कांग्रेस ने एक
साथ 60 पदाधिकारियों के पद छीन लिए
भागवत के खिलाफ प्रदर्शन में
शामिल नहीं हुए कांग्रेसी...
कांग्रेस ने ऐसे पदाधिकारियों
को पार्टी से बाहर करने की पहल कर दी है, जो पार्टी के भीतर पदों को घेरे रहते
हैं और पार्टी के कार्यक्रमों में भाग नहीं लेते हैं। महाराष्ट्र में कांग्रेस
ने ऐसे 60 कार्यकर्ता से पद छीन लिए हैं जिन्होंने पार्टी के कार्यक्रम में कोई
रुचि नहीं दिखाई। इनमें से अधिकतर तो ऐसे थे जो पार्टी के पदों पर कब्जा जमाए
बैठे थे। कांग्रेस के इस एक्शन से पार्टी में हडकंप मच गया है। कहते हैं ऐसे
कार्यवाही अब हर जगह होगी ताकि कांग्रेस के लोग पार्टी को गंभरता से लेना शुरू
करें।
पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के राम मंदिर
निर्माण को देश की आजादी का दिवस बता दिया था। इसके विरोध में कांग्रेस ने एक
आंदोलन का अह्वान किया था। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने आरएसएस के नागपुर स्थित
मुख्यालय तक मार्च निकाला गया था। इस आयोजन में कांग्रेस के ही तमाम कार्यकर्ता
शामिल नहीं हुए, जिसका विरोध कांग्रेस पार्टी के भीतर ही शुरू हो गया। तब जाकर
कांग्रेस ने ऐसे लोगों पर ऐक्शन लिया है और कुल 60 कार्यकर्ताओं को पदों से हटा
दिया।
कांग्रेस ने जिन नेताओं के खिलाफ ऐक्शन लिया है, उनमें कुछ वाइस प्रेजिडेंट, 8
महासचिव, 20 सचिव और कुछ जिलाध्यक्ष भी शामिल हैं। नेशनल यूथ कांग्रेस की ओर से
19 जनवरी को भागवत के खिलाफ इस मार्च का आयोजन किया गया था। जिसका नेतृत्व
राष्ट्रीय चीफ उदय भानु कर रहे थे। इस मार्च में महाराष्ट्र के यूथ कांग्रेस
प्रेजिडेंट कुणाल रावत भी शामिल थे। इसमें कांग्रेस के कई निष्ठावान कार्यकर्ता
शामिल हुए थे, परंतु पार्टी में अपनी ऐठ में रहने वाले बहुत से नेता गायब रहे।
प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं में उन नेताओं के खिलाफ गुस्सा सामने आ गया जो
पार्टी में पद में ग्रहण किए हुए है लेकिन पार्टी के कार्यक्रमों में उनकी कोई
रुचि नहीं है। तभी वहां ऐसे पार्टी के पदाधिकारियों की सूचि बनाई गई और इन्हें
पदों से हटाए जाने का प्रस्ताव पार्टी आलाकमान को भेजने का फैसला लिया गया। अंत
में हाईकमान की मंजूरी के बाद 60 नेताओं के खिलाफ ऐक्शन ले लिया गया। हाई कमान
की तुरंत मंजूरी के बाद कहा गया कि पार्टी के नेता राहुल गांधी कई बार कह चुके
हैं कि जिसे कांग्रेस पार्टी में नहीं रहना है वह पार्टी से बाहर जा सकता है।
कांग्रेसजनों का कहना है पार्टी में रहने का अर्थ यह नहीं है कि अपने पदों पर
बने रहो और पार्टी के कार्यक्रमों का एक तरह से बहिष्कार करो। पार्टी के
कार्यक्रमों में न आना पार्टी के कार्यक्रम का बहिष्कार ही माना जाता है।
कांग्रेस के भीतर ऐसे कई पदाधिकारी हैं जो पार्टी के कार्यक्रमों में भाग नहीं
लेते हैं और कई ऐसे नेता भी है जो पार्टी के पदों पर कब्जा करके भाजपा के
स्लीपर सेल का काम करते हैं। ऐसे लोगों को पार्टी से बाहर करना अत्यंत जरूरी
है। कम से कम उनसे कांग्रेस पार्टी के पदों को छीन लिया जाना चाहिए और उनके
स्थान पर निष्ठावान कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाना चाहिए। महाराष्ट्र में पार्टी की
चुनावों में हार का एक मुख्य कारण यह भी है। ऐसे में ऐसे लोगों के खिलाफ
कार्यवाही तो करनी बहुत जरूरी थी, जिससे अन्य प्रांतों के संगठनों को भी पटरी
पर लाने की पहल हो सकेगी।
कहते हैं कि अब हर प्रांत में पार्टी संगठन की ऐसे ही स्क्रूटनी की जाएगी और
पार्टी को समय न देने या पार्टी के खिलाफ चलने वालों के खिलाफ कायवाही की
जाएगी। यहां यह कहा जा रहा है कि कई क्षेत्रीय नेता ऐसे भी हैं जो पार्टी के
छोटे कार्यक्रमों को कोई तव्वजों नहीं देते हैं और जब कोई बड़ा नेता आता है तो
सबसे आगे की पंक्ति में अपना सिंहासन लगाकर बैठ जाते हैं। पार्टी को एसे नेताओं
की रिपोर्ट भी तैयार करने चाहिए और कड़ा कदम उठाना चाहिए।
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