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पहली बार किसी शिक्षा मंत्री ने बच्‍चों के भविष्‍य पर ध्‍यान दिया

स्‍कूलों की स्थिति को ठीक किया जाएगा : रोहित

विशेष संवाददाता

     शिमला : हिमाचल प्रदेश में पहली बार किसी शिक्षा मंत्री ने बच्चों के भविष्य को देखते हुए अपनी शिक्षा प्रणाली और सरकार की मंशा का ऐलान किया है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही गई है कि हिमाचल प्रदेश में 25 प्रतिशत से कम परीक्षा परिणाम देने वाले स्कूलों में अब विद्यार्थियों की एक्सट्रा क्लास लगेगी। वार्षिक परीक्षाओं से पहले विद्यार्थियों को तैयार करने के लिए शिक्षकों से भी पूरी मेहनत करवाई जाएगी।
     इसके लिए शिक्षकों को सौंपे गए गैर शैक्षणिक कार्य भी कम किए जाएंगे। इन कार्यों को सरल करने की संभावनाओं को तलाशने के लिए उप निदेशकों से सुझाव देने को कहा गया है। वह सभी से सुझाव लेकर इस योजना में आने वाली परेशानियों से निपटने के लिए सरकार को सलाह भी देंगे। राज्य सचिवालय में विभागीय की एक समीक्षा बैठक में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि गैर शिक्षण कार्यों का दबाव कम करने के बाद शिक्षकों की जवाबदेही भी तय की जाएगी ताकि बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाने में कोई कमी न रह जाए और सरकार उसके लिए प्रयत्नशील रहेगी।
     शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि बीएड/डीएलएड विद्यार्थियों को उनके पैतृक स्थान में शैक्षणिक पद्धतियों का अभ्यास करने के लिए भेजा जाएगा। एक स्कूल में पांच से अधिक बीएड/डीएलएड विद्यार्थियों को नहीं भेजा जाएगा। बच्चों को शिक्षा के बेहतर अवसर प्रदान करने तथा स्कूल के संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कॉम्पलेक्स स्कूल प्रणाली को शुरू किया गया है।
     उन्होंने बताया कि विभाग ने मर्ज किए स्कूलों के विद्यार्थियों का समीपवर्ती स्कूलों में दाखिला किया जा रहा है। उप-निदेशकों को सत्र के दौरान नियमित रूप से स्कूलों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। शैक्षणिक संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने के लिए स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को भी सहयोगी बनाया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने आगे कहा कि बच्चों को प्रताड़ित करने वाले अध्यापकों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रदेश में बीते दिनों सामने आए इस प्रकार के मामलों पर कड़ा संज्ञान लिया गया है। इस प्रकार के मामलों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। अपने वक्तव्य में उन्होंने प्रधानाचार्यों को प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च कॉम्पलेक्स स्कूल प्रणाली के तहत आने वाले स्कूलों का दौरा करने के निर्देश दिए। अध्यापकों को इस प्रणाली की विस्तृत जानकारी प्रदान करने के लिए जिला स्तर पर सम्मेलन आयोजित करवाने को भी कहा।
     शिक्षा मंत्री ने बताया कि मानसून में 1,411 स्कूलों को 126.73 करोड़ की क्षति हुई है। आपदा प्रभावित स्कूल भवनों की मरम्मत और पुनर्निर्माण को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके लिए हिमुडा का पैसा जारी किया जाएगा। राज्य में 94.46 करोड़ रुपये की लागत से 42 स्थानों पर डे-बोर्डिंग स्कूलों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। सरकारी विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया है। सरकार द्वारा 45 स्कूलों को एफिलिएटिड किया गया है। इन स्कूलों में बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए विषय विशेषज्ञ अध्यापक नियुक्त किए जाएंगे। बैठक में सचिव शिक्षा राकेश कंवर, समग्र शिक्षा अभियान के राजेश शर्मा, निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली भी थे।

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