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हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र

Hindi Weekly News Paper of India

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एक नजर : सोलन के प्रतिष्ठित लोगों की ओर से दीपावली की शुभकामनाएं

दीपावली 2025 की हार्दिक शुभकामनाएं

दीपावली

अंधकार से टकराने का पर्व

     आज पूरी दुनियां एक घने अंधकार के दौर से गुजर रही है। भारत वर्ष भी अपनी दुख पीड़ा और संकट काल के अंधेरे में डूबा हुआ है। खसकर देश का युवा जिसे अपना भविष्य अंधकारमय प्रतीत होने लगा है। ऐसे में पूरी दुनियां सहित भारत वर्ष को भी अंधकार से प्रकाश में लाने की नितांत आवश्यकता है। ऐसे में हम दीपावली के दिनों से गुजर रहे हैं। प्रत्येक व्यक्ति ईश्वर से यही दुआ कर रहा है कि हमें इस अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। भले ही दीपावली हिन्दुओं का सबसे बड़ा पर्व है लेकिन संचार माध्यमों के जरिए यह पर्व पूरे विश्व में लोकप्रिय होता जा रहा है। अब दीपावली के बारे में सिर्फ हिन्दुओं का पौराणिक ज्ञान ही इस महान पर्व से नहीं जोड़ा जाता है। ईसाई, मुसलमान और दुनियां भर के सभी धर्म अपने आपको इसके आसपास महसूस करते हैं। हिन्दुओं में जहां ‘ज्योति’ को ज्ञान का सबसे बड़ा स्त्रोत माना जाता है वहीं ईसाई भी ज्योति को ज्ञान का स्वरूप मानते हैं। वह मोमबती जलाकर अपने ईश्वर को याद करते हैं और वह भी अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने की प्रार्थना ईश्वर से करते हैं। इस्लाम में भी ज्योति का वैसा ही महत्व है जैसा हिन्दुओं में है। दुआ करने के तरीके भले ही अलग अलग हों लेकिन सब दुनियां भर में सुख शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।      जारी...

 

ग्रास साप्‍ताहिक का स्‍थापना दिवस

ग्रास के लिए कठिन रहा यह वर्ष

संजय हिंदवान

     इस दीपावली पर ग्रास साप्ताहिक ने अपनी यात्रा का एक और वर्ष पूरा कर लिया है। इस दीपावली के बाद ग्रास साप्ताहिक 33वें वर्ष में प्रवेश कर जाएगा। पिछला वर्ष ग्रासा साप्ताहिक के लिए कुछ खास अच्छा नहीं रहा। इसका सबसे बड़ा कारण बरसात का मौसम रहा। प्रदेश में मई माह में शुरू हुई बरसात इस अक्तूबर माह के शुरू तक जारी रही करीब पांच-छह माह की बरसात से जहां प्रदेश में भारी नुक्सान हुआ वहीं ग्रास साप्ताहिक के प्रकाशन में भी बड़ी समस्याएं पैदा हुई। बरसात के मौसम में ग्रास का प्रकाशन इसलिए भी रोक दिया जाता है कि डाक द्वारा जाने वाला अखबार सड़कें टूट जाने और मार्ग अवरुद्ध होने के कारण पाठकों तक समय पर नहीं पहुंच पाता है और जब अखबार पाठकों तक पहुंच जाता है उसी के बाद हम अगले अंक के प्रकाशन की तैयारी करते हैं। हमारे पाठकों, मित्रों और शुभचिंतकों का यह आशीर्वाद हम पर सदा बना रहा है कि आर्थिक तंगी के कारण हमें अखबार छापने में कोई परेशानी नहीं आई है। भविष्य में भी यह आशीर्वाद बना रहेगा यह कामना हम सभी पाठकों, शुभचिंतकों और मित्रों से करते हैं। इस वर्ष की दीपावली सभी पाठकों, मित्रों और शुभचिंतकों के लिए खुशहाली लेकर आए और सभी के लिए प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त हों यही कामना ईश्वर से हम करते हैं।       .जारी..

 

बिहार चुनाव पर पूरे भारतवासियों की निगाहें

     इस समय राजनीति की सबसे बड़ी खबर बिहार से है। वहां चुनावी प्रचार अपने पूरे यौवन पर है। लोगों की निगाहें वहां राजनैतिक दलों से ज्यादा चुनाव आयोग पर लगी हुई है। लोग देख रहे हैं कि चुनाव आयोग इस बार के चुनाव में किस राजनैतिक दल के पक्ष में अपने नतीजे सुनाता है। एसआईआर को लेकर भी चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट में भी विवादों में रहा और इस सब बातों का चुनाव परिणाम 14 नवंबर को बाहर आएगा। हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और अब बिहार में चुनाव आयोग पर वोट चोरी करके भाजपा को जिताने के आरोप लगाए गए हैं। राहुल गांधी ने तो बाकायदा प्रेस कांफ्रेस करके चुनाव आयोग की गड़बड़ियों का खुलासा किया है। बिहार में मतदाता सूची को लेकर कई सवाल सुप्रीम कोर्ट से लेकर बाहर विपक्षी नेताओं ने दागे हैं लेकिन चुनाव आयोग ने सवाला को जवाब नहीं दिया है। इसलिए कहा जा सकता है कि बिहार में जो चुनाव हो रहा है वह भी संश्य के दायरे में आ गया है। अब चुनाव कैसे भी हो पर हो रहा है। अब इस चुनाव में किसने क्या किया है इस पर खुलासे चुनाव परिणाम के बाद ही निकलने शुरू होंगे। तभी कहा जा सकेगा कि चुनाव आयोग भाजपा को जिताने में किस हद तक कामयाब हो सका है। विपक्षी पार्टियों को इस बात पर तो शुबा है कि चुनाव आयोग ने पूरी इमानदारी से बिहार के चुनाव नहीं करवाए हैं। पर वह अपनी पूरी ताकत इसलिए लगाए हुए है कि शायद चुनाव आयोग भाजपा की इतनी मदद न कर पाए कि वह चुनाव परिणाम को ही पलट सके।        जारी...

 

हिमाचल प्रदेश में लीडरशिप की लड़ाई तेज

     हिमाचल प्रदेश में दोनों राजनैतिक पार्टियों में नई लीडरशिप की लड़ाई दिन प्रतिदिन तेज होती जा रही है। जहां कांग्रेस अपने नए अध्यक्ष को लेकर उल्झी हुई है वहीं भाजपा में भी आगामी सरकार को लेकर नए गठजोड़ बनने शुरू हो गए हैं। यह बात भी तय है कि अभी तक दोनों पार्टियों का प्रभावी नेतृत्व जनता के समक्ष नहीं आया है। दोनों पार्टियां गुटबाजी के दौर से गुजर रही हैं। कांग्रेस में प्रदेशाध्यक्ष को लेकर चल रही लड़ाई कम से कम यहां तक पहुंचती हुई नजर आ रही है कि जब मुख्यमंत्री पद लोआर हिमाचल को दे दिया गया है तो अध्यक्ष पर अपर हिमाचल के खाते में जाना चाहिए। कहते हैं अब फैसला इस बात का होना है कि अध्यक्ष पद पर पूर्व अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर को बिठाया जाएगा या फिर रोहित ठाकुर को मंत्री पद से हटाकर उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाएगा। पिछले दिनों इस बात ने जोर पकड़ लिया कि कांग्रेस का प्रदेश में संगठन ही नहीं है और बिना संगठन के पार्टी कैसे आगामी विधानसभा चुनावों में जाएगी। जब तक प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं चुनाव जाता है तक तक आगे बढ़ना आसान नहीं है। सत्ता में विराजमान गुट को चिंता इस बात की सता रही है कि यदि विरोधी गुट का नेता पार्टी का अध्यक्ष बन गया तो उनकी सत्ता कैसे लौटकर आ सकेगी। भाजपा में तो गुटबाजी इतने चरम पर पहुंच गई है कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को खुले मंच से अपनी पार्टी के नेताओं के खिलाफ बोलना पड़ रहा है।    जारी...

 

इस बार तो दुकानदार ग्राहकों देखने को तरस गए

     नोटबंदी के बाद से ही देश भर के व्यापार में ग्रहण लगा हुआ है लेकिन इस बार तो आलम यह बना हुआ था कि ग्राहक देखने को दुकानदार तरस गए। दीपावली शॉपिंग जैसी बातें तो अब बीते हुए युग की बातें लगने लगी हैं। व्यापारियों को अब यह समझ नहीं आ रहा है कि वह अपने कारोबार को जिंदा रखने के लिए क्या युक्ति लगाएं। जब ग्राहक की ही कमर टूटी हुई है तो वह त्योहारों पर खुलकर खर्चा कैसे कर सकता है। बाजार में जो जो थोड़े बहुत ग्राहक भी थे वह ऑन लाइन शापिंग ने घेर रखे हैं। बाजार में मंदी का सबसे बुरा असर यह देखने को मिल रहा है कि लोग चुनिंदा दुकानों से ही खरीददारी कर रहे हैं। वह भी दुकानदारों के सही शॉपिंग करने के नजरिए के कारण। पहले भीड़ भीड़ वाली शॉपिंग में छोटे दुकानदार भी अपने गुजारे लायक दुकानदारी कर लेते थे पर इस बार तो गुजारे लायक दुकानदारी भी देखने को नहीं मिल रही है। यह हाल सिर्फ छोटे व्यापारियों का ही नहीं है बड़े व्यापारियों ने तो खूब विज्ञापन देकर ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित करके अपने व्यापार को बचाने का प्रयास किया। कुछ को उनके इस प्रयास में अच्छी सफलता भी मिली। लेकिन इससे ग्राहक उन्हीं दुकानों तक सिमट कर रह गया जिन्होंने इस दीपावली के त्योहार में विज्ञापनों का खूब शोर किया। अधिकतर दुकानदारों का यह भी मानना है कि यदि वह ग्राहकों को विज्ञापन के माध्यम से अपनी ओर आकर्षित न करें तो उनको तो ग्राहकों के लाले पड़ जाएंगे।      जारी...

 

दीपावली पर महालक्ष्‍मी को प्रसन्‍न किया जाता है

     पौराणिक मान्यताओं के अनुसार दीपावली पर्व पर धन की देवी महालक्ष्मी को प्रसन्न करने की लिए उनका पूजन किया जाता है ताकि उनकी कृपा हमेशा हम पर बनी रहे और घर में खूब धन की वर्षा हो ताकि सुख समृद्धि घर में व्याप्त हो। वैसे तो माता लक्ष्मी अस्थायी तौर पर हमारे साथ रहती हैं। यह भी कहा जाता है कि मां लक्ष्मी हमेशा हम पर प्रसन्नता एवं संपदा की बौछार करती रहती है। शास्त्रों के अनुसार यदि इस दिन सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त में सही विधि-विधान के साथ मां लक्ष्मी का पूजन कर लिया जाए तो धन की देवी की कृपा परिवार पर बरस सकती है। यह भी कहा जाता है कि जिन पर लक्ष्मी कृपा बरसती है उनके घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती। लोग दीपावली के दिन मां लक्ष्मी की अराधना करके वर्ष भर उसके पुण्य की प्राप्ति के लिए दुआ करते हैं। दीपावली पर पर्व पर मिठाइयों और पुरस्कारों का आदान प्रदान से जहां इस पर्व के आनंद को बढ़ाता है वहीं आपसी प्रेम और भाई चारा भी इस पर्व के कारण बढ़ता है। लोग एक दूसरे को गले लगाकर इस पर्व की शुभकामनाएं देते हैं। एक दूसरे की समृद्धि और संपन्नता के लिए दुआएं करते हैं। हिन्दुआ में यह पर्व सबसे अच्छा और आकर्षक पर्व माना जाता है और लोग इसे बढ़ी पवित्रता के साथ मनाते हैं।.      जारी...

 

कार्तिक माह के 15वें दिन मनाई जाती है दीपावली

     दीपावली कार्तिक माह के 15वें दिन (अक्तूबर या नवम्बर माह) में मनाई जाती है। सर्व प्रचलित कथा रामायण के अनुसार यह त्योहार भगवान राम के 14 वर्ष के बनवास के बाद अपने राज्य अध्योध्या में वापस लौटने की स्मृति में मनाया जाता है। भारत के सभी त्योहारों में दीपावली सबसे सुन्दर त्योहार है और इसे प्रकाशोत्सव भी कहा जाता है। दीपावली अथवा दीवाली, प्रकाश उत्सव है, जो सत्य की जीत व आघ्यात्मिक अज्ञान को दूर करने का प्रतीक है। शब्द ‘दीपावली’ का शाब्दिक अर्थ है दीपों (मिट्टी के दीप) की पंक्तियां। यह हिंदूओं का एक बहुत लोकप्रिय वार्षिक त्योहार है। इस दिन गलियां मिट्टी के दीपकों की पंक्तियों से प्रकाशित की जाती हैं तथा घरों को रंगों व मोमबत्तियों से सजाया जाता है। यह त्योहार नए वस्त्रों, दर्शनीय आतिशबाजी और परिवार व मित्रों के साथ विभिन्न प्रकार की मिठाइयों के साथ मनाया जाता है। चूंकि यह प्रकाश व आतिशबाजी, खुशी व आनन्दोत्सव दैव शक्तियों की बुराई पर विजय की सूचक है। भगवती लक्ष्मी (विष्णु की पत्नी), जो कि धन और समृद्धि की प्रतीक हैं, उन्हीं की इस दिन पूजा की जाती है। पश्चिमी बंगाल में यह त्योहार काली पूजा के रूप में मनाया जाता है। काली जो शिवजी की पत्नी हैं, की पूजा दीवाली के अवसर पर की जाती है। दीपावली पर्व भारत में अलग अलग परंपराओं के साथ भी मनाया जाता है। दक्षिण में, दीपावली त्यौहार अक्सर नरकासुर, जो असम का एक शक्तिशाली राजा था, और जिसने हजारों निवासियों को कैद कर लिया था, पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है।        जारी...

 

आप भी अपने समूह की ओर से किसी भी शुभअवसर पर अपनी शुभकामनाएं ग्रास साप्‍ताहिक को प्रेषित कर सकते है

 

एक नजर :  सोलन के प्रतिष्ठित लोगों की ओर से दीपावली की शुभकामनाएं

 
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