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अम्‍बेडकर को लेकर संसद में मच रहा है घमासान

अम्‍बेडकर का तीर योगी पर तो नहीं चलाया है शाह ने...

विशेष संवाददाता

     भारत का संविधान लिखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले डा. भीमराव अम्बेडकर को लेकर भारतीय संसद के भीतर और बाहर घमासान मचा हुआ है। इस बार इस घमासान का कारण बने हैं देश के गृहमंत्री अमित शाह जिन्होंने से लोकसभा में अम्बेडकर को लेकर हल्की फुल्की टिप्पणी कर दी। विपक्षी पार्टियों ने उनको माफी मांगने या फिर उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग कर दी है।
     अमित शाह की टिप्पणी के बाद पूरी भाजपा बुरी तरह से घिरती हुई नजर आ रही है। भाजपा को डर है कि अमित शाह की टिप्पणी के बाद भाजपा का दलित वोट बैंक खिसक न जाए। इसे इस तरह भी प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है कि अमित शाह ने यह टिप्पणी अनजाने में कर दी हो। बाद में उन्होंने प्रेस कान्फ्रेंस में भी माफी नहीं मांगी, बल्कि यह कहा कि विपक्ष उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहा है। अमित शाह कोई भी बात बिना मतलब के नहीं बोलते हैं। फिर उन्होंने अम्बेडकर को लेकर जो टिप्पणी संसद में की उसके क्या मायने निकाले जा रहे हैं।
     राजनैतिक गलियारों में यह चरचा अब तेजी से चल पड़ी है कि भाजपा में ‘मोदी के बाद कौन’, कहते हैं अमित शाह इस रेस में सबसे आगे रहना चाहते हैं और उनके सामने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सबसे बड़ा रोड़ा हैं। हाल ही में हुए उप चुनावों में योगी ने उम्मीद से ज्यादा सीटें जीती हैं और वह प्रधानमंत्री की रेस में आ रहे हैं। शायद अम्बेडकर वाला तीर अमित शाह ने योगी की ओर ही चलाया हो।
     अब कुछ ही समय में उत्तर प्रदेश विधानसभा का शंखनाद होने वाला है। यदि इन चुनावों में भी योगी ने शानदार प्रदर्शन कर दिया तो वह अमित शाह को बहुत पीछे धकेल देंगे। इसीलिए शायद अमित शाह दलित वोटरों को जानबूझकर नाराज करके योगी का सिंहासन पलटने की चाल चल रहे हैं। डा. अम्बेडकर को दलितों में एक मसीहा के रूप में माना जाता है। अमित शाह की टिप्पणी से दलित वोट भाजपा के खाते से निकल सकता है। यदि यह वोट भाजपा के खाते से खिसक गया तो उत्तर प्रदेश में भाजपा की हार लगभग तय है। ऐसे में योगी कहीं के नहीं रहेंगे और प्रधानमंत्री पद के लिए शाह का रास्ता साफ हो जाएगा।
     कहा जा सकता है कि अमित शाह ने जो डा. अम्बेडकर पर टिप्पणी की है वह महज एक राजनैतिक साजिश है और वोटों को इधर उधर करने के प्रयास के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है। समूचे विपक्ष ने इस बात को लेकर हाय तौबा मचा रखी है। अमित शाह के बयान का राजनैतिक असर या तो उत्तर प्रदेश के चुनावों पर पड़ेगा या फिर दिल्ली के चुनावों पर। क्योंकि दिल्ली में आम आदमी पार्टी पांच फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए तैयार है। डा. अम्बेडकर दिल्ली की सरकार के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। यह अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली और पंजाब सरकार ने डा. अम्बेडकर की तस्वीर तमाम मंत्रियों के कार्यालयों में लगा रखी हैं।
     अब आम आदमी पार्टी इस मुद्दे को दिल्ली में भुना रही है। दिल्ली में भाजपा के पास कुछ खास नहीं है। वहां मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच ही है यदि शाह के अम्बेडकर पर दिए बयान के कारण आम आदमी पार्टी सत्ता में आ जाती है तो इससे भी भाजपा को कोई बड़ा नुक्सान नहीं होगा।
अमित शाह की डा. अंबेडकर पर की गई टिप्पणी से पूरे भारत वर्ष में बवाल खड़ा हो गया है। विपक्षी पार्टियां इसे डा. अम्बेडकर के अपमान से जोड़कर प्रस्तुत कर रही हैं। यहां यह बात भी तय मानी जा रही है कि सरकार के कानों पर इस मामले में जूं तक रेंगने वाली नहीं है। उत्तर प्रदेश और दिल्ली के चुनाव के बाद यह बात ठंडे बस्ते में चली जाएंगी। यह बात अमित शाह भी जानते हैं और विपक्षी पार्टियां भी। इसका मक्सद कुछ और ही लगता है।

 
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