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शून्‍य तापमान के साथ हिमाचल कड़ाके की सर्दी में

हिमाचल में लंबे अंतराल के बाद अच्‍छी बारिश हुई...

     हिमाचल प्रदेश में लंबे इंतजार के बीच जनवरी के दूसरे पखवाडे में बदलाव शुरू हो गया है। पश्चिमी विक्षोभ के अधिक सक्रिय होने के चलते पर्वतीय इलाकों में भारी बर्फबारी और मैदानी व मध्यपर्वतीय क्षेत्रों में भारी हुई है। अभी ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के आसार जताए गए हैं। इसका अच्छा असर खेती पर पड़ेगा, खासकर मैदानी इलाकों में जहां पिछले तीन महीनों से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात बन गए थे।
     अब शून्य डिग्री तापमान के साथ ही समूचा हिमाचल प्रदेश कड़ाके की सर्दी में है। हलांकि फरवरी माह में अच्छी धूप खिला है। जनवरी मध्य में लाहौल-स्पीति, कुल्लू, किन्नौर, बिलासपुर, मंडी, सोलन, चंबा और शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान शून्य से नीचे दर्ज किया गया। कांगड़ा व हमीरपुर में पारा शून्य तक पहुंचा है। सबसे कम तापमान लाहौल-स्पीति के ताबो में माइनस 8.7 डिग्री और कुकुमसेरी में माइनस 7.1 डिग्री रहा, इसके बाद कल्पा में माइनस 2.0 डिग्री दर्ज हुआ, रिकांगपिओ 0.4, सेओबाग 0.5, बरठीं 0.3. भुंतर 1.0, सुंदरनगर 1.4, हमीरपुर 1.3, सोलन 1.6, मनाली 1.5, मंडी 2.5, पालमपुर 3.0, ऊना और कांगड़ा 3.4, बिलासपुर 3.5, कुफरी 4.0, धर्मशाला 5.0, शिमला 5.6, जुब्बड़हट्टी 6.2, नाहन 6.7, सराहन 7.8, पांवटा साहिब 8.0, कसौली 8.5, नेरी 8.6 और देहरा गोपीपुर में 9.0 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।
     किन्नौर, लाहौल-स्पीति, चंबा और कुल्लू के ऊंचे इलाकों में कड़ाके की ठंड से जनजीवन प्रभावित हुआ है। पाला पड़ने के कारण कई स्थानों पर पानी पाइपों में जमा रहा। पाला पड़ने से सड़कों पर फिसलन भी बढ़ गई है। कहते हैं पिछले दिनों कुपवी में हुए बस हादसे का कारण भी सड़क पर जमा पाला ही बताया जा रहा है। इस हादसे में करीब 8 लोगों की मौत हो गई थी। जलाशयों और नदियों से सटे क्षेत्रों में भी घना कोहरा पड़ रहा है। भाखड़ा, पोंग, कोलडैम और नदियों-जलाशयों के आसपास सुबह दृश्यता बेहद कम रही। सूखे से जूझ रहे हिमाचल में शीतलहर तेज हो गई है। प्रदेश के 12 में से आठ जिलों में पारा माइनस में चला गया था। दो जिलों में न्यूनतम तापमान शून्य के आसपास रहा है। मैदानी क्षेत्रों में भी सुबह-शाम घने कोहरे के बीच हाडकंपा देने वाली ठंड पड़ रही है।
     मौसम विभाग ने बिलासपुर, ऊना, कांगड़ा, मंडी, हमीरपुर और सोलन व सिरमौर के कई क्षेत्रों में घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया हुआ था। अब राजधानी शिमला, सोलन, धर्मशाला और कुछ कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुबह से ही धूप खिल रही थी, जिससे दिन के समय ठंड से कुछ राहत मिल रही थी। मैदानी और निचले क्षेत्रों में करीब 11 बजे के बाद धूप निकलने से तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, सूर्य ढलते ही ठंड फिर से हावी हो गई।
     हिमाचल के साथ लगते मैदानी इलाकों में भारी घुंध परेशानियों का सबब बनी हुई है। यहां तो सूर्य के दर्शन किए बिना भी कई दिन बीत रहे हैं। यही वजह है कि हिमाचल के साथ लगते मैदानी इलाकों में सर्दी उन इलाकों से भी अधिक पड़ रही है जो पहाड़ी क्षेत्र में आते हैं। हिमाचल में जनवरी से अब तक प्रदेश में सामान्य से करीब 85 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई थी। एक से दस जनवरी के लिए 18.7 फीसदी बारिश को सामान्य माना गया। वास्तव में 2.7 फीसदी बारिश ही दर्ज की गई। बिलासपुर में सामान्य से 88, चंबा में 87, हमीरपुर में 98, कांगड़ा में 84, किन्नौर में 100, कुल्लू में 100, लाहौल-स्पीति में 75, मंडी में 85, शिमला में 97, सिरमौर में 99 व सोलन में 60 फीसदी कम बारिश हुई। इतनी कम बारिश हिमाचल की कृषि के लिए काफी नुक्सानदायक साबित हो रही थी। लेकिन अब पिछले दिनों की बरसात से लोगों को काफी राहत महसूस हुई है। अब करीब एक माह तक मौसम बदल बदल कर करवट बदलता रहेगा। लोग चाहते हैं कि मौसम का संतुलन बना रहना चाहिए।

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