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लोगों को पेयजल देने के पैसों
से आलीशान रेस्ट हाउस बना दिए
पूर्व जयराम सरकार का देश झेल
रहे हैं लोग...
विशेष संवाददाता
शिमला
: हिमाचलियों की प्यास बुझाने के लिए
केंद्र से जल जीवन मिशन के तहत आए पैसे से रेस्ट हाउसों का निर्माण कर दिया गया
है। यह आरोप पूर्व भाजपा की जयराम ठाकुर की सरकार पर लगाया जा रहा है। नगर निगम
सोलन का पानी चोरी का आरोप भी जयराम सरकार पर लगाया गया है। अब इससे भी बड़ा
आरोप जयराम सरकार पर लगाया जा रहा है। आरोप यह है कि प्रदेश में रेस्ट हाउस
बनाने के लिए कुल 120 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं।
कहते हैं अब हिमाचल में बनाए गए इन रेस्ट हाउस के कारण
केंद्र की मोदी सरकार ने पैसे का भुगतान रोक दिया है। साथ ही यह फटकार भी लगाई
है कि जल जीवन मिशन के तहत रेस्ट हाउस बनाने का कोई प्रावधान ही नहीं है। ऐसे
में रेस्ट हाउस बनाने पर खर्च किए गए 120 करोड़ का भुगतान मिशन को जारी हो रहे
केंद्रीय फंड से नहीं किया जा सकता है। बताया यह भी जा रहा है कि राज्य की
वर्तमान सरकार ने इस मसले को केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सीआर पाटिल के समक्ष भी
उठाया था।
अब राज्य सरकार को यह निर्देश दिए गए हैं कि रेस्ट हाउस
बनाने के लिए लगाए गए पैसे का भुगतान अपने वितीय संसाधनों से करें। लोग भी कहने
लगे हैं कि प्रदेश की पूर्व भाजपा सरकार के कुकर्म का दंश हिमाचल के लोग झेल
रहे हैं। केंद्र सरकार ने इस मामले के सामने आने के बाद जल जीवन मिशन के तहत अब
तक जारी हुए 4667 करोड़ की राशि में वित्तीय अनियमितताओं सहित सब स्टैंडर्ड
सामग्री के प्रयोग की शिकायतों को आधार मानते हुए जांच बिठा दी है। केंद्र ने
प्रदेश में फंड के उपयोग के लिए नई शर्तें लगा दी हैं। किसी भी मद के लिए आने
वाले फंड का अपना अलग अकाउंट बनाने के लिए दबाव डाला जा रहा है ताकि धन का
उपयोग वहीं हो, जहां के लिए मंजूरी मिली है। इस बात का असर यह हुआ है कि हिमाचल
को जलजीवन मिशन के लिए पैसा नहीं मिल रहा है। इस मिशन के लिए सरकार को 1200
करोड़ मिलने की उम्मीद थी।
जल जीवन मिशन पूरे देश में साल 2019 में शुरू किया गया है
और यह अभी साल 2028 तक हिमाचल में प्रभावी रहेगा। इस मिशन के तहत 17.27 लाख
घरों को नलों के माध्यम से स्वच्छ पानी पिलाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया
गया है। प्रदेश सरकार भी लोगों को मुफ्त पेयजल देने की बातें कर रही है। इसके
तहत अब तक 15.5 लाख घरों में नल लगा दिए जा चुके हैं लेकिन रेस्ट हाउसों को
बनाने पर खर्च किए गए 120 करोड़ के पेंच ने 1200 करोड़ की अदायगी भी फंसा दी है।
जलशक्ति विभाग फिलहाल उन रेस्ट हाउस का आंकड़ा और स्थान भी सामने नहीं रख पाया
है जिन पर पूर्व जयराम सरकार के कार्यकाल में 120 करोड़ खर्च किए गए हैं।
फिलहाल जलशक्ति विभाग द्वारा भुगतान न करने के कारण
ठेकेदारों ने काम करना बंद कर दिया है। मिशन के तहत 350 करोड़ की देनदारियां
लंबे समय से नहीं हो पाई हैं। विभाग ने भी ठेकेदारों को भुगतान करने से हाथ खड़े
कर दिए हैं। इस पर उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री पुष्टि करते हैं कि केंद्र
ने इस पैसे का भुगतान करने से मना कर दिया है।
केंद्र ने मिशन के कामों पर जांच बिठाई है। अधिकारी
हिमाचल में भी जांच कर रहे हैं। पूर्व भाजपा सरकार ने सोलन नगर के लिए बनी में
अच्छी भली गिरी पेयजल योजना को खुर्दबुर्द करके पानी बिल्डरों और सोलन नगर से
बाहर दे दिया। इसकी कोई जांच भी नहीं की गई। अब देखना है पेयजल के पैसों से बने
रेस्ट हाउस की जांच निष्पक्ष रूप से होती भी है या नहीं...।
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