दिल्ली में भाजपा चाहती है
कांग्रेस आगे बढ़े
विशेष संवाददाता
शिमला : अब दिल्ली विधानसभा के चुनावों की तारीख घोषित हो चुकी है। ऐसे में
भाजपा चाहती है कि दिल्ली में कांग्रेस आगे बढ़े ताकि वह आम आदमी पार्टी (आप) को
टक्कर देने के करीब आ सके। वरना आप के सामने भाजपा कहीं भी खड़ी नजर नहीं आती
है।
दिल्ली में पांच फरवरी को मतदान होगा और आठ फरवरी को चुनाव परिणाम घोषित होंगे।
पिछले एक दशक से कांग्रेस दिल्ली में शून्य पर खड़ी है और भाजपा दाहाई का आंकड़ा
पार नहीं कर पा रही है। इस बार भाजपा चाहती है कि कांग्रेस कुछ आगे बढ़े तो
भाजपा को जीत की कुछ उम्मीद बंधे। तभी तो पिछले दिनों भाजपा के नेता रमेश
विघुड़ी ने कांग्रेस की नेता प्रियंका गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर तो माफी
मांग ली लेकिन दिल्ली की मुख्यमंत्री मार्लिन आतीशी सिंह से माफी नहीं मांगी।
विधुड़ी आतीशी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे हैं और पिछले चुनावी आंकड़ों को
देखा जाए तो वहां भाजपा और कांग्रेस कहीं आसपास भी नहीं है। ऐसे ही दिल्ली में
करीब 30 सीटें ऐसी हैं जहां जहां पिछले चुनाव में कांग्रेस और भाजपा आप के करीब
भी नहीं फटक सकी थी। 70 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 36 सीटें ही काफी
हैं। अब भाजपा चाहती है कि कांग्रेस यदि कुछ अच्छा करे और आप की वोटों को काटे,
तो ही भाजपा की जीत के रास्ते खुल सकते हैं।
इसीलिए भाजपा दिल्ली में कांग्रेस पर प्रहार करने से बच रही है और उसने अपना
सारा आक्रमण आप पर कर रखा है। हो सकता है कि रमेश विधुड़ी को भी समझाया गया हो
कि वह कांग्रेस पर आक्रमण न करें और प्रियंका के लिए कहे गए शब्दों की माफी
मांग लें। विधुड़ी ने एक मंच से कह दिया था कि यदि भाजपा चुनाव जीती तो वह
दिल्ली की सड़कें प्रियंका गांधी के गालों जैसी बना देंगे। हलांकि उन्होंने लालू
प्रसाद की नकल की थी जब लालू ने कहा था कि वह पटना की सड़कें हेमा मालिनी के
गालों जैसी बनवा देंगे। लालू की पुरानी बात पर तो कोई बवंडर नहीं मचा लेकिन
विधुड़ी की बात को महिला अपमान से जोड़ दिया गया। बाद में उन्होंने इसके लिए माफी
भी मांग ली।
दिल्ली की मुख्यमंत्री एम. आतिशी सिंह के खिलाफ विधुड़ी ने कह दिया कि उन्होंने
तो अपना बाप ही बदल दिया और वह अपने नाम के साथ अब सिंह लिखवाने लगी हैं। इस
बात का भी दिल्ली में बवाल मचा हुआ है। विघुड़ी और भाजपा को विपक्षी पाटियां
महिला विरोधी बताकर आलोचना कर रही हैं। भाजपा कई और हथकंड़े अपनाकर दिल्ली में
भी हरियाणा और महाराष्ट्र की तरह आम आदमी पार्टी को हराकर जीत दर्ज करना चाहती
है। केजरीवाल की पार्टी भाजपा को शुरुआती दौर से ही शह दे रही है, पर मात चुनाव
परिणाम ही बताएंगे। दिल्ली में जहां केजरीवाल के पास मजबूत नेता और कार्यकर्ता
हैं वहीं भाजपा के पास पूरा तंत्र है, देखना यह है कि जीत किसकी होती है।
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