हिमाचल भाजपा
के गले में फंस गई ओल्ड पेंशन स्कीम
केन्द्र ने
प्रलोभनयुक्त पत्र सरकार को भेजा...
विशेष संवाददाता

शिमला : ओल्ड पेंशन स्कीम हिमाचल भाजपा के गले में फांस बन गई है। चारों लोकसभा
सीटें जीतने के बाद अब केंद्र सरकार ने हिमाचल सरकार को एक पत्र लिखकर
कर्मचारियों को यूनिफाइड पेंशन स्कीम (यूपीएस) लागू करने को कहा है। इसके साथ
ही केन्द्र सरकार ने प्रदेश सरकार को यह प्रलोभन भी दिया है कि अगर हिमाचल
सरकार ऐसा करने के लिए मान जाती है तो केंद्र सरकार हिमाचल को 1600 करोड़ रुपये
की विशेष आर्थिक सहायता भी देगी।
अब यह बात तो तय मानी जा रही है कि हिमाचल में भारतीय जनता पार्टी इस पर कुछ भी
कहने की स्थिति में नहीं है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव बिंदल और नेता
प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर केन्द्र सरकार के आगे लाचार हैं। वह यह भी जानते हैं कि
पिछली बार ओल्ड पेंशन स्कीम के मामले को लेकर ही प्रदेश में भाजपा की सरकार
सत्ता से बाहर चली गई थी। कुछ दिन पहले केंद्र की ओर से जारी पत्र में कहा गया
है कि वर्ष 2022-23 और 2023-24 में अनुबंध पर नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को
यूपीएस में लाने से फायदा होगा। राज्य सरकार ने हिमाचल में कर्मचारियों के लिए
ओल्ड पेंशन स्कीम जारी कर रखी है।
केंद्र ने हिमाचल के 9,000 करोड़ रुपये देने हैं। इस पर भाजपा की ओर से न तो
सांसदों और न ही विधायकों ने कुछ कहा है। राज्य सरकार लगातार मामले को केंद्र
के समक्ष उठा रही है। अभी यह बजट नहीं मिला है। हिमाचल सरकार का मानना है कि
हिमाचल में पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने के लिए केंद्र ने राज्य के लिए आर्थिक
प्रतिबंध लगाए हैं। भाजपा की केन्द्रीय सरकार हलांकि अब प्रलोभन देने पर उतर आई
है जबकि उसने लोन लेने की लिमिट भी 6600 करोड़ तय कर दी है। यही नहीं, बाहरी
सहायता प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से आर्थिक सहायता के नए प्रस्तावों के लिए
भी सीमा तय की गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक हिमाचल केवल 2,944 करोड़
रुपए तक के प्रस्तावों की मंजूरी के लिए पात्र होगा।
राज्य सरकार ने चुनावी गांरटी को पूरा करते हुए 1.36 लाख सरकारी कर्मचारियों के
लिए पुरानी पेंशन बहाल की है। अब देखना यह है कि अब राज्य सरकार नए अनुबंध
कर्मचारियों को यूपीएस के तहत लाने का निर्णय करती है या फिर उन्हें पुरानी
पेंशन ही दी जाएगी। केन्द्र की भाजपा सरकार चाहती है कि हिमाचल में कर्मचारियों
को ओल्ड पेंशन स्कीम के तहत पेंशन न दी जाए।
इस पत्र के बाद हिमाचल में ओल्ड पेंशन स्कीम का जिन एक बार फिर भाजपा ने बाहर
निकाल दिया है। कांग्रेस ने जिस प्रकार से पिछले चुनावों में ओल्ड पेंशन स्कीम
को चुनावी मुद्दा बनकर जयराम सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया था
वहीं यदि एक बार फिर हिमाचल में ओल्ड पेंशन स्कीम का मुद्दा गरम हो जाता है तो
भाजपा फिर से बड़ा नुक्सान उठाना पड़ सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि
हिमाचल के लाखों कर्मचारी और उनके आश्रित ओल्ड पेंशन स्कीम के पक्षधर हैं और
प्रदेश भाजपा इसका विरोध केन्द्र की तरह नहीं कर पा रही है।
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