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सुक्खू सरकार ने
अनावश्यक पंगा ले लिया
चुनाव आयोग की संवैधानिक बाद्यता चुनाव समय पर हों...
विशेष संवाददाता
शिमला : हिमाचल प्रदेश में पंचायती राज चुनावों को लेकर प्रदेश की सुक्खू सरकार
ने अनावश्यक पंगा ले लिया है। जबकि राज्य चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक बाद्यता के
चलते चुनाव प्रक्रिया का जारी रखे हुए है। कहा यह भी जा रहा है कि संवैधानिक
बाद्यता के सामने डिजास्टर अधिनियम की बाद्यता मायने नहीं रखती है। फिलहाल
मामला प्रदेश हाई कोर्ट में भी चल रहा है और अदालत ही इस पर अंतिम फैसला लेगी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने प्रदेश के तमाम उपायुक्तों को बैलेट पेपर की खेप उठाकर
अपने पास रख लेने के लिए आदेश दिए थे लेकिन पहले तो उपायुक्तों ने सरकार के
दबाव में इस आदेश की अवहेलना कर दी। फिर बाद में उपायुक्तों को चुनाव आयोग की
बात माननी पड़ी। यह मामला इसलिए भी गरमाया हुआ है कि सरकार और निर्वाचन आयोग के
बीच गरमागरम पत्राचार भी हुआ है। जिसमें निर्वाचन आयोग की ओर से सरकार को भेजे
गए पत्र का जवाब आयोग को भेज दिया गया था।
सरकार का कहना है कि अभी डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत जारी ऑर्डर को वापस
लेना संभव नहीं है। मुख्य सचिव ने कहा है कि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भेजे
गए पत्र पर सरकार ने विचार किया है। सभी जिलों से फीडबैक लिया है।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से राज्य सरकार को कहा गया था कि प्रशासन मेलों का
आयोजन कर रहा है। स्कूल भी खुले हैं और जनजीवन भी सामान्य है। इसलिए राज्य
सरकार डिजास्टर एक्ट संबंधी ऑर्डर को वापस ले क्योंकि यह क्षेत्राधिकार से बाहर
जाकर जारी किया गया है। इससे पहले निर्वाचन आयोग यह बात भी स्पष्ट कर चुका है
कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 243 के तहत समय पर चुनाव करवाना उसकी संवैधानिक
बाद्यता है। फिलहाल मामला प्रदेश हाई कोर्ट के विचाराधीन है। कुछ साल पहले भी
नगर निगम शिमला के चुनाव में भी हाई कोर्ट ने आदेश दिया था कि नगर निगम शिमला
के चुनाव तय समय 10 दिन के भीतर करवाएं, यदि फिर ऐसा हो गया तो चुनाव कैसे हो
पाएगा। इसलिए चुनाव आयोग अपनी तैयारी में लगा हुआ है और सरकार अड़ी हुई है।
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