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अब मुख्यमंत्री
सुक्खू ने बाहरी राज्य की पुलिस को आड़े हाथों लिया
यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को गिफ्तार करने आए थे...
विशेष संवाददाता
शिमला : इस बार मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बाहरी राज्यों से मुंह
उठाकर प्रदेश में घुसने वाली पुलिस को आड़े हाथों ले लिया। अब उन्होंने राज्य
विधानसभा में भी यह बात कही है। इससे पूरे देश में यह संदेश गया कि हिमाचल भी
भारतीय गणराज्य का एक सदस्य है और वहां रहने वाले नागरिकों की भी कोई संप्रभुता
है जिसकी रक्षा करने प्रदेश सरकार का भी एक कर्तव्य है।
जबकि इससे पहले विधायकों को उठाकर ले जाने वाले मामले में वह ऐसी कार्यवाही से
चूक गए थे। अब ताजा घटना में हुआ यूं था कि रोहडू के चिड़गांव के एक होटल से
बिना किसी पूर्व सूचना के युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने
के मामले में शिमला पुलिस ने दिल्ली के एसीपी समेत करीब 20 पुलिस कर्मियों को
नामजद कर लिया था। पहले पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ चिड़गांव थाने में एफआईआर दर्ज
की थी।
घटना के दिन सुबह करीब पांच बजे सादे कपड़ों में चिड़गांव के एक होटल में पहुंची
दिल्ली पुलिस की टीम यहां ठहरे युवा कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं को साथ ले गई
थी। इसके बाद हिमाचल पुलिस ने आईएसबीटी शिमला, शोघी और सोलन के धर्मपुर में
नाकाबंदी कर दिल्ली पुलिस टीम को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने इनके खिलाफ
बीएनएस की धारा 140 (3) के तहत अपहरण, 329(4) के तहत बिना अनुमति के किसी की
संपत्ति में घुसने, 127 (2) में किसी को अवैध रूप से हिरासत में लेने, धारा 190
में विधि विरुद्ध कार्य करने की कार्यवाही कर डाली। पकड़े जाने पर यह दिल्ली और
हरियाणा पुलिस कर्मचारी निकले।
तब जाकर पता चला कि यह मामला एआई समिट के दौरान यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं की
ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन से संबंधित है। दिल्ली में दर्ज केस में इन तीनों
को पकड़ने बाहरी राज्य की पुलिस हिमाचल में आई थी। असली खेल तब शुरू हुआ जब
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू हिमाचल पुलिस की इस कार्यवाही पर तुरंत अपनी
मुहर भी लगा दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल पुलिस अच्छा काम कर रही है फिर भी भाजपा उसका
विरोध कर रही है। दिल्ली पुलिस को अगर यहां से किसी को लेकर जाना था तो स्थानीय
पुलिस को सूचित करती। दिल्ली पुलिस को कानून के तहत कार्य करना चाहिए था।
दिल्ली-हरियाणा पुलिस किसी को भी उठा कर ले जाए और हम उसको जाने दें तो हमारी
पुलिस का काम क्या रह गया। कोई बगैर वर्दी आएगा और किसी को उठाकर लेकर जाएगा और
हिमाचल पुलिस को जानकारी नहीं होगी तो यह उचित नहीं। उन्होंने कहा कि दिल्ली
पुलिस को ट्रांजिट रिमांड दस्तावेज दिखाने चाहिए थे। दिल्ली पुलिस डीजीपी से
मिलती और कह देती कि हम इस जगह जा रहे हैं तो इतनी बड़ी बात नहीं होती।
इससे पहले भी बाहरी राज्यों की पुलिस हिमाचल में घुसकर बिना स्थानीय पुलिस को
सूचना दिए आरोपियों को उठाती रही है। इतना ही नहीं पिछले राज्यसभा चुनाव के
दौरान तो बाहरी राज्य की हथियारबंद पुलिस हिमाचल में घुसी और विधायकों को अपने
साथ उठाकर ले गई। सरकार तोड़ने की मंशा से उठाए गए विधायकों को बाहरी राज्स की
पुलिस हिमाचल विधानसभा का गेट तोड़कर अंदर घुस गई। तब भी कहा गया था कि
मुख्यमंत्री सुक्खू को बाहरी राज्य की पुलिस को हिरासत में ले लेना चाहिए था और
उन पर केस चलाया जाना चाहिए था। शायद तब मुख्यमंत्री नए थे लेकिन इस बार वह
काफी परिपक्व नजर आए और बाहरी राज्य की मुंह उठाकर घुस जाने वाली पुलिस को कड़ा
सबक सिखा दिया। सोचो अगर यह कोई नकली पुलिस के वेश में होते और किसी अप्रिय
घटना को अंजाम दे देते को इसी जिम्मेदारी कौन लेता। पुलिस को जिम्मेदारी से काम
करना चाहिए।
बाद में दिल्ली पुलिस ने आरोपियों को ले जाने के लिए सभी औपचारिक्ताएं पूरी की
तभी वह दिल्ली की अदालत में आरोपियों को पहुंचा सके। यहां एक प्रश्न अभी भी खड़ा
है कि दिल्ली पुलिस तो अपने आरोपियों को पकड़ने के लिए आई थी लेकिन हरियाणा
पुलिस हिमाचल में क्या करने आई थी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने राज्य विधानसभा में
हिमाचल के लोगों को इस बात की भी गारंटी दी है कि कोई भी पुलिस हिमाचल में बिना
इजाजत के दाखिल नहीं होगी। इससे पहले कुछ मामले ऐसे भी सामने आए हैं कि दूसरे
राज्य की पुलिस ने किसी आरोपी को उठाया और जब उन्होंने दूसरे राज्य की पुलिस को
सौंपा तो उनका एनकाउंटर कर दिया गया। इसलिए किसी भी राज्य की पुलिस को
अपराधियों को पकड़ने के लिए स्थानीय पुलिस को विश्वास में लेना अतिआवश्यक होना
चाहिए।
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