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नीट पेपर लीक मामले को लेकर
सीबीआई कोर्ट में
अदालत में 94 पेत की चार्जशीट दाखिल हुई...
जिस नीट पेपर लीक मामले को लेकर देश के छात्रों
में उबाल मचा हुआ है। इस मामले को लेकर शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान का
इस्तीफा तक हो चुका है। अब यह नीट पेपर लीक का मामला जेन-जी का बड़ा आंदोलन बन
चुका है। अब इस मामले में अदालती कार्यवाही भी शुरू हो गई है। सीबीआई ने नीट
पेपर लीक मामले में जांच करके कुछ तथ्य अदालत के सामने रखे हैं।
अब बताया जा रहा है कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने
पहले रची गई थी। नीट के एक्सपर्ट्स ने पेपर तैयार करने के दौरान ही सवाल याद कर
लिए थे। सीबीआई ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट
में यह दावा किया है। देश भर में लोगों को इस बात को जानने की जिज्ञासा है कि
नीट पेपर लीक के पीठे कौन कौन लोग थे। यह मामला छात्रों के लिए आफत कैसे बन गया।
सीबीआई ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर
खामियां सामने आने का दावा किया है। 94 पेज की चार्जशीट में एजेंसी ने कहा है
कि एनटीए के गोपनीय सेक्शन में विशेषज्ञों की जांच और तलाशी की व्यवस्था नहीं
थी। यहां तक कि इस सेक्शन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग लाइव-फीड
सीसीटीवी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम भी नहीं था। चार्जशीट 28 जुलाई को दाखिल की गई
थी। इसकी जानकारी पिछले दिनों सामने आई है।
इसके मुताबिक, एक्सपर्ट्स एनटीए ऑफिस से होटल लौटकर याद किए गए सवाल पर्चियों
पर लिखते थे। इसके बाद इन्हें बिचौलियों और कोचिंग नेटवर्क के जरिए छात्रों तक
पहुंचाया जाता था। चार्जशीट के मुताबिक यह मामला विभाग के अधिकारियों की
लापरवाही का मामला लगता है। मामले में सीबीआई गहनता से साक्षय जुटाने में लगी
है ताकि दोषियों को सलाखों के पीछे डाला जा सके।
याद रहे कि नीट पेपर लीक होने के कारण कुछ छात्रों ने आत्महत्या कर ली थी और
इसका परिणाम यह निकला की छात्र सड़कों पर निकले और केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र
प्रधान के इस्तीफे की मांग कर दी। आंदोलनकारी छात्रों की मांग यह है कि उन बच्चों
के परिजनों को एक करोड़ रुपए का कंपनसेशन दिया जाए क्योंकि मां-बाप ने जहां अपने
बच्चे खोए हैं वहीं वह लाखों रुपए के कर्जे के नीचे दब गए हैं। सरकार ने पहले
इस मांग को मान लिया था बाद में मुकर गई। अब कहते हैं इस पर फिर से विचार हो रहा
है।
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