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कसौली में 200 करोड़ की संपत्ति सरकार को चली जाएगी

धारा 118 के उलंग्‍घन पर बड़ी कार्यवाही की तैयारी...

विशेष संवाददाता

     शिमला : किसी हिमाचली के नाम पर पैसा खर्च करके फ्लैट बनाकर बेचने वालों को इस बार तगड़ा झटका लगा है। कसौली में फ्लैट बनाकर बेचने वाले एक बिल्डर को करीब 200 करोड़ रुपए की चपत लगने की पूरी संभावना बन गई है। मंडलायुक्त शिमला की अदालत ने कसौली के पास करीब 45 बीघा बेनामी भूमि पर बने 200 करोड़ के अवैध 90 फ्लैट राज्य सरकार के अधीन लेने का फैसला सुना दिया है।
     हिमाचल में अक्सर ऐसा सुनने को मिलता है कि बाहरी राज्य के कुछ लोग किसी हिमाचली कृषक को बहला फुसलाकर उसके नाम पर जमीन खरीद लेते हैं और उस संपत्ति को विकसित करके उसे महंगे दामों पर बेचकर निकल लेते हैं। ऐसा करके वह हिमाचल प्रदेश में भूमि सुधार करनून 1971 की धारा 118 का उलंग्धन कर देते हैं। लेकिन इस मामले में मंडलायुक्त की अदालत ने उपायुक्त सोलन के आदेशों पर मोहर लगाते हुए यह फैसला सुनाया और उस संपत्ति को प्रदेश सरकार के अधीन लिया जाए।
     वर्ष 2014 में यह मामला सामने आया था। एक शिकायतकर्ता संतोष कुमार ने पुलिस को शिकायत दी थी कि कसौली के तीन मौजा क्षेत्रों में कुछ लोगों ने फ्लैट बनाने के नाम पर भूमि खरीदी है। इसमें कुछ लोगों ने चोरी छुपे करोड़ों रुपए लगाए हैं। यह मामला बेनामी संपत्ति के दायरे में आता है। उस समय के एसपी ने जांच का जिम्मा एसआईटी को सौंपा। मामले में चार मुख्य आरोपी बनाए गए। जांच में पाया गया कि बाहरी राज्यों के लोगों ने एक स्थानीय व्यक्ति के बैंक खाते में करोड़ों रुपए की ट्रांजेक्शन की है। उसके बाद विभिन्न स्थानों पर करीब 45 बीघा भूमि खरीदी और उस पर बहुमंजिला फ्लैट्स का निर्माण किया।
     लंबी जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ भूमि सुधार कानून 1971 की धारा 118 के उल्लंघन का केस दर्ज किया गया। वर्ष 2016 में मामले की जांच आरंभ हुई। सभी आवश्यक कार्यवाही पूरी करने के बाद वर्ष 2019 में डीसी ने भूमि और उस पर हुए निर्माण को सरकार के अधीन लेने का फैसला सुनाया था। इस फैसले को चुनौती दी गई और मामला मंडलायुक्त शिमला के पास पहुंच गया। उपायुक्त सोलन के फैसले को चुनौती देने वालों ने अपना पक्ष मंडलायुक्त के समक्ष रखा लेकिन सुनवाई पूर्ण हो जाने के बाद यहां भी डीसी सोलन के आदेशों को बरकरार रखा गया।
     अब इस मामले को प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी जाएगी या नहीं यह चोरी छुपे जमीन खरीदने के आरोपी पक्ष पर निर्भर करता है। फिलहाल यह बड़ी प्रोपर्टी बिल्डरों के हाथ से निकलने की पूरी संभावनाएं बन गई है। इस फैसले ने ऐसे लोगों के दिलों की धड़कने बढ़ा दी हैं जिन्होंने धारा 118 को गच्चा देते हुए किसी और व्यक्ति के नाम पर हिमाचल में जमीनें खरीद रखी हैं।
     हिमाचल में कानून है कि प्रदेश में भूमि सिर्फ हिमाचल प्रदेश का कृषक ही खरीद सकता है। या फिर प्रदेश सरकार से अनुमति लेने के बाद हिमाचल प्रदेश में गैर कृषक भूमि खरीद सकता है। इसमें सरकार ने एक और प्रावधान किया है कि 1972 से पहले हिमाचल में रहने वाले लोग 250 स्क्वेयर मीटर भूमि मकान बनाकर रहने के लिए खरीद सकते हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश विधानसभा में प्रस्ताव पास करके भी भूमि की खरीद की जा सकती है। इन बातों का उलंग्घन करने वालों को अपनी भूमि से हाथ धोना पड़ सकता है।

 
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