Home Page
 

नितीश गए तो मोदी भी जाएंगे

देखना है कौन किसको कब दबोच लेता है...

विशेष संवाददाता

     शिमला : अगर नितीश कुमार एनडीए से गए तो प्रधानमंत्री को भी दिल्ली की सत्ता से जाना होगा। बिहार से मिल रहे समाचार साफ संकेत दे रहे हैं कि नितीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बीच चूहे बिल्ली का खेल चल रहा है।
     जिस प्रकार से ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ बिल लोकसभा में गिरा है उससे यह बात भी स्पष्ट हो गई है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास सरकार को बचाने के लिए पूर्ण बहुमत नहीं है। ऐसे में यदि नितीश कुमार, मोदी को छोड़कर चले जाते हैं तो देर सवेर मोदी को भी जाना होगा। देखना यह है कि कौन किसको कब दबोच लेता है। बिहार में अब कुछ ही महीनों बाद राज्य विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। नितीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी में पिछले कई महीनों से ठनी हुई है। कहा जा सकता है कि दोनों में बोलचाल भी बंद है। मरता क्या न करता, नितीश कुमार की यह स्थिति बनी हुई है। शायद नितीश कुमार को यह एहसाहस हो चला है कि यदि अब वह भाजपा के साथ रहे तो भाजपा औरों की तरह उनकी पार्टी को भी निगल जाएगी। जैसे शिव सेना और एनसीपी को निगल गई।
     कहते हैं नितीश बाबू भी अब अपनी चुप्पी तोड़ रहे हैं और संकेत दे रहे हैं कि वह अगला चुनाव भाजपा के साथ नहीं लड़ेंगे। कहते हैं इसके लिए उन्होंने बिहार में लालू प्रसाद की पार्टी आरजेडी से भी अपने तार जोड़ लिए हैं। लालू के पुत्र तेजस्वी यादव भी नितीश चाचा के लिए बाहें फैलाए बैठे हैं। बिहार में तो नितीश कुमार चुटकी बजाते ही सभी समस्याओं का समाधान निकाल लेंगे। लेकिन उनकी दुम लोकसभा में जो 12 सांसदों के साथ फंसी हुई है वह उन्हें पीछे खींच रही है।
     कहते हैं जैसे ही नितीश एनडीए से नाता तोड़ेंगे तो टीम मोदी नितीश की पार्टी जेडीयू के 16 सांसदों जिन में चार राज्यसभा के सांसद भी हैं, को अपने खेमे में मिलाना चाहेगी। हलांकि कुछ सांसद ऐसे भी हैं जो किसी भी सूरत में भाजपा के साथ जाने वाले नहीं हैं। कुछ ऐसी ही हालत बिहार के चिराग पासवान के साथ भी है। उनके पास भी लोकजन शक्ति पार्टी के छह सांसद हैं। इसके बाद बिहार के एक और नेता जतिन राम मांझी भी हैं। जिनके पास हम पार्टी का एक सांसद है। कुल मिलाकर 19 बिहार के सांसद केन्द्र में टीम मोदी को धूल चटा सकते हैं, क्योंकि अब सभी को अपने राज्य बिहार के चुनाव देखने हैं।
     सब कहते हैं कि टीम मोदी जेडीयू, लोकजन शक्ति पार्टी और हम पार्टी के सांसदों को तोड़कर अपने खाने में ले लेंगे। लेकिन यह कोई साफ शब्दों में नहीं कह रहा है कि अगर बिहार में सहयोगी दलों को भाजपा नहीं तोड़ पाई तो मोदी का सत्ता से बेदखल होना तय है। यह बात भी तय है कि एनडीए से जुड़े बिहार के नेताओं को ज्यादा चिंता बिहार की है और बिहार चुनाव के आगे वह दिल्ली नहीं देख रहे हैं। उनके लिए मोदी सत्ता में रहें या न रहें, यह चिंता नहीं है।
     कुछ ही दिनों में सभी दृश्यों पर से पर्दा हटने वाला है। नितीश कुमार की सक्रीयता बताती है कि वह एनडीए से जब जाएंगे तो अपना ज्यादा से ज्यादा समेट कर जाएंगे। कुल मिलाकर एनडीए से बिहार के घटक दलों का बाहर निकलना टीम मोदी के लिए घातक हो सकता है। सभी जानते हैं कि नितीश के बिना बिहार में न एनडीए की दाल गलेगी और न ही इंडिया गठबंधन की। यदि नितीश इंडिया के साथ चले गए तो भाजपा के पास बिहार में कुछ भी नहीं बचेगा, सिवाय इसके जो वह तोड़फोड़, चोरी-चकारी से ले जाए।
     बिहार में नितीश कुमार और नरेन्द्र मोदी में यही चूहे बिल्ली का खेल चल रहा है। टीम मोदी चाहती है कि वह नितीश को दबोचे रखने में कामयाब हो जाएं और नितीश कुमार हैं कि वह एनडीए से पीछा छुड़वाना चाहते हैं। जहां तक आंध्र प्रदेश के चंद्र बाबू नायडू का सवाल है तो उनकी सौदेबाजी की ताकत बढ़ जाएगी। यदि नायडू की बातें टीम मोदी ने नहीं मानी और इंडिया गठबंधन ने मान ली तो वह भी मोदी को बाॅय बाॅय कहने में देरी नहीं लगाएंगे। वैसे भी मोदी सरकार जिस प्रकार के ‘बंटेगे तो कटेंगे’ जैसे कार्यक्रम चला रही है ऐसे में चंद्र बाबू नायडू का भी एनडीए में बने रहना काफी मुश्किल होगा। देखना यह है कि क्या एनडीए तोड़फोड़ में आगे रहता है या इंडिया गठबंधन।

 
Home Page