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हिमाचल समाचार

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अब सभी दवाओं की जानकारी क्‍यूआर कोड से ली जा सकेगी

नकली दवाओं पर अंकुश लगाने का प्रयास...

निजी संवाददाता

     शिमला : अब गंभीर बीमारियों के उपचार में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की असलियत मोबाइल से जांची जा सकेगी। इसके तहत सभी टीकों, जीवाणुरोधी (एंटीमाइक्रोबियल) दवाओं, कैंसर रोधी दवाओं तथा मादक औषधि एवं मनरूप्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम 1985 के तहत सूचीबद्ध दवाओं पर बारकोड अथवा क्यूआर कोड आधारित ट्रैक एंड ट्रेस प्रणाली लागू की जाएगी।
     भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने औषधि नियम 1945 में संशोधन कर अनुसूची (शेड्यूल) एच-2 का दायरा बढ़ा दिया है। सरकार का मानना है कि इससे दवा निर्माण से लेकर मरीज तक पहुंचने वाली पूरी आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी आसान होगी और नकली दवाओं के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगेगा। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार संबंधित दवाओं के निर्माताओं को उत्पाद की प्राथमिक पैकेजिंग पर बारकोड या क्यूआर कोड अंकित करना अनिवार्य होगा।
     यह क्यूआर कोड केवल पहचान का माध्यम नहीं होगा, बल्कि दवा की पूरी डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराएगा। क्यूआर कोड स्कैन करने पर दवा का विशिष्ट उत्पाद पहचान कोड (यूनिक प्रोडक्ट आइडेंटिफिकेशन), जेनेरिक एवं ब्रांड नाम, निर्माता कंपनी का नाम व पता, बैच नंबर, निर्माण तिथि, एक्सपायरी तिथि, विनिर्माण लाइसेंस नंबर तथा जहां लागू हो वहां सहायक पदार्थों की जानकारी उपलब्ध होगी।
     नई व्यवस्था को लागू करने के लिए केंद्र सरकार ने दवा कंपनियों और अन्य हितधारकों को पर्याप्त समय दिया है। यह क्यूआर कोड आधारित व्यवस्था पहली जुलाई, 2027 से लागू होगी। इससे घटिया दवाओं पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

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क्‍या हमीरपुर में किसी और देश का कानून चलता है

बिजली बोर्ड ने पलट दिया न्‍यायालय का फैसला

निजी संवाददाता

     शिमला : हिमाचल बिजली बोर्ड के एक फैसले से लगता है कि हमीरपुर में किसी ओर देश का कानून चलता है। बिजली बोर्ड प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि हमीरपुर के सिविल न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-3 द्वारा सी.एम.ए. संख्या 497/2026 में पारित अंतरिम आदेश केवल लंबलू, जिला हमीरपुर के उपभोक्ता जैमल सिंह के व्यक्तिगत मामले तक सीमित है।
     पिछले दिनों बोर्ड ने पूरी बेशर्मी के साथ कहा है कि इस आदेश का प्रदेश के अन्य किसी भी बिजली उपभोक्ता या राज्यभर में चल रहे स्मार्ट मीटर स्थापना अभियान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बोर्ड के अनुसार प्रदेश में स्मार्ट मीटरों की स्थापना विद्युत अधिनियम-2003 केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के संशोधित मीटर विनियम-2026 हिमाचल प्रदेश विद्युत आपूर्ति संहिता संशोधन विनियम-2021 और भारत सरकार की रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सैक्टर स्कीम (आर.डी.एस.एस.) के दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है। इसलिए स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य पूरे प्रदेश में पहले की तरह जारी रहेगा। बोर्ड ने यह भी बताया कि उक्त अंतरिम आदेश के खिलाफ सक्षम न्यायालय में अपील दायर की जा रही है।
     यह फैसला बोर्ड में बैठे अधिकारियों के मानसिक स्तर को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। जब बोर्ड के अधिकारियों को इतनी जानकारी है कि वह किसी भी कोर्ट के फैसले को किस तरह से पलट सकते हैं तो फिर उन्हें किसी भी कोर्ट में जाने की जरूरत ही नहीं है। अब प्रदेश के न्यायालय ही इस प्रकार सुस्त रहेंगे तो एक नागरिक क्या कर सकता है।

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एलपीजी का टारगेट तय

निजी संवाददाता

     शिमला : केंद्र सरकार ने पहली बार देश की सरकारी और प्राइवेट रिफाइनरीज व अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए एलपीजी उत्पादन के अधिकतम टारगेट तय कर दिए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय द्वारा जारी आदेश में 21 कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन एलपीजी उत्पादन की क्षमता और टारगेट निर्धारित किया है।
     यह लक्ष्य वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश में हुए कुल घरेलू एलपीजी उत्पादन (35,900 टन प्रतिदिन) से दोगुने से भी अधिक है और यह देश की कुल रोजाना खपत का लगभग 70 फीसदी कवर करता है। जब भी बाजार में गैस की कमी या सप्लाई बाधित होगी, यह नया नियम तुरंत लागू हो जाएगा। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में कुल 33.2 मिलियन टन एलपीजी की खपत हुई थी (लगभग 91,000 टन प्रतिदिन)। इसमें से केवल 13.1 मिलियन टन (35,900 टन प्रतिदिन) का उत्पादन ही देश में हुआ था, जबकि 21.3 मिलियन टन (58,400 टन प्रतिदिन) एलपीजी विदेश से मंगवानी पड़ी थी।

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भाजपा के पूर्व विधायक होशियार सिंह की होशियारी पकड़ी

और साक्ष्‍य जुटाने में लगी है विजिलेंस की टीम...

निजी संवाददाता

     शिमला : कहते हैं कि भाजपा के विधायक पूर्व विधायक होशियार सिंह ने विधायक निधि से आर्थिक सहायता स्वीकृत की और पैसा निकाल भी लिया गया। होशियार सिंह की इस होशियारी की चरचा प्रदेश भर में हो रही है। बताते हैं कि संबंधित लोगों ने कथित तौर पर ऐसी किसी आर्थिक सहायता के लिए आवेदन नहीं किया था। अब यह आरोप भी सामने आया है कि लाभार्थियों के खातों में राशि आने के बाद उसे निकालकर पूर्व विधायक के कहने पर उन्हें सौंप दिया गया।
     मामले में विजिलेंस अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से धारा 17-ए के तहत मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है। मंजूरी मिलने के बाद एफआईआर में भ्रष्टाचार की धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। दो कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। दोनों ने बताया कि उनके खातों में विधायक निधि की राशि आई थी जिसे बाद में वापस ले लिया गया। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि उन्होंने किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता या अनुदान के लिए कोई आवेदन नहीं किया था। विधानसभा अध्यक्ष इसकी स्वीकृति कितने दिनों में देते हैं इस पर सबकी नजर है।
     पिछले दिनों से यह गंभीर मामला हिमाचल प्रदेश राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में पूर्व विधायक होशियार सिंह के खिलाफ चल रहा है। विजिलेंस ने प्राथमिक जांच के बाद विजिलेंस थाना धर्मशाला में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 420 के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान सरकारी अभिलेख, बैंक रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेज और शिकायतकर्ताओं सहित अन्य लोगों के बयान दर्ज किए गए। विजिलेंस का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के विपरीत किया गया। आपराधिक न्यासभंग और धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है।
     हिमाचल प्रदेश में विधायक निधि के कथित दुरुपयोग का अपनी तरह का यह अजीब मामला सामने आया है। विजिलेंस ने पूर्व विधायक के खिलाफ जांच तेज कर रखी है। आरोप है कि जुलाई 2023 से जनवरी 2024 के बीच पूर्व विधायक ने अपनी फैक्ट्री के 16 कर्मचारियों के बैंक खातों में विधायक निधि से 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता जारी करवाई। इसके बाद कर्मचारियों से अलग-अलग माध्यमों से करीब 8 लाख रुपये वापस ले लिए गए।

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महिला पटवारी गिफ्तार

निजी संवाददाता

     शिमला :राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की बद्दी टीम ने बरोटीवाला पटवार सर्किल की पटवारी को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। पटवारी पर जमीन की सड़क से दूरी दर्शाने वाला राजस्व प्रमाणपत्र जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप है।
     जानकारी के अनुसार क्षेत्र के एक व्यक्ति को अपनी जमीन का सर्किल रेट निर्धारित करवाने के लिए राजस्व विभाग से प्रमाणपत्र की आवश्यकता थी। इसके लिए वह पटवार सर्किल की आरोपी महिला पटवारी से मिला। कहते हैं कि इस कार्य के लिए महिला पटवारी ने रिश्वत की मांग शिकायतकर्ता के सामने रखी। बाद में विजिलेंस ने योजना बनाकर महिला पटवारी को शिकंजे में ले लिया मामला अब अदालत में चल रहा है, देखना है अदालत किस फैसले तक पहुंचती है।

 
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