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शंकराचार्य बनाम योगी
विशेष संवाददाता
शिमला
: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री
योगी आदित्यनाथ में टकराव दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। हिन्दू कार्ड पर
ख्याति प्राप्त करने वाले ये दोनों संत इस कदर आक्रामक हो गए हैं कि योगी के
पक्षकार जहां अविमुक्तेश्वासनंद को शंकराचार्य मानने से इंकार कर रहे हैं वहीं
शंकराचार्य योगी को हिन्दूविरोध बताने में लगे हैं।
हालत इस कदर खराब हो चुके हैं कि शंकराचार्य पर बच्चों के योन शोषण का आरोप तक
शंकराचार्य विरोधी लोगों ने लगा दिया। फिलहाल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यौन
उत्पीड़न केस में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की गिरफ्तारी पर
रोक लगा दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने अग्रिम जमानत की याचिका पर
सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। इसी के साथ कोर्ट ने कहा कि फैसला
आने तक कोई गिरफ्तारी नहीं होगी। शंकराचार्य को जांच में सहयोग करने को कहा
गया। अदालत में शंकराचार्य का पक्ष वकील पीएन मिश्रा ने रखा। इससे शंकराचार्य
समर्थकों में योगी सरकार के खिलाफ भारी रोष है।
अब 11 मार्च के बाद शंकराचार्य ने लखनऊ योगी के खिलाफ प्रदर्शन कर एलान कर दिया
है कि जिसके राज में गौ मांस की सबसे ज्यादा बिक्री होती है, जिससे उनकी पार्टी
चंदा लेती है वह कैसे हिन्दू हो सकता है। उन्होंने योगी को चुनौती देते हुए कहा
है कि वह गाय को राज्य माता का दर्जा दें और यूपी में गौ हत्या पर प्रतिबंध
लगाएं अब उन्हें हिन्दूविरोधी ही कहा जाएगा। शंकराचार्य ने अपने तेवर तीखे कर
लिए हैं।
शंकराचार्य प्रतिदिन योगी सरकार के खिलाफ बोल रहे हैं जिससे योगी की छवि को
भारी नुक्सान हो रहा है। यही नहीं शंकराचार्य के बिगड़ जाने से भारतीय जनता
पार्टी की हिन्दूवादी छवि को भी भारी क्षति हो रही है। एक ओर जहां भाजपा
हिन्ूदत्व के नाम पर वोट एकत्र करने का प्रयास कर रहे हैं वहीं शंकराचार्य
भाजपा के खिलाफ हिन्दूवादी वोट को तोड़ रहे हैं। यहां यह बात भी कहने में कोई
गुरेज नहीं है कि योगी और मोदी की ताकत उनका सत्ता में विराजमान होना है। जबकि
शंकराचार्य जैसी पद्ववि पर विराजमान व्यक्तित्व की छवि उनका हिन्दूओं का असली
ध्वजवाहक होना है। देखना है शंकराचार्य यूपी चुनाव में भाजपा के कितने वोट पर
डेंट मारते हैं।
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