केजरीवाल की हार
से कांग्रेस को लाभ
केजरीवाल की हार से इंडिया
गठबंधन को राहत...
विशेष संवाददाता
शिमला : आम आदमी पार्टी (आप) के नेता अरविंद केजरीवाल की हार से कांग्रेस पार्टी
को बड़ा फायदा होने जा रहा है। भले ही कांग्रेस दिल्ली चुनाव में शून्य रही
लेकिन यह बात धीरे धीरे स्थापित होती चली जा रही है कि जब भी भाजपा का सूरज
अस्त होगा तो कांग्रेस को ही इसका लाभ मिलेगा।
इसकी सबसे बड़ा वजह भी यही बताई जा रही है कि अकेले राहुल गांधी ही भाजपा से
सीधी टक्कर ले रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि इंडिया गठबंधन में सबसे बड़ा
रोड़ा केजरीवाल ही थे। कई बार उन्होंने गठबंधन के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ा और
गठबंधन की मजबूत पार्टी कांग्रेस को नुक्सान पहुंचाया। कांग्रेस को खत्म करके
ही वह दिल्ली और पंजाब में सरकार बनाने में सफल हुए थे। यदि केजरीवाल गुजरात
में कांग्रेस के साथ हाथ मिलाकर चुनाव लड़ते तो बहुत पहले ही प्रधानमंत्री
नरेन्द्र मोदी को गुजरात जीतने का लाभ नहीं मिलता।
हरियाणा में हुए राज्य चुनावों में भी केजरीवाल ने अपनी चलाई और इसका लाभ भाजपा
को मिल गया। आज परिणाम यह निकला कि केजरीवाल छोटी सी दिल्ली सरकार का हिस्सा भी
नहीं रह गए हैं। दिल्ली चुनाव परिणामों के बाद इंडिया गठबंधन को एक राहत जरूर
मिली है कि जो छत्रप सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस को अलग थलग करने के प्रयास को
अपनी उपलब्धि मान रहे थे उन पर नकेल कसनी शुरू हो गई है। अब यह बात तेजी से फैल
गई है कि यदि केजरीवाल कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ते तो यह चुनाव परिणाम
केजरीवाल को राजनीति में बचा भी सकते थे।
दिल्ली हो जाने के बाद अब सबकी निगाहें बिहार और उत्तर प्रदेश के चुनावों में
टिक गई हैं। जहां भाजपा पहले से ज्यादा ताकतवर होकर चुनाव मैदान में उतरेगी।
दिल्ली चुनाव में सबसे बड़ा नुक्सान उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को हुआ है। जिन्होंने कांग्रेस को
नजरअंदाज करते हुए केजरीवाल के साथ हाथ मिला लिया था। वह चाहते तो वह इससे दूर
भी रह सकते थे, क्योंकि उनकी कैमिस्ट्री कांग्रेस के नेता राहुल गांधी से बहुत
अच्छी बनी हुई थी। इसके परिणाम लोकसभा चुनाव में भी सामने आ गए थे।
अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि ममता बनर्जी सहित जब यह सारे छात्रप भाजपा के
हाथों कुचले जाएंगे तो फिर भाजपा के खिलाफ एक मात्र विकल्प कांग्रेस ही बचेगा।
कांग्रेस के लिए समय है कि वह अपने अंदर मूलभूत सुधार करे और अपने अंदर बैठे
स्लीपर सेल से सारे पदों को छीन ले। कांग्रेस में ब्लाॅक स्तर तक ऐसे लोग बैठे
हैं जो कांग्रेस में रहकर विरोधियों से भी हाथ मिलाए हुए हैं। कांग्रेस को
कांग्रेस की विचारधार से जुड़े काबिल लोगों को आगे रखने की जरूरत है। अभी उसके
पास सुधार के लिए बहुत समय है और अभी नरेन्द्र मोदी भी जाने वाले नहीं हैं।
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