केजरीवाल की हार
से कांग्रेस को लाभ
आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल की हार से कांग्रेस पार्टी
को बड़ा फायदा होने जा रहा है। भले ही कांग्रेस दिल्ली चुनाव में शून्य रही
लेकिन यह बात धीरे धीरे स्थापित होती चली जा रही है कि जब भी भाजपा का सूरज
अस्त होगा तो कांग्रेस को ही इसका लाभ मिलेगा। इसकी सबसे बड़ा वजह भी यही बताई जा रही है कि अकेले राहुल गांधी ही भाजपा से
सीधी टक्कर ले रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इंडिया गठबंधन में सबसे बड़ा
रोड़ा केजरीवाल ही थे। कई बार उन्होंने गठबंधन के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ा और
गठबंधन की मजबूत पार्टी कांग्रेस को नुक्सान पहुंचाया। कांग्रेस को खत्म करके
ही वह दिल्ली और पंजाब में सरकार बनाने में सफल हुए थे। यदि केजरीवाल गुजरात
में कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर चुनाव लड़ते तो बहुत पहले ही प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी को गुजरात जीतने का लाभ नहीं मिलता। हरियाणा में हुए राज्य चुनावों में भी केजरीवाल ने अपनी चलाई और इसका लाभ भाजपा
को मिल गया। आज परिणाम यह निकला कि केजरीवाल छोटी सी दिल्ली सरकार का हिस्सा भी
नहीं रह गए हैं। दिल्ली चुनाव परिणामों के बाद इंडिया गठबंधन को एक राहत जरूर
मिली है कि जो छत्रप सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को अलग थलग करने के प्रयास को
अपनी उपलब्धि मान रहे थे उन पर नकेल कसनी शुरू हो गई है। अब यह बात तेजी से फैल
गई है कि यदि केजरीवाल कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ते तो यह चुनाव परिणाम
केजरीवाल को राजनीति में बचा भी सकते थे।
जारी..
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निकाले जाएंगे गैर कानूनी तरीके
से रहने वाले
अब भारत सरकार को भी होश आया है कि देश में गैर कानूनी तरीके से घुसे
लोगों को बाहर निकालने के लिए एक कानून बनाया जाए। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप
के राष्ट्रपति बनते ही वहां रह रहे भारतीयों पर पहाड़ टूट पड़ा है। अमेरिका में
करीब 40 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें से बहुत से लोग गैर कानूनी ढ़ंग से अमेरिका
में बसे हैं। उनकी धड़ पकड़ की जा रही है और उन्हें गैर कानूनी तरीके अमेरिका में
रहने के कारण उनके देश वापस भेजा जा रहा है। इसके जवाब में अब भारत में बिना वीजा-पासपोर्ट एंट्री पर केंद्र सरकार सख्त
कानून लाने जा रही है। अगर कोई विदेशी नागरिक वैध पासपोर्ट या वीजा के बिना
भारत में प्रवेश करता है तो उसे पांच साल तक जेल और पांच लाख रुपए तक का
जुर्माना हो सकता है। अगर कोई विदेशी फर्जी डाक्यूमेंट के साथ भारत में प्रवेश
करता है तो उसे यहां से निकाला जा सकता है। इसके अलावा उसे जेल हो सकती है।
वहीं, एक लाख रुपए से 10 लाख रुपए तक जुर्माना लगाया जा सकता है। यह नियम इमिग्रेशन और फॉरेनर एक्ट, 2025 के तहत है, जिसे सरकार संसद के बजट
सत्र में पेश करेगी। इसका मकसद इमिग्रेशन और फॉरेनर से संबंधित सब्जेक्ट पर
बने चार अलग नियम को एक करना है। नए नियम लागू होने के बाद फॉरेनर्स एक्ट
1946, पासपोर्ट एक्ट 1920, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट 1939 और इमिग्रेशन
(करियर लायबिलिटी एक्ट) 2000 में बदलाव कर एक कानून बनाया जाएगा।
जारी...
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चुनाव आयोग पर आरोप
दिल्ली में भी चुनाव आयोग पर धांधली से भाजपा को चुनाव जिताने का कथित
आरोप लगा दिया गया है। आरोप यह है कि बहुत से विधानसभा क्षेत्रों में विभिन्न
पतों पर जाली वोट बनाने के लिए आवेदन दिए गए थे। इस पर चुनाव आयोग क्या
संतोषजनक सफाई देता है इसकी प्रतीक्षा की जा रही है। आम आदमी पार्टी (आप) के नेता संजय सिंह ने एक लंबी चैड़ी सूचि जारी की है जिसमें
यह बताने की कोशिश की गई है कि जाली वोटों के सहारे भाजपा ने दिल्ली में वह जीत
हासिल कर ली है जो उसे नहीं मिल सकती थी। उन्होंने कहा है कि भाजपा सांसदों,
सरकारी क्वार्टरों और दुकानों तक में जाली वोट बनाने के लिए आवेदन दिए गए थे।
इस प्रकार की आशंका चुनावों से पहले ‘आप’ के शीर्ष नेताओं ने चुनाव आयोग से कर
दी थी लेकिन इस पर कोई संज्ञान चुनाव आयोग ने नहीं लिया और इसका परिणाम पूरे
देश के सामने है। अब देखना यह है कि ‘आप’ के नेता चुनावों को लेकर जो आरोप चुनाव आयोग पर लगा रहे
हैं वह इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में जाएंगे या नहीं। पिछले लोकसभा चुनावों के
बाद दिल्ली में वोट बनवाने की बाढ़ सी आ गई थी। सांसदों को
अलॉट रिहायश पर भी
20-30 वोट बनाने का अर्थ यह है कि वहां 20-30 लोग कम से कम छह महीने से रह रहे
हैं।
जारी...
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ग्रामीण
क्षेत्रों में पानी का पैसा वसूली अच्छा कदम नहीं है
हिमाचल सरकार एक बार फिर से ग्रामीण हलकों में पीने के पानी का पैसा
वसूल करके अच्छा नहीं कर रही है। जबकि शहरी इलाकों में तो पीने के पानी की लूट
यथावत जारी है। सरकार ने पिछले दिनों फैसला लिया था जिसे जलशक्ति विभाग ने अब
लागू कर दिया है। जलशक्ति विभाग गांव में रहने वाले लोगों से तीन महीने का बिल
एक साथ वसूल करेगा।
इस सूचना के बाद वह वाक्या याद आ गया जब भारत आजाद हुआ था और ब्रिटिश
पार्लियमेंट में इस पर बहस चल रही थी। तब वहां के विपक्ष के नेता बिस्टन चर्चिल
ने तत्तकालीन प्रधानमंत्री जॉन क्लेमेंट एटली की आलोचना करते हुए कहा था कि
तुमने किन जाहिलों को आजाद कर दिया यह तो हवा और पानी पर भी टैक्स लगा देंगे।
आजाद भारत की पंडित जवाहर लाल नेहरू सरकार ने भारत के संविधान में इस बात को
शामिल किया और इसे अनुच्छेद 21 के साथ जोड़ते हुए ‘पब्लिक ट्रस्ट डॉक्ट्रिन’ में
हवा, पानी और पार्क को इंसानी जीवन के लिए जरूरी बताया। भारत सरकार ने तब यह
कहा था कि इन तीनों का व्यवसायिकरण नहीं होगा।
पंडित नेहरू तो मर गए और देश धीरे धीरे विस्टन चर्चिल वाले जाहिलों के हाथ में
चला गया।
जारी...
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कसौली में 200
करोड़ की संपत्ति सरकार को चली जाएगी
किसी हिमाचली के नाम पर पैसा खर्च करके फ्लैट बनाकर बेचने वालों को इस
बार तगड़ा झटका लगा है। कसौली में फ्लैट बनाकर बेचने वाले एक बिल्डर को करीब 200
करोड़ रुपए की चपत लगने की पूरी संभावना बन गई है। मंडलायुक्त शिमला की अदालत ने
कसौली के पास करीब 45 बीघा बेनामी भूमि पर बने 200 करोड़ के अवैध 90 फ्लैट राज्य
सरकार के अधीन लेने का फैसला सुना दिया है।
हिमाचल में अक्सर ऐसा सुनने को मिलता है कि बाहरी राज्य के कुछ लोग किसी
हिमाचली कृषक को बहला फुसलाकर उसके नाम पर जमीन खरीद लेते हैं और उस संपत्ति को
विकसित करके उसे महंगे दामों पर बेचकर निकल लेते हैं। ऐसा करके वह हिमाचल
प्रदेश में भूमि सुधार करनून 1971 की धारा 118 का उलंग्धन कर देते हैं। लेकिन
इस मामले में मंडलायुक्त की अदालत ने उपायुक्त सोलन के आदेशों पर मोहर लगाते
हुए यह फैसला सुनाया और उस संपत्ति को प्रदेश सरकार के अधीन लिया जाए।
वर्ष 2014 में यह मामला सामने आया था। एक शिकायतकर्ता संतोष कुमार ने पुलिस को
शिकायत दी थी कि कसौली के तीन मौजा क्षेत्रों में कुछ लोगों ने फ्लैट बनाने के
नाम पर भूमि खरीदी है। इसमें कुछ लोगों ने चोरी छुपे करोड़ों रुपए लगाए हैं। यह
मामला बेनामी संपत्ति के दायरे में आता है। उस समय के एसपी ने जांच का जिम्मा
एसआईटी को सौंपा। मामले में चार मुख्य आरोपी बनाए गए। जांच में पाया गया कि
बाहरी राज्यों के लोगों ने एक स्थानीय व्यक्ति के बैंक खाते में करोड़ों रुपए की
ट्रांजेक्शन की है। उसके बाद विभिन्न स्थानों पर करीब 45 बीघा भूमि खरीदी और उस
पर बहुमंजिला फ्लैट्स का निर्माण किया।
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बंद स्कूल में
सरकारी कार्यालय खोलना गैर कानूनी हो सकता है
हिमाचल में स्कूलों के मर्ज और बंद करने को लेकर हजारों स्कूलों के भवन
खाली हो गए हैं। अब सरकार इन खाली भवनों में अन्य सरकारी कार्यालय खोलने की
तैयारी में है। सरकार का यह कदम कई स्थानों पर गैर कानूनी भी हो सकता है। इसे
लेकर प्रदेश सरकार ने कोई भी योजना नहीं बनाई है। इस वजह से सरकार को कानूनी
पचड़ों में पड़ने की युक्ति समय रहते सूझ लेनी चाहिए। कानूनी जानकारों से इसके
लिए समय रहते सलाह ले लेनी जरूरी है।
सरकार ने स्कूल मर्जर पालिसी के तहत जो स्कूल बंद किए हैं और उसके भवन खाली हो
गए हैं उनकी शुरू से राजस्व रिपार्ट मंगवा लेनी चाहिए। जिस स्कूल की भूमि किसी
व्यक्ति ने स्कूली बच्चों की शिक्षा के लिए दान की है वहां सरकार कोई अन्य
कार्यालय नहीं खोल सकती है। क्योंकि सरकार ने जब किसी से बच्चों की शिक्षा या
स्कूल खोलने के लिए भूमि ली थी तो उसे आश्वासन दिया था कि वह इलाके के बच्चों
की शिक्षा के लिए भूमि दान में ले रही है। इस न्यास को किसी और कार्य के लिए
तोड़ा नहीं जा सकता है। यदि सरकार ऐसा करती है तो वह पूरी तरह से गैर कानूनी
होगा और उसे भूमि को उसके आॅरिजनल मालिकों को लौटानी पड़ सकती है।
अब जिला सोलन को ही ले लें तो यहां बंद और मर्ज हुए स्कूलों में अन्य सरकारी
कार्यालय खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत जिला सोलन के बंद हुए
प्राथमिक स्कूल सरली में पुलिस पोस्ट खोल दी गई है। इसके अलावा अन्य स्कूल
भवनों में पंचायत, युवक मंडल या फिर अन्य सरकारी कार्यालय भी खोल रहे
हैं।
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मीडिया वालों ने
दो कोड़ी का नहीं छोड़ा भारत को
आज के मीडिया ने भारत वर्ष को विश्व मान चित्र में दो कोड़ी का नहीं छोड़ा।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस प्रकार भारत के प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी को पहले अपने शपथ ग्रहण समारोह में नहीं बुलाया और अब अमेरिका
दौरे से प्रधानमंत्री से अपने पक्ष में समझौते करवाकर वापस भेज दिया। यह भारत
के लिए चिंता की बात है। इसके लिए मीडिया सबसे बड़ा जिम्मेदार है कि मीडिया ही
देशवासियों को यह सूचना दे रहा था कि मोदी का डंका अमेरिका में भी बज रहा है और
ट्रंप मोदी के परम मित्र हैं। अब जो व्यवहार भारत के साथ अमेरिका ने किया है
उससे भारत की इज्जत दुनियां भी में दो कोड़ी की नहीं रह गई है। अमेरिका भारतीयों
को वहां से निकाल रहा है।
जहां तक भारत के अमेरिका के साथ संबंध रहे हैं वह बनते बिगड़ते रहे हैं। यह कोई
पहला मौका नहीं है कि अमेरिका भारत से नारज है। बांग्ला देश को लेकर पाकिस्तान
के युद्ध के समय भी भारत अमेरिका के संबंध खराब हो गए थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री
इंदिरा गांधी जब अमेरिका गई थी तो वहां उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को यहां तक
कह दिया था ‘यू डोनट नो एनिथिंग मिस्टर निक्सन’, वह अमेरिका से अपने कार्यक्रम
को छोड़कर भारत भी लौट आई थीं। लेकिन इसके बाद भी अमेरिका ने कोई ऐसा कदम भारत
की शान के खिलाफ नहीं उठाया। बल्कि दोनों देशों ने अपने संबंध अच्छे करने की ओर
हाथ बढ़ाया और संबंध फिर से अच्छे हो गए
थे।
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कांग्रेस ने एक
साथ 60 पदाधिकारियों के पद छीन लिए
कांग्रेस ने ऐसे पदाधिकारियों
को पार्टी से बाहर करने की पहल कर दी है, जो पार्टी के भीतर पदों को घेरे रहते
हैं और पार्टी के कार्यक्रमों में भाग नहीं लेते हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस
ने ऐसे 60 कार्यकर्ता से पद छीन लिए हैं जिन्होंने पार्टी के कार्यक्रम में कोई
रुचि नहीं दिखाई। इनमें से अधिकतर तो ऐसे थे जो पार्टी के पदों पर कब्जा जमाए
बैठे थे। कांग्रेस के इस एक्शन से पार्टी में हडकंप मच गया है। कहते हैं ऐसे
कार्यवाही अब हर जगह होगी ताकि कांग्रेस के लोग पार्टी को गंभरता से लेना शुरू
करें।
पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के राम मंदिर
निर्माण को देश की आजादी का दिवस बता दिया था। इसके विरोध में कांग्रेस ने एक
आंदोलन का अह्वान किया था। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने आरएसएस के नागपुर स्थित
मुख्यालय तक मार्च निकाला गया था। इस आयोजन में कांग्रेस के ही तमाम कार्यकर्ता
शामिल नहीं हुए, जिसका विरोध कांग्रेस पार्टी के भीतर ही शुरू हो गया। तब जाकर
कांग्रेस ने ऐसे लोगों पर ऐक्शन लिया है और कुल 60 कार्यकर्ताओं को पदों से हटा
दिया।
कांग्रेस ने जिन नेताओं के खिलाफ ऐक्शन लिया है, उनमें कुछ वाइस प्रेजिडेंट, 8
महासचिव, 20 सचिव और कुछ जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं। नेशनल यूथ कांग्रेस की ओर से
19 जनवरी को भागवत के खिलाफ इस मार्च का आयोजन किया गया था। जिसका नेतृत्व
राष्ट्रीय चीफ उदय भानु कर रहे थे। इस मार्च में महाराष्ट्र के यूथ कांग्रेस
प्रेजिडेंट कुणाल रावत भी शामिल थे।
जारी
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संपादकीय टकराव का कुम्भ मेला प्रयाग
प्रयागराज
में चला कुम्भ इतिहास में टकराव के कुम्भ के नाम से याद किया जाएगा। कहते हैं
यह कुम्भ 144 वर्ष बाद आया है। हलांकि यह एक खगौलिय घटना है और इसमें नक्षत्रों
के बदलाव का कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ। पर इसे प्रचारित इस प्रकार किया गया
कि यह अब तक लगे कुम्भ मेलों में यह सबसे अलग है। इस कुम्भ में जिस प्रकार का
धार्मिक टकराव संत महात्माओं में देखा गया ऐसा इससे पहले किसी कुम्भ में नहीं
देखा गया। पहले लगे सभी कुंभ निर्धारित व्यवस्थाओं के अनुसार ही चले हैं।
इस बार के कुम्भ का जो विभत्स चेहरा सामने आया है वह श्रद्धालुओं के पैरों तले
कुचले जाने की घटनाओं को लेकर आया है। हृदयविदारक प्रसंग यह है कि वहां मरने
वाले श्रद्धालुओं की मौत को छुपाने के आरोप प्रशासन और योगी सरकार पर लगे हैं।
वैसे तो सरकारी घोषणा के अनुसार वहां सिर्फ 30 श्रद्धालुओं की मौत दर्शायी जा
रही है लेकिन कहा जा रहा है वहां भगदड़ में कुचले जाने वालों की संख्या हजारों
में है। वैसे कुम्भ में श्रद्धालुओं की मौत कोई नई घटना नहीं है इससे पहले लगे
कुम्भ मेलों में भी श्रद्धालु मारे जाते रहे हैं। पर इस बार प्रश्न सरकारी
व्यवस्थाओं पर खड़े किए गए हैं।
इस बार के कुम्भ को योगी सरकार द्वारा इस प्रकार प्रचारित किया गया जैसे यह जो
कुम्भ आज तक के कुम्भ से सबसे अलग हो। जबकि यह साधारण सी खगौलीय प्रक्रिया है।
कहते हैं वृहस्पति ग्रह 12 वर्ष बाद सूर्य की परिक्रमा को पूरा करता है और तभी
यह परंपरा बनी कि इस दिन लोग पवित्र पावन गंगा नदी के संगम पर एकत्र होकर स्नान
करके अपने पापों की मुक्ति की कामना करेंगे। कहते हैं कि यह इस प्रकार की
परंपरा के अनुसार मनाया जाने वाला 12वां कुम्भ है। 12 को जब 12 से गुणा किया
जाता है तो 144 बनता है। बस इसी बात को ऐसा प्रचारित किया गया कि 144 वर्ष बाद
यह कुम्भ आ रहा है और इसमें जो गंगा के संगम में डुबकि लगा लेगा वह
श्रेष्ठपुण्य को प्राप्त कर लेगा। जबकि ऐसा कुछ भी नया नहीं है।
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ट्रप के फैसलों का बुरा असर भारतीयों
पर
डोनाल्ड
ट्रम्प ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेते ही कई बड़े फैसलों
पर हस्ताक्षर किए। इन फैसलों का बुरा असर वहां रह रहे भारतीयों पर सबसे ज्यादा
पड़ने वाला है। यूं तो ट्रम्प ने कोई फैसला ऐसा नहीं लिया है जो सिर्फ भारतीय
मूल के लोगों को निशाना बनाते हुए लिया हो लेकिन जो फैसले ट्रम्प ने लिए हैं
उससे उन भारतीयों पर गाज गिरनी शुरू हो गई है जो वहां रह रहे हैं। ट्रम्प का सबसे बड़ा फैसला यह है कि अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे प्रवासियों
के बच्चों को अब जन्म के आधार पर अमेरिका में नागरिकता नहीं मिलेगी। ट्रम्प ने
कहा कि यह फैसला उन बच्चों की नागरिकता को सीमित करेगा, जिनकी मां अमेरिका में
अवैध रूप से मौजूद थीं और पिता अमेरिकी नागरिक या स्थायी निवासी नहीं थे। इसके
अलावा, अगर बच्चे की मां का अमेरिका में रहना कानूनी लेकिन अस्थायी था, तब भी
नागरिकता नहीं मिलेगी। अमेरिका में ऐसे 16 लाख भारतीय बच्चे हैं जो वहां पैदा
हुए हैं और उनकी नागरिकता समाप्त हो गई है। ताजा खबर के मुताबिक अवैध रूप से अमेरिका में रहने वाले करीब 25 हजार लोगों को
हिरासत में लिया जा चुका है और गैर कानूनी तरीके से रह रहे लोगों की धरपकड़
अमेरिका में तेजी से की जा रही है। कहा जा सकता है कि ट्रम्प के फैसलों का
विपरीत असर ज्यादातर भारतीय लोगों पर पड़ रहा है।
इसके अलावा ट्रम्प ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से अलग होने का आदेश
दिया है।
जारी
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क्या हसीना मान जाएगी
भारत
के सामने अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि क्या ‘हसीना मना जाएगी’। क्या
बांग्ला देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत बांग्ला देश को वापस लौटा
देगा। इस बात को लेकर दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनातनी शुरू हो गई है। एक बार
फिर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर
पड़ोसी देश ने अपना विरोध दर्ज किया है।
ढाका से मिल रहे समाचारों में कहा जा रहा है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली
अंतरिम सरकार में विधि सलाहकार आसिफ नजरुल ने कहा है कि अगर भारत पूर्व
प्रधानमंत्री शेख हसीना को वापस नहीं करता है तो यह दोनों देशों के बीच हुए
प्रत्यर्पण समझौते का स्पष्ट उल्लंघन होगा। नजरुल ने कहा है कि समझौते के
अनुसार भारत को उन्हें वापस करना होगा। उन्होंने अपनी बात कहते हुए स्पष्ट रूप
से नाराजगी जताई है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, विधि सलाहकार आसिफ नजरुल ने विधि मंत्रालय में आयोजित
एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान यह बात कही। उन्होंने कहा कि हमने शेख हसीना के
प्रत्यर्पण के लिए भारत सरकार को पत्र लिखा है। यदि भारत शेख हसीना को
प्रत्यर्पित नहीं करता है, तो यह बांग्लादेश और भारत के बीच प्रत्यर्पण संधि का
स्पष्ट उल्लंघन होगा। इतना ही नहीं, नजरुल ने कहा कि अगर भारत शेख हसीना का
प्रत्यर्पण नहीं करता है तो बांग्लादेश का विदेश मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय मंच और
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के पास जाकर इस मुद्दे को उठाएगा। उन्होंने कहा कि हसीना
के प्रत्यर्पण के लिए हम हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
जारी
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नीरज चोपड़ा ने अपनी गर्ल फ्रेंड हिमानी से
सोलन में की शादी

ओलंपियन नीरज चोपड़ा ने अपनी गर्ल फ्रेंड हिमानी मोर से सोलन के नजदीक एक
रिजॉर्ट में शादी कर ली। हिमानी मोर ने भी टोकियो ओलंपिक में पदक जीता था।
शादी बहुत गुपचुप तरीके से हुई जिसमें करीब 50-60 लोग ही शामिल हुए। यह शादी
काफी चरर्चा में रही। कहते हैं कि नीरज ने एक रुपए का शगुन स्वीकार करके हिमानी
को अपना जीवन साथी बनाया है।
भाला फेंक कर भारत को ओलंपिक में पदक दिलाने से मशहूर हुए खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने
सोलन के कुमारहट्टी-नाहन नेशनल हाईवे-पांच पर स्थित गांधीग्राम नामक स्थान के
पास बने एक निजी रिजॉर्ट में शादी की। जनवरी के दूसरे पखवाड़े में हुए इस विवाह
की सूचना ओलंपिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों को भी नहीं मिल पाई। शादी के तुरंत
बाद नीरज अपनी पत्नी को लेकर अपने घर चले गए तब जाकर उन्होंने सोशल मीडिया में
शादी की तस्वीर को साझा किया। सूत्रों के मुताबिक शादी की अवधि के दौरान
रिजॉर्ट कर्मचारियों और आए मेहमानों के मोबाइल भी जमा कर दिए थे। यहीं नहीं
सीसीटीवी पर भी टेप लगाकर वैवाहिक रस्मों को पूरा किया गया।
सभी मेहमानों और रिजॉर्ट के कर्मचारियों को भी सख्त हिदायत थी कि कोई विवाह के
बारे में किसी को कुछ नहीं बताएगा। इस विवाह को पूरी सावधानी से गुप्त रखा गया।
जारी
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आरबीआई गवर्नर ने इकोनॉमी ग्रोथ का
अनुमान लगाया है
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा का अनुमान है कि भारत की इकोनॉमी 6.7
फीसदी ग्रोथ दिखाएगी। केंद्रीय बैंक को वित्तवर्ष 2026 के लिए 6.75 फीसदी की
रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान दिया है, जबकि 2025 के आर्थिक सर्वेक्षण में
वित्तवर्ष 2025 के लिए 6.4 फीसदी की थोड़ी कम रियल जीडीपी ग्रोथ का अनुमान लगाया
गया है, जो आरबीआई के दिसंबर के पूर्वानुमान से 20 बेसिस पॉइंट्स कम है।
सर्वेक्षण ने यह भी सुझाव दिया कि वित्तवर्ष 2026 में रियल जीडीपी 6.3 फीसदी और
6.8 फीसदी के बीच बढ़ सकती है। पिछले वित्त वर्ष में 8.2 प्रतिशत
की मजबूत वृद्धि के बाद चली वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में नरम विस्तार हो
सकता है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, आगे चलकर आने वाले साल में आर्थिक
गतिविधियों में और सुधार की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक ने खाद्य वस्तुओं के
दाम में नरमी की उम्मीद के बीच अगले वित्त वर्ष (2025-26) में खुदरा महंगाई दर
4.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया। वहीं चालू वित्त वर्ष 2025 में इसके 4.8
प्रतिशत के अनुमान को बरकरार रखा, जिसे आर्थिक स्थिति पर नियंत्रण की ओर बड़ा
प्रयास बताया जा रहा है।
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की अंतिम द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा की जानकारी
देते हुए कहा कि आपूर्ति के मोर्चे पर किसी झटके की आशंका नहीं है। इसके साथ,
खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर रहने, जाड़े में सब्जियों के दाम में नरमी तथा रबी
फसलों को लेकर अनुकूल संभावनाओं को देखते हुए खाद्य मुद्रास्फीति में उल्लेखनीय
कमी आनी चाहिए।
जारी
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सिर्फ कबाड़घर बनकर रह गया है नगर
निगम सोलन
क्लॉक रूम की जगह खुल गई दुकान
गेमिंग एप पर करोड़पति
बनने के चक्कर में बरबाद हो रहे हैं युवा
जारी... |
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अब चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी भी दूर पटके जा सकते हैं
वेलेंटाइन-डे की छेट पर भाजपा नाराज
सैक्सी विडियो बनाकर ब्लैकमेल करने वाला
चंबा से गिरफ्तार
जारी... |
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