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संपाकीय

जनता के पैसे का नाश कर रही सरकार

     अब यह बात भी स्पष्ट हो चली है कि सरकार जनता के पैसे का नाश कर रही है और इसके लिए भारत का सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ा दोषी है। इसका कारण यह है कि सुप्रीम कोर्ट भारत के संविधान का संरक्षक है और यह उसी की जिम्मेदारी है कि लोगों से कर के रूप में लिए गए पैसे को संविधान के तरीके से संविधान की सेवा करने के लिए खर्च किया जाए। पर सुप्रीम कोर्ट को भी क्या कहें उसके फैसले भी अब भारत के संविधान से बाहर जाकर होने लगे हैं। जिस पर देशवासियों समय समय पर आवाज भी उठाई है, पर हुआ कुछ भी नहीं है।
     यह बात भी सही है कि भारत के संविधान के आदेश को मानना कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका सभी के लिए जरूरी है। लेकिन अब तो पूरा तंत्र ही पथ भ्रष्ट हो चला है। प्रधानमंत्री राजकोष से अमेरिका की राष्ट्रपति की पत्नी को महंगे गिफ्ट भेंट कर रहे हैं। राज्य में ब्यूरोक्रेसी लोगों को पानी देने के नाम पर करोड़ों रुपए के जाली बिल पास कर रही है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जनता के कर के पैसे को ऐसे खर्च कर रहे हैं जैसे वह यह पैसा बाबा के घर से लाए हों। जबकि टैक्स पेयर का पैसा भारत के संविधान को मजबूत करने के लिए खर्च किया जाना चाहिए। भारत का संविधान जो नागरिक सुरक्षा की गारंटी देता है लोगों की जेब से निकला पैसा लोगों के कल्याण पर खर्च होना चाहिए।
     पूरे देश का आलम यह है कि केन्द्र सरकार से लेकर राज्य सरकार और नगर निगम लोगों का खून चूसकर टैक्स वसूली कर रही है। वह इस खून पसीने की कमाई को कैसे खर्च कर रही है यह इस बात से पता चल जाता है कि प्रधानमंत्री अपने लिए आठ हजार करोड़ का जहाज खरीद लेते हैं, अपने प्रचार प्रसार में अरबों रुपए खर्च कर देते हैं। नगर निगम में काम होते नहीं हैं और करोड़ों रुपए पता नहीं कहां हजम हो जाते हैं। करोड़ों रुपए की देन दारियां सरकारों के सिर पर चढ़ी रहती हैं। यहां हम पीएम केयर फंड और इलैक्टोरल बांड जैसी खुली लूट की बात नहीं कर रहे हैं। हम तो सिर्फ उस पैसे की बात कर रहे हैं जो पूरे हिसाब किताब के साथ सरकारी खजाने में जमा किया जाता है।
     फिलहाल इस प्रकार की कहानियां सुनाने का कोई लाभ नहीं है। देश में लूटपाट का शासन चल रहा है। भारत के संविधान ने जिन लोगों को नागरिक हितों की जिम्म्ेदारी सौंपी है वही भारत के संविधान की शपथ लेकर उसे लूट रहे हैं। हलांकि भारत के राष्ट्रपति को भारत के संविधान के अनुच्छेद 60 में और राज्यपालों को अनुच्छेद 159 में संविधान को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी दी गई है, वह कैसे इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं यह पूरा विश्व देख रहा है। संविधान निर्माता इस बात को जानते थे कि यही संविधान एक दिन लुटेरों के हाथ में चला जाएगा। इसलिए उन्होंने हर स्तर पर चैक एंड बैलेंस की स्थिति को बनाकर रखा हुआ था। लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम था कि देश में जिस किसी को भी कोई शक्ति दी जाएगी वह उसे अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने लग जाएगा।

 
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