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बंद स्कूल में सरकारी कार्यालय खोलना गैर कानूनी हो सकता है दान की गई भूमि में कार्यालय नहीं खुल सकता... विशेष संवाददाता शिमला : हिमाचल में स्कूलों के मर्ज और बंद करने को लेकर हजारों स्कूलों के भवन खाली हो गए हैं। अब सरकार इन खाली भवनों में अन्य सरकारी कार्यालय खोलने की तैयारी में है। सरकार का यह कदम कई स्थानों पर गैर कानूनी भी हो सकता है। इसे लेकर प्रदेश सरकार ने कोई भी योजना नहीं बनाई है। इस वजह से सरकार को कानूनी पचड़ों में पड़ने की युक्ति समय रहते सूझ लेनी चाहिए। कानूनी जानकारों से इसके लिए समय रहते सलाह ले लेनी जरूरी है।सरकार ने स्कूल मर्जर पालिसी के तहत जो स्कूल बंद किए हैं और उसके भवन खाली हो गए हैं उनकी शुरू से राजस्व रिपार्ट मंगवा लेनी चाहिए। जिस स्कूल की भूमि किसी व्यक्ति ने स्कूली बच्चों की शिक्षा के लिए दान की है वहां सरकार कोई अन्य कार्यालय नहीं खोल सकती है। क्योंकि सरकार ने जब किसी से बच्चों की शिक्षा या स्कूल खोलने के लिए भूमि ली थी तो उसे आश्वासन दिया था कि वह इलाके के बच्चों की शिक्षा के लिए भूमि दान में ले रही है। इस न्यास को किसी और कार्य के लिए तोड़ा नहीं जा सकता है। यदि सरकार ऐसा करती है तो वह पूरी तरह से गैर कानूनी होगा और उसे भूमि को उसके आॅरिजनल मालिकों को लौटानी पड़ सकती है। अब जिला सोलन को ही ले लें तो यहां बंद और मर्ज हुए स्कूलों में अन्य सरकारी कार्यालय खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत जिला सोलन के बंद हुए प्राथमिक स्कूल सरली में पुलिस पोस्ट खोल दी गई है। इसके अलावा अन्य स्कूल भवनों में पंचायत, युवक मंडल या फिर अन्य सरकारी कार्यालय भी खोले जा रहे हैं। इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने का कार्य भी शुरू हो चुका है। जिले में बंद हुए स्कूल भवन देख-रेख के अभाव से खंडहर में बदलते जा रहे हैं। वर्तमान में 16 प्राथमिक और एक माध्यमिक स्कूल में ताला लटका है। शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट कर दिया है। बताते हैं कि जिले में करीब 910 प्राथमिक और 140 माध्यमिक स्कूल चल रहे हैं। शिक्षा निदेशालय ने कम विद्यार्थियों की संख्या वाले और दो से चार कि.मी. के दायरे में चल रहे स्कूलों का आंकड़ा एकत्र करने के लिए जिला विभाग को आदेश दिए थे। प्रारंभिक शिक्षा के उपनिदेशक मोहिन्द्र चंद ने भी इस बात की पुष्टि की है कि मर्ज और बंद किए स्कूलों को पंचायत या किसी अन्य संस्था को देना प्रस्तावित है। सोलन के अलावा प्रदेश भर में खाली पड़े स्कूल भवनों में अन्य सरकारी कार्यालय या किसी संस्था के कार्यालय खोलने पर बड़े पैमाने पर विचार चल रहा है, लेकिन इस बात पर सरकार का ध्यान नहीं है कि जिस भूमि पर स्कूल बना है वह सरकार के पास कहां से आई है। वैसे तो बच्चों की शिक्षा के लिए तय किसी भी भूमि को किसी अन्य कार्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। यदि वह निजी भूमि रही है तो ऐसा करना उस व्यक्ति के साथ मरणोपरांत धोखा है जिसने आने वाली नस्लों के लिए अपनी भूमि सरकार को दान कर दी थी। सरकार ने यदि स्कूल बंद कर दिए हैं तो स्कूल की भूमि उसके मालिक के आश्रितों को वापस चली जानी चाहिए। क्योंकि सरकार ने जिस मक्सद के लिए जमीन ली थी उस मक्सद को ही खत्म कर दिया है। ऐसे में सरकार को जनता के समक्ष यह तस्वीर भी रखनी चाहिए कि कौन सा स्कूल कैसे खुला था और उसकी संपत्ति को कैसे कानूनी तरीके से समाप्त किया जा रहा है। स्कूल भवन भी स्कूल की संपत्ति का एक भाग है। उस पर गैर कानूनी तरीके से किसी को भी नहीं दिया जा सकता है। |
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