हिमाचल पुलिस कहां है
विशेष संवाददाता
शिमला : हिमाचल में पुलिस कहां है किसी को पता नहीं है। जिस प्रकार बिलासपुर के
एक पूर्व विधायक को गोली मार कर युवक फरार हो जाते हैं उससे लगता नहीं कि
अपराधियों में पुलिस का कोई खौफ है। चिट्टा बेचने वालों को लोग सड़क पर धून रहे
हैं पुलिस कहां है किसी को पता नहीं है। लोगों की छोटी मोटी शिकायतों पर तो
पुलिस मौन ही रहती है।
यह वही पुलिस है जिसके मौजूद रहते हुए हिमाचल के नौ विधायकों को दूसरे राज्य के
पुलिस वाले तथाकथित पुलिस वाले अपनी गाड़ी में बिठकर हिमाचल से बाहर ले जाते
हैं। विधानसभा के गेट को तोड़कर हथियारबंद सुरक्षा प्रदान करने वाले प्रदेश की
विधानसभा में प्रवेश करते हैं हिमाचल पुलिस तब भी चुप थी और आज भी चुप है।
हिमाचल पुलिस को इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि उसके कुछ बड़े अधिकारियों को
कस्टोडियल डेथ में उम्र कैद की सजा हो चुकी है।
हिमाचल पुलिस को आजकल सिर्फ चिट्टा बेचने वालों को पकड़ने का काम है। इस मामले
में पुलिस ने कुछ उपलब्धियां जरूर हांसिल की हैं। लेकिन इस बात पर से भी नकाब
उतर चुका है कि कुछ पुलिस वाले भी चिट्टा बेचने के आरोपी पाए गए हैं। जाहिर है
कि प्रदेश में चिट्टा बेचने वालों को पुलिस का संरक्षण प्राप्त था। यही वजह है
कि मां बेटी, वकील, डाक्टर, पटवारी तक चिट्टा बेचने के आरोप में पकड़े गए हैं।
इन घटनाओं के बाद कहा जा सकता है कि प्रदेश की पुलिस का खौफ किसी को नहीं है।
तभी हिमाचल के घर घर से चिट्टा बेचने या रखने के समाचार आए दिन सुनाई दे रहे
हैं।
पूर्व विधायक बंबर ठाकुर पर हथियार बंद लोगों द्वारा किया गया हमला भी इसी बात
का परिणाम है कि अपराधियों पर पुलिस का खौफ ही नहीं है। पुलिस का आम नगरिकों के
बीच कोई संपर्क नहीं है, जो पुलिस को किसी भी अपराधिक घटनाओं की पूर्व सूचना दे
दे। ऐसी घटनाएं भी देखने को मिली हैं कि जहां पुलिस वाले किसी शरीफ नागरिक को
बिना वजह धमकाते हुए मिले हैं। कहा जा सकता है कि प्रदेश में पुलिस से आम लोगों
को भी कोई आस नहीं रह गई है। प्रभावशाली लोगों की भले ही पुलिस मदद करती होगी
लेकिन आम लोगों को कानूनी हिफाजत देने का रिवाज पुलिस विभाग में खत्म हो गया
है।
बंबर ठाकुर पर हमले को लेकर विपक्ष ने सत्ता पक्ष को घेरना शुरू कर दिया है।
उनका कहना है कि जब एक पूर्व विधायक ही सुरक्षित नहीं है तो फिर आम लोगों की
सुरक्षा की गारंटी पुलिस किस प्रकार ले सकती है। हलांकि पुलिस ने बंबर ठाकुर पर
हुए हमले के आरोपियों को ढूंढ निकालने का दावा किया है लेकिन सवाल यह है कि
हथियारों से लेस अपराधी हिमाचल जैसे शांतप्रिय प्रदेश में कैसे घूमते रहे और
वारदात से पहले क्यों नहीं धर लिए गए। यही हाल चिट्टा बेचने वालों का है लोग
चिट्टे की खेप लेकर हिमाचल के गांव गांव, घर घर तक पहुंच रहे हैं उनकी धर पकड़
इतनी धीमी क्यों है।
क्या सरकार लोगों की सुरक्षा की दृष्टि से संदिग्ध लोगों की तलाशी लेने के आदेश
पुलिस विभाग को नहीं दे रही है। क्या पर्यटकों को तंग न किए जाने को लेकर पुलिस
गश्त में ढील दी जा रही है जिसका फायदा उठाकर लोग प्रदेश में अपराधिक
गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं। प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन को चाहिए कि वह ऐसे
कार्य ज्यादा करें जिससे लोगों में इस बात की उम्मीद बढ़े कि पुलिस यहां मौजूद
है और लोगों के जानमाल की सुरक्षा में लगी हुई है।
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