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कम से कम
मुख्यमंत्री के जिले में तो शिक्षक पूरे कर लेते
विवश होकर बच्चे निजी स्कूलों
में भाग रहे हैं...
विशेष संवाददाता

शिमला : मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू का जिला हमीरपुर ही जब शिक्षकों के
अभाव की प्रताड़ना झेल रहा है तो फिर पूरे हिमाचल के स्कूलों का क्या हाल होगा,
इसका अंदाजा सहजता से लगाया जा सकता है। यही नहीं हिमाचल में सरकारी स्कूल क्यों
दिन प्रतिदिन फेल होते जा रहे हैं इसके लिए भी हमीरपुर के स्कूल बड़ी मिसाल बनकर
प्रदेश के लोगों के सामने आए हैं। जहां छात्रों का जीवन अंधकार में जाता हुआ
प्रतीत होता है जबकि यहां की जनता ने हिमाचल को काबिल मुख्यमंत्री दिया है।
अब ग्रीष्मकालीन स्कूलों की वार्षिक परीक्षाओं बहुत कम समय बचा है लेकिन हिमाचल
के स्कूलों में विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक ही नहीं हैं।
हमीरपुर जिले के 67 प्राथमिक स्कूल एक-एक जेबीटी शिक्षक के सहारे ही चल रहे
हैं। अब इन स्कूलों में सभी विषयों की पढ़ाई कैसे होती होगी इसे बताया नहीं,
आसानी से समझा जा सकता है। पहले में इन स्कूलों में दो से तीन जेबीटी शिक्षक
कार्यरत थे, हलांकि वह भी अच्छी शिक्षा देने के लिए पर्याप्त नहीं थे। फिर भी
स्कूल रड़क-रड़क के चल रहे थे। शैक्षणिक सत्र 2024-25 में स्कूलों के मर्ज होने
के बाद कुछ स्कूल अन्य स्कूलों में शिफ्ट हो गए है। इससे अब जिले के प्राथमिक
स्कूलों में स्टाफ की कमी चल रही है।
प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री के जिले में ही 72 प्राथमिक स्कूलों में जेबीटी
शिक्षकों के पद छह माह से अधिक समय से खाली छोड़ रखे हैं। मंत्री, नेताओं और
अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद शिक्षा विभाग स्कूलों में रिक्त पदों को
भरने में विफल रहा है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में शिक्षक न होने से
विवश होकर बच्चे निजी स्कूलों में भाग रहे हैं। इससे कम विद्यार्थी होने पर
स्कूल बंद हो रहे हैं। एक-एक शिक्षक के ऊपर प्री-प्राइमरी से पांचवीं कक्षा,
जबकि कार्यालय का अतिरिक्त कार्यभार भी है। जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई
प्रभावित हो रही है।
इस बारे में जब उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग, हमीरपुर से पत्रकारों ने पूछा
तो उनका कहना था कि रिक्त पदों के बारे में रिपोर्ट शिक्षा निदेशालय भेज दी गई
है। वहीं, स्कूलों में विद्यार्थियों को सुचारू रूप से पढ़ाई करवाई जा रही है।
बेचारे इस प्रकार का बयान देने पर मजबूर हैं जबकि धरातल पर हकीकत कुछ और ही है।
यहां सवाल यह भी है कि क्या मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह को अपने जिले के बारे
में यह जानकारी है भी या नहीं।
मुख्यमंत्री आजकल अनाथ और अक्षम बच्चों के भविष्य को उज्जवल बनाने की गाथाएं
देश को बता रहे हैं और अपने जिला के स्कूलों को सुधारने के लिए उनके पास वक्त
नहीं है। यहां प्रश्न प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर पर भी खड़े होते हैं
कि वह इतना ध्यान भी नहीं रखते हैं कि कम से कम मुख्यमंत्री के जिला के स्कूलों
को तो शिकायतरहित बना सकें। अब जब यह बात सार्वजनिक रूप से उजागर हो चुकी है तो
इसमें अब तीव्र गति से सुधार होना चाहिए। यहां के बच्चे जो पढ़ाई में पिछड़ गए
हैं उनके लिए एक्सट्रा क्लासें लगाकर उन्हें परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने लायक
बनाया जाए। हलांकि यह कार्य पूरे प्रदेश में होना चाहिए लेकिन हमीरपुर में
विशेष ध्यान देना चाहिए क्योंकि लोगों को मुख्यमंत्री देने का अहसाहस तो हो।
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