरोध
करती थी। अब नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है और कांग्रेस पार्टी इसका विरोध कर
रही है। नगर निगम चुनाव के बाद सोलनवासियों के नसीब में यही बात आई है कि विरोध
करनी वाली पार्टी बदल गई है और सोलन की पेयजल समस्या अब राजनीति का खिलौना बन
गई है।
नगर निगम पर जब कांग्रेस काबिज थी तो वह लोगों से यही
कहती थी कि जब उनकी प्रदेश में सरकार आएगी तो सोलन की पेयजल समस्या को हल कर
दिया जाएगा। अब भाजपा यह कहने लगी है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार लाओ और सोलन
के लिए पेयजल पाओ। यह फरेब कब तक चलता रहेगा...।
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