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हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र

Hindi Weekly News Paper of India

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नितीश गए तो मोदी भी जाएंगे

     अगर नितीश कुमार एनडीए से गए तो प्रधानमंत्री को भी दिल्ली की सत्ता से जाना होगा। बिहार से मिल रहे समाचार साफ संकेत दे रहे हैं कि नितीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच चूहे बिल्ली का खेल चल रहा है। जिस प्रकार से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल लोकसभा में गिरा है उससे यह बात भी स्पष्ट हो गई है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास सरकार को बचाने के लिए पूर्ण बहुमत नहीं है। ऐसे में यदि नितीश कुमार, मोदी को छोड़कर चले जाते हैं तो देर सवेर मोदी को भी जाना होगा। देखना यह है कि कौन किसको कब दबोच लेता है। बिहार में अब कुछ ही महीनों बाद राज्य विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। नितीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में पिछले कई महीनों से ठनी हुई है। कहा जा सकता है कि दोनों में बोलचाल भी बंद है। मरता क्या न करता, नितीश कुमार की यह स्थिति बनी हुई है। शायद नितीश कुमार को यह एहसाहस हो चला है कि यदि अब वह भाजपा के साथ रहे तो भाजपा औरों की तरह उनकी पार्टी को भी निगल जाएगी। जैसे शिव सेना और एनसीपी को निगल गई। कहते हैं नितीश बाबू भी अब अपनी चुप्पी तोड़ रहे हैं और संकेत दे रहे हैं कि वह अगला चुनाव भाजपा के साथ नहीं लड़ेंगे। कहते हैं इसके लिए उन्होंने बिहार में लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी से भी अपने तार जोड़ लिए हैं। लालू के पुत्र तेजस्वी यादव भी नितीश चाचा के लिए बाहें फैलाए बैठे हैं।        जारी..

 

दिल्‍ली में भाजपा चाहती है कांग्रेस आगे बढ़े

     अब दिल्ली विधानसभा के चुनावों की तारीख घोषित हो चुकी है। ऐसे में भाजपा चाहती है कि दिल्ली में कांग्रेस आगे बढ़े ताकि वह आम आदमी पार्टी (आप) को टक्कर देने के करीब आ सके। वरना आप के सामने भाजपा कहीं भी खड़ी नजर नहीं आती है। दिल्ली में पांच फरवरी को मतदान होगा और आठ फरवरी को चुनाव परिणाम घोषित होंगे। पिछले एक दशक से कांग्रेस दिल्ली में शून्य पर खड़ी है और भाजपा दाहाई का आंकड़ा पार नहीं कर पा रही है। इस बार भाजपा चाहती है कि कांग्रेस कुछ आगे बढ़े तो भाजपा को जीत की कुछ उम्मीद बंधे। तभी तो पिछले दिनों भाजपा के नेता रमेश विघुड़ी ने कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर तो माफी मांग ली लेकिन दिल्ली की मुख्यमंत्री मार्लिन आतीशी सिंह से माफी नहीं मांगी। विधुड़ी आतीशी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे हैं और पिछले चुनावी आंकड़ों को देखा जाए तो वहां भाजपा और कांग्रेस कहीं आसपास भी नहीं है। ऐसे ही दिल्ली में करीब 30 सीटें ऐसी हैं जहां जहां पिछले चुनाव में कांग्रेस और भाजपा आप के करीब भी नहीं फटक सकी थी। 70 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 36 सीटें ही काफी हैं। अब भाजपा चाहती है कि कांग्रेस यदि कुछ अच्छा करे और आप की वोटों को काटे, तो ही भाजपा की जीत के रास्ते खुल सकते हैं।    जारी...

 

कांट्रेक्‍ट कर्मचारी रेगुलर नहीं माने जाएंगे

    हिमाचल सरकार ने कांट्रेक्ट पर लगे कर्मचारियों को एक बड़ा झटका दिया है। हिमाचल सरकार ने इस संदर्भ में एक नया अधिनियम बनाने की ओर अपने कद आगे बढ़ा लिए हैं। अब कांट्रेक्ट कर्मचारियों पर रेगुलर नियुक्ति वाले प्रावधान लागू नहीं होंगे, न ही वह इन्हें क्लेम कर पाएंगे। विधानसभा में लाए इस बिल के कानून बनने पर कांट्रेक्ट कर्मचरियों पर क्या प्रतिक्रिया होगी इसके बारे में बाद में ही पता चल पाएगा। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में इस बार पारित किया गया नया कानून कहता है कि संविधान के अनुच्छेद 309 के अधीन सिर्फ रेगुलर कर्मचारी आते हैं और नाॅन रेगुलर कर्मचारी पर यह सेवा शर्तें लागू नहीं होती हैं। हिमाचल सरकार ने कांट्रेक्ट या नाॅन रेगुलर कर्मचारियों को लेकर विधानसभा में एक नया कानून बना दिया है। हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा शर्तें विधायक-2024 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने सदन में प्रस्तुत किया। सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत बिल में कुल 12 धाराएं हैं। इसमें राज्य सरकार यह प्रावधान करने जा रही है कि वर्ष 2003 से अब तक नियुक्त किए गए संविदा यानी कांट्रेक्ट कर्मचारियों पर रेगुलर नियुक्ति वाले प्रावधान लागू नहीं होंगे।       जारी...

 

प्रदेशाध्‍यक्षों की राजनीति में कोई दम नहीं रह गया है

     अब राजनीति में पार्टी के अध्यक्षों की राजनीति में कोई दम नहीं रह गया है। जब राष्ट्र स्तर पर कांग्रेस और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों की राजनीति ही तोता-मैना जैसी हो गई है तो फिर प्रदेशाध्यक्षों की क्या राजनैतिक बिसात रह गई है, यह पूरा देश जानता है। हलांकि अब भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का चयन भी इसी माह हो जाएगा और कांग्रेस में जिला और प्रदेश अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया चल रही है। लोगों की आंख में धूल झोंकने के लिए पार्टी के चुनाव करने की प्रक्रिया को लोकतांत्रिक कहा जाता है। लेकिन यह चुनाव लोकतंत्र से कोसों दूर होते हैं। क्या कोई यह मान सकता है कि कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खड़गे में इतना दम है कि वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के फैसले के खिलाफ जाकर संगठन में कोई निर्णय ले सकें। लगभग सभी लोग यही कहेंगे कि नहीं ऐसा नहीं हो सकता है। बात भाजपा की हो जाए तो वहां तो मोदी-शाह के सामने किसी भी राष्ट्रीय अध्यक्ष की जुबान खुल जाए, ऐसी संभावना भी नहीं है। हलांकि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अब चाहता है कि भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो संगठन को सरकार से ऊपर रख सके।      जारी...

 

हिमाचल भाजपा के गले में फंस गई ओल्‍ड पेंशन स्‍कीम

     ओल्ड पेंशन स्कीम हिमाचल भाजपा के गले में फांस बन गई है। चारों लोकसभा सीटें जीतने के बाद अब केंद्र सरकार ने हिमाचल सरकार को एक पत्र लिखकर कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू करने को कहा है। इसके साथ ही केन्द्र सरकार ने प्रदेश सरकार को यह प्रलोभन भी दिया है कि अगर हिमाचल सरकार ऐसा करने के लिए मान जाती है तो केंद्र सरकार हिमाचल को 1600 करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक सहायता भी देगी। अब यह बात तो तय मानी जा रही है कि हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी इस पर कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर केन्द्र सरकार के आगे लाचार हैं। वह यह भी जानते हैं कि पिछली बार ओल्ड पेंशन स्कीम के मामले को लेकर ही प्रदेश में भाजपा की सरकार सत्ता से बाहर चली गई थी। कुछ दिन पहले केंद्र की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि वर्ष 2022-23 और 2023-24 में अनुबंध पर नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को यूपीएस में लाने से फायदा होगा। राज्य सरकार ने हिमाचल में कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम जारी कर रखी है। केंद्र ने हिमाचल के 9,000 करोड़ रुपये देने हैं। इस पर भाजपा की ओर से न तो सांसदों और न ही विधायकों ने कुछ कहा है। राज्य सरकार लगातार मामले को केंद्र के समक्ष उठा रही है।       जारी...

 

लड़की को छेड़ने वाले डाक्‍टर को 15 वर्ष बाद मिली सजा

     लड़की को छेड़ने के आरोप में एक डाक्टर को अदालत ने 15 वर्ष बाद एक सात की सजा सुनाई है। हलांकि डाक्टर को अपने कृत्य की सजा मिलने में 15 साल का समय लग गया। लेकिन पीड़िता ने भी अपने साथ हुए दुराचार को लेकर अंतिम समय तक इस लड़ाई को लड़ा। आखिर जिला सत्र न्यायालय इस मामले में सजा का ऐलान कर दिया। कांगड़ा के डा. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सा महाविद्यालय टांडा मेडिकल कालेज के एक विभागाध्यक्ष डाक्टर को जिला सत्र न्यायालय ने एक साल की सजा सुनाई है। दोषी को एक वर्ष के लिए साधारण कारावास की सजा सुनाई तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना न चुकाने पर दोषी को इसके अतिरिक्त दो महीने की अवधि के लिए साधारण कारावास की सजा काटनी होगी और उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 342 के तहत भी दो महीने के कारावास की अतिरिक्त सजा सुनाई। ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इस मामले में दोषी यदि उच्च अदालत में अपील पर जाता है तो इसके बारे में जानकारी बाद में मिलेगी। बताया जाता है कि घटना 15 वर्ष पहले 17 जनवरी, 2008 को घटी थी जब बीएसई एमएलटी प्रथम वर्ष की छात्रा शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि विभागाध्यक्ष डाक्टर ने गलत तरीके से उसे लैब से बाहर जाने से रोका। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि भोजन से लौटने के बाद आरोपी ने उसे लैब में बुलाया, जहां वह थायराइड का टेस्ट कर रहा था तथा उसकी सहेली से कहा कि उसकी ड्यूटी उसके साथ नहीं है।      जारी...

 

अम्‍बेडकर को लेकर संसद में मच रहा है घमासान

     भारत का संविधान लिखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डा. भीमराव अम्बेडकर को लेकर भारतीय संसद के भीतर और बाहर घमासान मचा हुआ है। इस बार इस घमासान का कारण बने हैं देश के गृहमंत्री अमित शाह जिन्होंने से लोकसभा में अम्बेडकर को लेकर हल्की फुल्की टिप्पणी कर दी। विपक्षी पार्टियों ने उनको माफी मांगने या फिर उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग कर दी है। अमित शाह की टिप्पणी के बाद पूरी भाजपा बुरी तरह से घिरती हुई नजर आ रही है। भाजपा को डर है कि अमित शाह की टिप्पणी के बाद भाजपा का दलित वोट बैंक खिसक न जाए। इसे इस तरह भी प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है कि अमित शाह ने यह टिप्पणी अनजाने में कर दी हो। बाद में उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस में भी माफी नहीं मांगी, बल्कि यह कहा कि विपक्ष उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहा है। अमित शाह कोई भी बात बिना मतलब के नहीं बोलते हैं। फिर उन्होंने अम्बेडकर को लेकर जो टिप्पणी संसद में की उसके क्या मायने निकाले जा रहे हैं। राजनैतिक गलियारों में यह चरचा अब तेजी से चल पड़ी है कि भाजपा में ‘मोदी के बाद कौन’, कहते हैं अमित शाह इस रेस में सबसे आगे रहना चाहते हैं और उनके सामने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे बड़ा रोड़ा हैं।        जारी

 

गांधी का भजन गायी, जान आफत में आई

     ‘गांधी जी का प्रिय भजन गायी और जान आफत में आई’। क्या कभी यह बात भारत वर्ष में सोची जा सकती थी, लेकिन अब सोची जा सकती है। महात्मा गांधी के नाम से बने बापू सभागार में ही बापू के विरुद्ध यह कांड भाजपा वालों ने निर्लज्जतापूर्व कर डाला। हुआ यूं कि बिहार के पटना में अटल जयंती समारोह में महात्मा गांधी का भजन ‘रघुपति राघव राज राम, पतित पावन...’ गाने पर हंगामा हो गया। भजन गायिका देवी को माफी मांगकर वहां से भागना पड़ गया। इस बात की चरचा सोशल मीडिया में अभी भी जारी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता अश्विनी चैबे ने 25 दिसंबर को पटना के ‘बापू सभागार’ में अटल रहूंगा कार्यक्रम आयोजित किया था। गायिका देवी को कार्यक्रम में परफार्म करने के लिए बुलाया गया था। कार्यक्रम में देवी ने भारत माता की जय और अटल बिहारी वाजपेयी अमर रहे के नारे भी लगाए। यहां तक तो ठीक थी लेकिन इसके बाद उन्होंने जब रघुपति राघव राजा राम गुनगुनाना शुरू किया। देवी ने जब भजन की लाइन ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम गाया तो सभागार में मौजूद करीब 60-70 युवा कार्यकर्ता नाराज हो गए। आयोजकों ने उन्हें घेर लिया और उन्हें मांफी मांग लेने के लिए कहा। इसके बाद सभी अपने स्थान पर खड़े होकर जय श्री राम का नारा लगाने लगे। तो देवी ने कहा कि भगवान हम सभी के हैं।         जारी

 

संपाकीय          जनता के पैसे का नाश कर रही सरकार

     अब यह बात भी स्पष्ट हो चली है कि सरकार जनता के पैसे का नाश कर रही है और इसके लिए भारत का सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ा दोषी है। इसका कारण यह है कि सुप्रीम कोर्ट भारत के संविधान का संरक्षक है और यह उसी की जिम्मेदारी है कि लोगों से कर के रूप में लिए गए पैसे को संविधान के तरीके से संविधान की सेवा करने के लिए खर्च किया जाए। पर सुप्रीम कोर्ट को भी क्या कहें उसके फैसले भी अब भारत के संविधान से बाहर जाकर होने लगे हैं। जिस पर देशवासियों समय समय पर आवाज भी उठाई है, पर हुआ कुछ भी नहीं है।
     यह बात भी सही है कि भारत के संविधान के आदेश को मानना कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका सभी के लिए जरूरी है। लेकिन अब तो पूरा तंत्र ही पथ भ्रष्ट हो चला है। प्रधानमंत्री राजकोष से अमेरिका की राष्ट्रपति की पत्नी को महंगे गिफ्ट भेंट कर रहे हैं। राज्य में ब्यूरोक्रेसी लोगों को पानी देने के नाम पर करोड़ों रुपए के जाली बिल पास कर रही है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जनता के कर के पैसे को ऐसे खर्च कर रहे हैं जैसे वह यह पैसा बाबा के घर से लाए हों। जबकि टैक्स पेयर का पैसा भारत के संविधान को मजबूत करने के लिए खर्च किया जाना चाहिए। भारत का संविधान जो नागरिक सुरक्षा की गारंटी देता है लोगों की जेब से निकला पैसा लोगों के कल्याण पर खर्च होना चाहिए।    .....जारी

 

रूस ने कैंसर की वैक्‍सीन बनाने का दावा सार्वजनिक किया

     रूसी स्वास्थ्य मंत्रालय के रेडियोलॉजी मेडिकल रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर आंद्रेई कप्रीन ने रेडियो पर कैंसर वैक्सीन बनाने का ऐलान किया है। रूसी न्यूज एजेंसी तास के मुताबिक, इस वैक्सीन को अगले साल से रूस के नागरिकों को फ्री में लगाया जाएगा। डायरेक्टर आंद्रेई ने कहा है कि रूस ने कैंसर के खिलाफ अपनी एमआरएनए वैक्सीन विकसित कर ली है। रूस की इस खोज को सदी की सबसे बड़ी खोज माना जा रहा है। वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल से पता चला है कि इससे ट्यूमर के विकास को रोकने में मदद मिलती है। इससे पहले इस साल की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बताया था कि रूस कैंसर की वैक्सीन बनाने के बेहद करीब है। क्या होती है एमआरएनए वैक्सीन एमआरएनए या मैसेंजर-आरएनए इंसानों के जेनेटिक कोड का एक छोटा सा हिस्सा है जो हमारी सेल्स (कोशिकाओं) में प्रोटीन बनाती है। इसे आसान भाषा में ऐसे भी समझ सकते हैं कि जब हमारे शरीर पर कोई वायरस या बैक्टीरिया हमला करता है तो एमआरएनए टेक्नोलॉजी हमारी सेल्स को उस वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए प्रोटीन बनाने का मैसेज भेजती है। इससे हमारे इम्यून सिस्टम को जो जरूरी प्रोटीन चाहिए, वो मिल जाता है और हमारे शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है।          जारी

 

आर्थिक सुधार के महानायक के जीवन का अंत

     देश में आर्थिक सुधारों के महानायक माने जाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह का पिछले दिनों निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। 2004 से 2014 तक देश के प्रधानमंत्री रहे 92 वर्षीय मनमोहन सिंह को तबीयत बिगड़ने के बाद एम्स के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया था। शाम को करीब आठ उनको एम्स लाया गया था, जहां उन्होंने इस दुनियां को अलविदा कह दिया। उनके परिवार में पत्नी गुरशरण कौर और तीन बेटियां हैं। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर वह एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री बने। उन्होंने वित्त मंत्री सहित विभिन्न सरकारी पदों पर कार्य किया और वर्षों तक हमारी आर्थिक नीति पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए व्यापक प्रयास किए। डा. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर, 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत में हुआ था। देश के विभाजन के बाद उनका परिवार भारत चला आया था। डा. मनमोहन सिंह ने आर्थिक उदारीकरण के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व बाजार से जोड़ दिया। पंजाब विश्वविद्यालय में शिक्षक के तौर पर उन्होंने अपना करियर शुरू किया। बाद में दिल्ली स्कूल आफ इकोनामिक्स में प्रोफेसर पद पर रहे।      जारी

 

खेल रत्‍न पुरस्‍कार 17 जनवरी को राष्‍ट्रपति भवन में दिए जाएंगे

     ओलंपिक में डबल मेडल जीतने वालों शूटर मनु भाकर, वर्ल्ड चेस चैंपियन डी. गुकेश, हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह और पैरा एथलीट प्लेयर प्रवीण कुमार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। इसी माह की 17 जनवरी को राष्ट्रपति भवन में यह पुरस्कार वितरित किए जाएंगे। इनके अलावा पांच कोच को द्रोणाचार्य अवार्ड मिलेगा, इनमें दो लाइफ टाइम अचीवमेंट के लिए है। कुल 34 प्लेयर्स को अर्जुन पुरस्कार दिया जाएगा इनमें दो लाइफ टाइम अचीवमेंट के लिए हैं। खेल मंत्रालय ने नेशनल स्पोर्टस अवॉर्ड 2024 का ऐलान कर दिया है। गौरतलब है कि भनु भाकर ने अगस्त-सितंबर में पेरिस ओलंपिक गेम्स में डबल मेडल जीते थे। वह 10 मीटर एयर पिस्टल इंडीविजुअल और मिक्सड डबल्स में तीसरे स्थान पर रहीं। उनके दो मेडल के दम पर भारत ने पेरिस ओलंपिक में कुल छह मेडल जीते थे। खेल रत्न पाने वाले दूसरे खिलाड़ी 18 साल के भारतीय ग्रैंडमास्टर डी. गुकेश ने सिंगापुर में 11 दिसंबर को वल्र्ड चेस चैंपियनशिप का खिताब जीता था। इतनी कम उम्र में खिताब जीतने वाले गुकेश दुनियां के पहले प्लेयर बने हैं। इससे पहले 1985 में रूस के गैरी कैस्परोव ने 22 साल की उम्र में यह कीर्तिमान हासिल किया था।          जारी

 

विभाग हासिल नहीं कर पाया 6500 करोड़ जीएसटी का लक्ष्‍य

     राज्य में जीएसटी कलेक्शन का वार्षिक लक्ष्य 6500 करोड़ रुपए तय किया गया था। यह बहुत बड़ा लक्ष्य आबकारी कराधान विभाग को दिया गया है जो व्यापारियों की हालत और पतली कर देगा। व्यापारी इसे लोगों से वसूल करेंगे जिनकी आर्थिक हालत बद से बदत्तर हो चुकी है। अब इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आबकारी कराधान विभाग को आगामी तीन माह में दो हजार करोड़ रुपए जुटाने होंगे। यह अंदाजा भी सहजता से लगाया जा सकता है कि विभाग इस लक्ष्य को कैसे प्राप्त करेगा। हिमाचल में जीएसटी कलेक्शन दिसंबर तक 4403.47 करोड़ रुपए तक ही पहुंच पाया है। जबकि पिछले वर्ष 2023 में दिसंबर तक यह कलेक्शन 3942.72 करोड़ रुपए तक ही पहुंच सका था। जाहिर है करीब दुगना लक्ष्य हासिल करने के लिए लोगों को अच्छे से निचोड़ा जाएगा। इस साल दिसंबर तक आबकारी कराधान विभाग ने 12 फीसदी ज्यादा राजस्व जुटाने में कामयाबी हासिल कर ली है। कहते हैं यह वसूली पर्याप्त नहीं है। दिसंबर महीने में जीएसटी कलेक्शन करीब 434 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है। बीते साल के मुकाबले इस बार आईजीएसटी भी 16 फीसदी बढ़ गया है। 2023 में 31 दिसंबर तक जीएसटी कलेक्शन 1929.29 करोड़ रुपए थी जो अब बढ़कर 2041.88 करोड़ रुपए हो चुकी है। दोनों साल के बीच जीएसटी कलेक्शन में 112.56 करोड़ रुपए का बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। आईजीएसटी में 31 दिसंबर, 2023 तक 2230.88 करोड़ रुपए राजस्व जुटाया गया था।          जारी

 

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