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अब भारी भरकम बिजली के बिल थमा दिए उपभोक्‍ताओं को

हिमाचल में मुफ्त बिजली अब नाममात्र रह गई है...

विशेष संवाददाता

     शिमला : बिजली बोर्ड की तरफ से भारी भरकम बिल लोगों को थमा दिए गए हैं। इससे प्रदेश भर में हाहाकार मचा हुआ है। जिन घरेलु उपभोक्ताओं के घर सर्दियों में बंद रहे हैं उनसे भी न्यूनतम बिल 100 रुपया वसूल किया गया है। सर्दियों में वैसे भी सर्दी से बचने के लिए 125 यूनिट फ्री बिजली के कोई मायने नहीं रह जाते हैं। सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया था कि बिजली की दरों में बेताहशा वृद्धि नहीं की जाएगी लेकिन अब बिल भरते हुए लोगों के पसीने छूट रहे हैं।
     ग्रास साप्ताहिक ने अपने दिसंबर के अंक में ही लोगों को बता दिया था कि इन सर्दियों में हिमाचल सरकार लोगों को तगड़ा बिजली का करंट लगाने जा रही है और यह बात अब सर्दी बीत जाने के बाद सत्य साबित हो रही है। हिमाचल जैसे गरीबबाहुल्य ग्रामीण प्रांत में लोग पांच रुपए 36 पैसे प्रति युनिट बिजली खरीदने की ताकत नहीं रखते हैं और अब 125 युनिट फ्री बिजली सुविधा के कोई मायने नहीं रह गए हैं। हलांकि सरकार ने कहा था कि फ्री बिजली प्राप्त करने वालों पर कोई अतिरिक्त खर्चा नहीं लगाया जाएगा और यह बात भी अब झूठी साबित हो रही है।
     हिमाचल प्रदेश में बिजली के बिल पर लगाए गए मिल्क सेस व पर्यावरण सेस से सरकार ने करीब 50 से 60 करोड़ रुपए सालाना कमाई करने की उम्मीद लगा रखी है। इससे भी बिजली के बिल काफी अधिक बढ़े हुए आ रहे हैं। सरकार कहती है कि अभी 125 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं पर इसे नहीं लगाया है। लेकिन सरकार इस बात को छुपा रही है कि लाखों बिजली के मीटरों में से कुल कितने मीटरों पर उसने 125 यूनिट फ्री बिजली का लाभ दिया है। इस श्रेणी में लाखों उपभोक्ता तो इस बात से ही बाहर हो गए हैं कि एक ही मीटर पर उपभोक्ता को फ्री बिजली मिलेगी वह भी केवाईसी करवाने की शर्त पर। हलांकि केवाईसी पूरी तरह से असंवैधानिक कृत्य है। सरकार किसी भी उपभोक्ता से केवाईसी करवाने के लिए जबरन उसके मोबाइल नम्बर देने की मांग नहीं कर सकती है। क्योंकि उपभोक्ता को मोबाइल सरकार ने नहीं दिया है।
     हिमाचल सरकार ने विधानसभा के मॉनसून सत्र में ही विद्युत शुल्क संशोधन विधेयक को पारित करवा लिया था। इस बिल को राज्यपाल से भी मंजूरी भी मिल गई थी और इसे अधिसूचित भी किया जा चुका था। अधिसूचना जारी होने के साथ ही यह प्रदेश के लोगों पर बिजली का बिल बढ़ाने वाला अधिनियम लागू हो गया था। अब तो लोग इस बिल के करंट को महसूस कर रहे हैं। उपभोक्ताओं को अब बढ़ी हुई दरों के साथ बिजली के बिल में मिल्क सेस व पर्यावरण उपकर भी देना पड़ रहा है। पर्यावरण उपकर लघु उद्योगों को 0.02 पैसे प्रति यूनिट, मध्यम उद्योगों को 0.04 पैसे प्रति यूनिट, बड़े उद्योगों को 0.10 पैसे प्रति यूनिट, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को 0.10 पैसे प्रति यूनिट, अस्थायी कनेक्शन पर दो रुपए प्रति यूनिट, स्टोन क्रशरों से दो रुपए प्रति यूनिट की राशि वसूल की जा रही है।
     अब प्रदेश में जीरो बिल कुछ हजार लोगों के आए होंगे तो कहा नहीं जा सकता लेकिन लाखों लोगों को नई दरों पर बिल भुगतान के लिए आ रहे हैं। लोग पिछली जयराम सरकार को याद कर रहे हैं जिनके कार्यकाल में लोगों ने जीरो बिल की मौज को लिया है। बढ़ी हुई बिजली की दरें यहीं समाप्त नहीं हुई हैं अगले वित्तीय वर्ष में सरकार जब बिजली की दरों को बढ़ाएगी तो प्रदेश के चुनाव सिर पर होंगे ऐसे में बिजली के बिल पर ही सुक्खू सरकार को सत्ता से बेदखल होना पड़ सकता है।

 
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