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शराब घोटाले में बरी होने के बाद केजरीवाल तीखे तेवर में
भाजपा को मिल सकता है केजरीवाल का लाभ...
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जब
से शराब घोटाले में बरी हुए हैं तब से वह फिर से तीखे तेवरों में आ गए हैं। भले
ही इस केस की वजह से वह अपनी दिल्ली की अभेद्य सरकार को बीजेपी के हाथों हार गए
हों लेकिन अब उनके समक्ष पंजाब में अपनी सरकार को बचाने और गुजरात में सरकार
बनाने की चुनौती है। राजनैतिक पंडित इस रिहाई को भाजपा के लिए कम और कांग्रेस
के लिए अधिक नुक्सानदायक रहने के नजरिए से भी देख रहे हैं।
पिछले दिनों दिल्ली की विशेष अदालत ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील आबकारी घोटाले
में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष
सिसोदिया और तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता और 20 अन्य लोगों को बरी कर
दिया। अदालत ने कहा कि गंभीर संदेह तो दूर की बात है इसमें तो प्रथमदृष्टया
मामला भी नहीं बनता। कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को फटकार लगाते
हुए कहा कि यह मामला न्यायिक जांच में पूरी तरह विफल और निराधार साबित हुआ है।
हलांकि इसफेसले के खिलाफ एक अपील हाई कोर्ट में लंबित चल रही है।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेंद्र सिंह ने कहा ऐसा लगता है कि जांच
पूर्वनिर्धारित दिशा में आगे बढ़ी, जिसमें नीति बनाने या कार्यान्वयन से जुड़े
लगभग हर व्यक्ति को फंसाया गया है। अदालत ने जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय
कार्यवाही का भी आदेश दिया। कोर्ट ने न सिर्फ दूषित जांच सामग्री पर आपत्ति
जताई, बल्कि कुलदीप सिंह को बिना सबूत आरोपी बनाने के लिए दोषी जांच अधिकारी के
खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने के निर्देश दिए। जवाबदेही तय करने और जांच तंत्र
की संस्थागत विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। ऐसे आचरण को बेनतीजा
गुजरने देना आपराधिक न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को कम करेगा और जांच
में अनुचित व्यवहार की मौन न्यायिक स्वीकृति के समान होगा, जो स्वीकार्य नहीं
है।
फैसले के तुरंत बाद सीबीआई दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गई। सीबीआई के प्रवक्ता ने
कहा विशेष अदालत ने जांच के कई पहलुओं को या तो नजरअंदाज कर दिया या पर्याप्त
विचार नहीं किया। सीबीआई के वकीलों ने अपील में सभी आरोपियों को आरोपमुक्त करने
को चुनौती दी और ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। यह मामला
आगे दिल्ली हाई कोर्ट में चलता रहेगा लेकिन फिलहाल मौजूदा राजनीति में केजरीवाल
को एक बार फिर पुराने तेवर दिखाने का मौका मिल गया है। दिल्ली में भाजपा की
रेखा गुप्ता सरकार की कुछ ही दिनों में विफलता के कारण भी केजरीवाल का राजनैतिक
कद बढ़ने लगा है। लगता है कुछ ही दिनों में केजरीवाल पंजाब और गुजरात में अपनी
गतिविधियां बढ़ा देंगे।
पंजाब और गुजरात के अलावा केजरीवाल को उत्तराखंड और हिमाचल जैसे राज्यों में भी
पार्टी विस्तार करने का मौका मिलेगा। उनकी जो छवि शराब घोटाले के कारण खराब हो
गई थी उसे सुधारने का भी उन्हें मौका मिलेगा। कहा यह भी जा रहा है कि केजरीवाल
का शराब घोटाले में बरी होने का लाभ भाजपा को अधिक होगा। क्योंकि पंजाब में
केजरीवाल और कांग्रेस में समझौता होने के आसार नाममात्र हैं। गुजरात में
केजरीवाल कांग्रेस को साथ नहीं लेंगे ऐसे में लाभ भाजपा को हो सकता है। इसी
प्रकार उत्तराखंड, हिमाचल और गोवा जैसे राज्यों में केजरीवाल की वजह से
कांग्रेस को नुक्सान हो सकता है और भाजपा को सेकुलर वोट विभाजन का लाभ मिल सकता
है।
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