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हिमाचल प्रदेश में लीडरशिप की लड़ाई तेज

क्‍या नए नेत़त्‍व में होंगे विधानसभा चुनाव...

विशेष संवाददाता

     शिमला : हिमाचल प्रदेश में दोनों राजनैतिक पार्टियों में नई लीडरशिप की लड़ाई दिन प्रतिदिन तेज होती जा रही है। जहां कांग्रेस अपने नए अध्यक्ष को लेकर उल्झी हुई है वहीं भाजपा में भी आगामी सरकार को लेकर नए गठजोड़ बनने शुरू हो गए हैं। यह बात भी तय है कि अभी तक दोनों पार्टियों का प्रभावी नेतृत्व जनता के समक्ष नहीं आया है। दोनों पार्टियां गुटबाजी के दौर से गुजर रही हैं।
     कांग्रेस में प्रदेशाध्यक्ष को लेकर चल रही लड़ाई कम से कम यहां तक पहुंचती हुई नजर आ रही है कि जब मुख्यमंत्री पद लोआर हिमाचल को दे दिया गया है तो अध्यक्ष पर अपर हिमाचल के खाते में जाना चाहिए। कहते हैं अब फैसला इस बात का होना है कि अध्यक्ष पद पर पूर्व अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर को बिठाया जाएगा या फिर रोहित ठाकुर को मंत्री पद से हटाकर उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाया जाएगा। पिछले दिनों इस बात ने जोर पकड़ लिया कि कांग्रेस का प्रदेश में संगठन ही नहीं है और बिना संगठन के पार्टी कैसे आगामी विधानसभा चुनावों में जाएगी। जब तक प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नहीं चुनाव जाता है तक तक आगे बढ़ना आसान नहीं है। सत्ता में विराजमान गुट को चिंता इस बात की सता रही है कि यदि विरोधी गुट का नेता पार्टी का अध्यक्ष बन गया तो उनकी सत्ता कैसे लौटकर आ सकेगी।
     भाजपा में तो गुटबाजी इतने चरम पर पहुंच गई है कि पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को खुले मंच से अपनी पार्टी के नेताओं के खिलाफ बोलना पड़ रहा है। पिछले दिनों उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि उन्होंने तो मंडी जिला से दस में से नौ सीटें भाजपा की झोली में डाली हैं। क्या और सांसदों की यह जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि वह भी प्रदेश में भाजपा की सरकार बनवाने के लिए अपने हल्कों से भाजपा को वैसी जीत दिलाते जैसी मंडी में भाजपा को मिली है।
     भाजपा में अगला प्रदेशाध्यक्ष कौन होगा इसके लिए भी खींचतान शुरू हो गई है। यह बात भी तय मानी जा रही है कि अगले विधानसभा चुनाव तक डा. राजीव बिंदल प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष नहीं होंगे। वैसे भी उन्हें अगला विधानसभा चुनाव लड़ना है। भाजपाई के बीच यह चरचा भी जोरों शोरों से है कि अनुराग ठाकुर और जेपी नड्डा भी हिमाचल में मुख्यमंत्री की रेस में आ सकते हैं। केन्द्र में यदि मोदी सरकार गिर जाती है तो केन्द्रीय नेतृत्व के पास हिमाचल में आने के अतिरिक्त और कोई चारा नहीं बचेगा। यूं भी कहा जाता है कि हिमाचल मेंएक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा सत्ता में आती है और अब बारी भाजपा के सत्ता में आने की है। यदि अनुमान भाजपा में लड़ाई तेज होने का सबसे बड़ा कारण है। जयराम ठाकुर के खिलाफ यह बात भी जाती है कि अमित शाह पहले ही कह चुके हैं कि हिमाचल में मुख्यमंत्री ऐसे व्यक्ति को बनाया जाएगा जो भाजपा को 50 साल तक सत्ता में रखने का दम रखता हो।

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