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अब एनसीटीई ने
मंडी कॉलेज बीएड की मान्यता रद्द की
एनटीटी के बाद अब बीएड में लगा
हिमाचल सरकार को झटका...
विशेष संवाददाता
शिमला : राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) से हिमाचल सरकार को फिर एक
झटका लगा है। न जाने मुख्यमंत्री खुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश में किस प्रकार
का शिक्षा तंत्र खड़ा करना चाह रहे हैं। प्रदेश के सबसे बड़े वल्लभ गवर्नमेंट
कॉलेज मंडी के बीएड कार्यक्रम की मान्यता समाप्त कर दी है। इतने वर्ष हो गए
लेकिन प्रदेश सरकार ने कभी भी एनसीटीई के नियमों को महत्व नहीं दिया।
एनसीटीई के नियमों को नजरअंदाज करने का खमियाजा प्रदेश के युवा भुगत रहे हैं।
प्रदेश सरकार पिछले दो दशकों से एनसीटीई के दिशानिर्देश पर कोई ठोस समाधान नहीं
निकाल पाई है। अब तो हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के बाद वल्लभ गवर्नमेंट कॉलेज
के बीएड कार्यक्रम में चल रही दो इकाइयों जिनमें 100-100 सीटें हैं की मान्यता
समाप्त होने की स्थिति पूर्णतः स्पष्ट हो गई है। इससे पहले प्रदेश सरकार ने
एनटीटी टीचर भर्ती में भी एनसीटीई के नियमों को गच्चा देने का प्रयास करते हुए
नए टीचर भर्ती करने का प्रयास किया।
प्रदेश सरकार ने चोर दरवाजे से जितने भी अध्यापकों को भर्ती की है वह सिर्फ
एनटीटीई को धोखा देने के मकसद सी ही की गई है। अब जो झटके पर झटके प्रदेश सरकार
को लग रहे हैं उससे अब तो सरकार को एनसीटीई को गंभीरता से लेना शुरू कर देना
चाहिए ताकि शिक्षा जगत से जुड़ने का स्वपन पाले युवाओं के साथ कोई धोखा न हो और
स्कूली बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो।
अब हिमाचल हाईकोर्ट ने भी राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद द्वारा मंछी कालेज के
कार्यक्रम की मान्यता निरस्त करने के निर्णय को सही माना है। इस घटनाक्रम ने
सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है। ऐसी
परिस्थिति में कुछ नेताओं की नजर सरदार पटेल यूनिवर्सिटी मंडी पर टिक गई है। इस
विश्वविद्यालय से अपेक्षा की जा रही है कि वह तत्काल हस्तक्षेप करते हुए
वर्तमान बीएडी विद्यार्थियों का माइग्रेशन अपने संबद्ध अन्य मान्यता प्राप्त
कॉलेजों में सुनिश्चित करे, ताकि उनकी पढ़ाई निर्वाध रूप से जारी रह सके।
अभी भी कुछ लोगों का मानना है कि विशेष आपात व्यवस्था बनाकर माइग्रेशन
प्रक्रिया को शीघ्र और पारदर्शी ढंग से पूरा किया जाना समय की आवश्यकता है। साथ
ही यह भी आवश्यक है कि विश्वविद्यालय स्पष्ट अधिसूचना जारी कर विद्यार्थियों और
अभिभावकों को यह भरोसा दिलाए कि प्रथम सेमेस्टर परीक्षाओं में उनकी भागीदारी
सुरक्षित रहेगी और उनका शैक्षणिक वर्ष प्रभावित नहीं होगा। यहां प्रश्न यह खड़ा
हो गया है कि जब एनसीटीई ने कालेज के बीएड कोर्स की मान्यता ही रद्द कर दी है
तो इसमें पढ़ रहे छात्रों को पास करके आगे की पढ़ाई प्रदेश सरकार किस फार्मूले से
करवाएगी। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय को एनसीटीई के नियमों में से ही कोई लकूना
निकाल कर छात्रों के भविष्य को बचाना होगा। वरना इसे फिर से एनसीटीई के साथ
किया गया नया धोखा ही माना जाएगा।
हैरानी इस बात की है कि एनसीटीई के नियम कोई नए नहीं हैं। सरकार सिर्फ इस
वर्जिश में लगी हुई है कि पूर्व सरकारों ने किस प्रकार एनसीटीई को धोखा दिया और
वह भी धोखा देने का कोई नया फार्मूला तलाश कर लेंगे। अब तो प्रदेश हाई कोर्ट ने
भी साफ कह दिया है कि प्रदेश सरकार को एनसीटीई के नियमों और आदेशा को मानना ही
पढ़ेगा। देखना है प्रदेश करकार को होश आता भी है या नहीं। सरकार अपनी कार्य
प्रणाली को बदलती है या नहीं।
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