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बघाट बैंक का भांडाफोड़ तो एक दिन होना था
ग्रास ने हाई कोर्ट में जीता था मानहानि का केस...
निजी संवाददाता

सोलन : बघाट बैंक में जो घोटाला हुआ वह ग्रास साप्ताहिक के लिए कोई नई बात नहीं
है। अप्रैल 1997 के अंक में ही ‘ग्रास’ ने ‘बघाट बैंक में भारी घोटाले की
संभावना’ हैडलाइन से खबर छापकर से लोगों को बता दिया था। इस खबर के चलते बैंक
के प्रबंधन ने ग्रास के खिलाफ 05 लाख रुपए का मानहानि का दावा कर दिया था।
जिला न्यायालय में कानूनी जंग चली और ‘ग्रास’ की दलीलें मानते हुए कोर्ट ने
मानहानि को तो अस्वीकार कर दिया लेकिन ‘ग्रास’ को दस हजार रुपए बैंक को दावा
खर्च देने का आदेश पारित कर दिया। ‘ग्रास’ के संपादक संजय हिंदवान ने बघाट बैंक
को दस हजार रुपए देने से इंकार कर दिया। हलांकि तब बैंक प्रबंधन ने अपने
चाटूकारों के सहयोग से ‘ग्रास’ के खिलाफ खूब खबरें अखबारों में छपवाई। क्योंकि
सवाल दस हजार का नहीं था ‘ग्रास’ की प्रतिष्ठा का था।
इसलिए संजय हिंदवान लोअर कोर्ट के इस मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट
पहुंच गए। वहां पर भी ‘ग्रास’ ने अपनी दलीलें रखीं। आखिरकार हाई कोर्ट ने 29
फरवरी, 2008 को ‘ग्रास’ के पक्ष में फैसला देते हुए और उसकी पत्रकारिता को सही
आंकते हुए लोअर कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। इस बात की जानकारी बैंक
प्रबंधन ने सोलनवासियों से छुपा ली। नतीजा यह हुआ कि बैंक ने और बड़ी
हेराफेरियां करनी शुरू कर दी। तब शेयर होल्डर से लेकर प्रबंधन आपस में मिल गए
थे। आखिर सांच को आंच नहीं, बघाट बैंक के घोटालों पर पर्दा उठता गया और वह अब
सबके सामने है। ‘ग्रास’ की खबर को हल्के में लेकर आज पूरा बैंक मुश्किल में है।
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