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सोलन के दवा उद्योग पर जंग का असर
चीन से आने वाला रॉ मेटीरियल महंगा
हुआ...
निजी संवाददाता
शिमला :
हिमाचल प्रदेश के सोलन जिला में स्थापित दवा उद्योगों का रॉ मटीरियल अधिकतर चीन
से आता है। खाड़ी में चल रहे युद्ध का दवा उद्योग पर सीधा असर भले ही न पड़ा हो,
लेकिन इस माहौल की आड़ में दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की
कीमतों में अचानक भारी बढ़ोतरी शुरू हो गई है। इसलिए यहां इसका बड़ा असर हुआ है।
इस कारण सैकड़ों दवा कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
अधिकांश फार्मा रॉ मटीरियल चीन से आयात होता है और वहां
के सप्लायर मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का हवाला देकर कीमतों में मनमाना इजाफा
कर रहे हैं। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ समय में कई
महत्त्वपूर्ण दवा रसायनों की कीमतों में अचानक तेज उछाल आया है। दर्द निवारक
दवाओं में इस्तेमाल होने वाला एक्लोफेनैक 935 रुपए प्रति किलोग्राम से बढ़कर 980
रुपए तक पहुंच गया है। आमतौर पर सबसे अधिक उपयोग में आने वाली दवा पैरासिटामोल
की कीमत 255 रुपए से बढ़कर 380 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इसी तरह
मांसपेशियों के दर्द की दवाओं में प्रयुक्त क्लोरोक्साजोन की कीमत 710 रुपए से
बढ़कर 880 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है।
दवा निर्माण में उपयोग होने वाले अन्य रसायनों की कीमतों
में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आइसोप्रोपाइल अल्कोहल (आईपीए) 124 रुपए से बढ़कर
180 रुपए प्रति किलोग्राम हो गया है, जबकि एमडीसी 45 रुपए से बढ़कर 60 रुपए
प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। सिरप और अन्य दवाओं में इस्तेमाल होने वाली
ग्लिसरीन की कीमत 155 रुपए से बढ़कर 250 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। इस
प्रकार अन्य दवाओं की कीमतों में भी भारी उछाल देखने को मिल रहा है। इस प्रकार
यदि जंग के हालात बने रहे तो दवाओं की कीमतें और बढ़ती चली जाएंगी। यदि समय रहते
इन परिस्थितियों पर भारत सरकार ने नियंत्रण नहीं किया तो दवाएं महंगी होती चली
जाएंगी।
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