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सोलन समाचार

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रेन शैल्‍टर में फिर मिला एक शव, रैन बसेरा बेकार साबित

सोलन नगर की सड़को पर अज्ञात शव मिलना चिंताजनक...

निजी संवाददाता

     सोलन : पिछले दिनों पुराने डीसी आफिस के समीप बने रेन शैल्टर से एक लावारिस शव बरामद हुआ है। यह कोई नई बात नहीं है। कुछ वर्ष पूर्व भी यहां सर्दी के कारण एक व्यक्ति का शव मिला था। नगर निगम की पार्किंग में भी कुछ वर्ष पहले अज्ञात व्यक्ति का शव मिला था। यहां सवाल यह खड़ा होता है कि सड़कों के किनारे अज्ञात शव क्यों मिल रहे हैं।
     यदि किसी गरीब व्यक्ति को रात के समय कोई छत नसीब नहीं होती है तो उसके लिए सोलन में ठोडो ग्राउंड के समीप एक रैन शैल्टर सरकार द्वारा बनाया गया है जहां कोई थी गरीब व्यक्ति निशुल्क रात को सो सकता है। क्या पुलिस या जिला प्रशासन ने कोई ऐसी व्यवस्था नहीं बनाई है कि रात को सड़कों के किनारे सोने वाले व्यक्तियों को रैन बसेरा में भेजा जाए। यदि जिला प्रशासन रैन बसेरे को चला रहा है कि फिर रेन शैल्टरों में अज्ञात शव क्यों मिल रहे हैं। आखिर सोलन में रैन बसेरा क्यों बनाया गया है।
     कुछ वर्ष पहले जब नगर निगम की पार्किंग में एक व्यक्ति ठंड के कारण मरा हुआ मिला था तो सोलन की समाजसेवी संस्था ट्रयू फाइटर्स ने इस मामले को उठाया था। तब पता चला था कि रैन बसेरा में तो तत्कालीन नगर परिषद के कर्मचारियों ने अपना आवास बनाया हुआ था। कर्मचारियों के आवास को तब सरकार ने खाली करवा दिया था और कहा था कि यहां रैन बसेरा में उन्हीं लोगों के लिए रहने की व्यवस्था की जाएगी जिन गरीब लोगों को रात के समय कहीं छत नसीब नहीं होती है। बावजूद इसके सोलन नगर की सड़कों पर बाहर से आए अज्ञात लोगों के शव मिलने का सिलसिला निरंतर जारी है।
     अब पिछले सप्ताह ही पुराने डीसी आफिस के समीप बने रेन शैल्टर से किसी व्यक्ति के शव मिलने की सूचना मिली है। क्या यह व्यक्ति रात के समय जब रेन शैल्टर में सोया हुआ था तो किसी ने उसे रैन बसेरा में पहुंचाने का कष्ट नहीं किया।

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पाइपें चोरी करके भाग रहे ट्रक को पकड़ा

कुमारसेन के आईपीएच स्‍टोर से चोरी हुई थी पाइपें...

निजी संवाददाता

     सोलन : पिछले दिनों शिमला पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए पाइप चोरी करके फरार हुए ट्रक को सोलन के बाईपास के समीप पकड़ लिया। कहते हैं यह पाइपें कुमारसैन के नोग कांची आईपीएच स्टोर से चोरी हुई थी। शिमला पुलिस की टीम ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार्रवाई करते हुए चोरी की पाइपों से भरा ट्रक सोलन में पकड़ लिया।
     बताया जा रहा है कि आरोपी ट्रक चालक आईपीएच के स्टोर से चोरी की हुई पानी की पाइपें हरियाणा ले जाने की फिराक में था। इससे पहले कि आरोपी चोरी की पाइपें लेकर प्रदेश का बॉर्डर क्रॉस करता, शिमला पुलिस ने सोलन के आंजी में पाइपों से भरे ट्रक को पकड़ लिया। पुलिस की टीम ने ट्रक से करीब 243 पाइपें बरामद की हैं। पुलिस पता लगा रही है कि चोरी की वारदात में कौन-कौन लोग शामिल हैं। जानकारी के अनुसार पुलिस थाना कुमारसैन में जल शक्ति विभाग के जेई प्रदीप कुमार पुत्र रोशन लाल निवासी ग्राम प्रलिसेरी डाकघर महोग तहसील करसोग जिला मंडी ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया था कि तीन और चार मार्च की रात को कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने आईपीएच स्टोर के पास नोग कांची से लगभग 100 जीआई पाइप चोरी कर ली।
     शिमला पुलिस की टीम ने जलशक्ति विभाग के जेई की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए चोरी की पाइपों से भरे ट्रक को सोलन के आंजी से पकड़ा है। हलांकि आरोपी ट्रक चालक मौके से फरार है। मामले की जांच को लेकर पुलिस ट्रक मालिक से भी पूछताछ कर रही है और पता लगा रही है कि इसमें आईपीएच के स्टोर में इतनी बड़ी चोरी कैसे हो गई।

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सोलन के पत्रकार संगठनों में भी जाली पत्रकारों को लेकर सुगबुगाहट

सोलन नगर में तीन पत्रकार संगठन बन गए हैं...

निजी संवाददाता

     सोलन : मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू के विधानसभा के भीतर जाली पत्रकारों के संदर्भ में की गई टिप्पणी के बाद हिमाचल ही नहीं सोलन के पत्रकार संगठनों में भी बेचैनी बढ़ गई है। सोलन में पत्रकारों के तीन संगठन हैं और तीनों में ऐसे पत्रकारों की कमी नहीं है जो अपने आपको स्वयं ही पत्रकार घोषित किए हुए हैं और ऐसा हिमाचल के कई और जिलों में भी है। इस पर सबसे बड़ी शिकायत यह है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के विंग आरएनआई का काम स्वयं गैर कानूनी तरीके से करना शुरू कर दिया है।
     अब मुख्यमंत्री ने सदन के भीतर यह बात उठाई है तो बात दूर तक जाएगी। इससे सोलन के तीनों पत्रकार संगठनों के कुछ पत्रकारों की चिंता बढ़ गई है कि अब कहीं उनकी पत्रकारिता की दुकान बंद न हो जाए। मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में सोलन जिला के बद्दी का जिक्र करते हुए कहा है कि वहां फिरौती पत्रकारिता ज्यादा ही होती है। अब जाहिर है कि मुख्यमंत्री ने जब ऐसा कहा है तो उनके पास इसकी पुख्ता सूचना होगी। लेकिन मुख्यमंत्री के पास शायद यह सूचना नहीं होगी कि जिला लोकसंपर्क अधिकारी ही नकली पत्रकार पैदा करने का गिरोह चला रहे हैं। विभाग के अधिकारी उन्हीं पत्रकारों को पत्रकार वार्ता के लिए बुलाते हैं जिनका पुरजोर विरोध मुख्यमंत्री सदन के भीतर कर रहे थे।
     मजेदार बात तो यह है कि ऐसे कई पत्रकारों को तो सूचना एवं जनसंपर्क विभाग मान्यता प्राप्त पत्रकार भी बना चुका है। स्पष्ट शब्दों में कहा जाए तो पत्रकार वार्ता में वही लोग बुलाए जाते हैं जिनके संस्थान पत्रकारिता के लिए निर्धारित अथॉरिटी से मान्यता प्राप्त नहीं हैं। ऐसे में असली पत्रकारों ने तो पत्रकार वार्ता में जाना भी छोड़ दिया है। क्योंकि वहां न तो जनहित से जुड़े प्रश्न होते हैं और न ही उत्तर।
     पत्रकारों पर प्रश्न खड़ा करने से पहले मुख्यमंत्री को उन लोक संपर्क अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए जो प्रदेश में नकली पत्रकारिता के जनक बने हुए हैं। जाहिर है कि अब जब मामला मुख्यमंत्री की तरफ से उठा है तो इसका कोई न कोई समाधान जरूर निकलेगा। जो लोग सही मायने में पत्रकारिता करना चाहते हैं वह सही दिशा को पकड़ेंगे और जो फिरौतीबाज पत्रकार पनप रहे हैं उन्हें सरकार काबू करेगी। इसमें ऐसी कार्यवाही की जरूरत है जैसी नकली एसपी, एसडीएम बताने वाले लोगों पर होती है।

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होटल का खाना खाने से बीमार

निजी संवाददाता

     सोलन : भाजपा नेता के होटल में आयोजित एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कुछ शिक्षक सड़ा हुआ खाना खाने से बीमार हो गए। इनमें से 11 को हालत बिगड़ने के कारण क्षेत्रीय अस्पताल में भर्ती करवाया गया। स्थानीय डाइट द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर से 170 शिक्षक भाग लेने आए थे।
     शिक्षकों ने बताया कि तीन दिनों से उनकी तबीयत खराब ही रही लेकिन किसी ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। जब ज्यादा शिक्षक बीमार पड़ गए, तब जाकर उन्हें अस्पताल भेजा गया। एमएस महेंद्र पाल व डा. मनीष मित्तल ने भी माना कि फूड प्वाइजनिंग के कारण शिक्षकों की तबीयत बिगड़ी होगी। अब यह जांच का विषय है कि क्या वास्तव में शिक्षकों की तबीयत खराब खाने से बिगड़ी या किसी और वजह से। यदि खराब पानी इसी वजह होता तो होटल स्टाफ ने भी वही पानी पिया होगा पर वह बीमार नहीं पड़े।

 
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