वोटर लिस्ट
नए सिरे से बनाने की तैयारी कर लेनी चाहिए
असंवैधानिक चुनाव करवाने से बचना चाहिए...
विशेष संवाददाता
शिमला : हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार को प्रदेश
में निकाय चुनावों के लिए वोटर लिस्टों को नए सिरे से बनाने का कार्य शुरू करवा
देना चाहिए। ताकि प्रदेश में अब निकाय चुनाव असंवैधानिक तरीके से संपन्न न
करवाए जाएं।
पिछले करीब दो दशकों से जो वोटर लिस्ट चुनावों में उपयोग में लाई जा रही है उसे
नए सिरे से बनाने का कार्य नहीं हुआ है। बीएलओ नियुक्त नहीं किए जाते हैं या वह
अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं। वह घर घर जाकर वोट नहीं बना रहे हैं।
जल्दबाजी में पुरानी लिस्ट को ही कट पेस्ट करके जबरन तैयार कर लिया जाता है।
बाकि मतदाताओं को तहसील या जिलाशीश कार्यालय में बुलाकर वोटर लिस्ट में नाम
शामिल करने की अपील कर दी जाती है।
नतीजा यह निकलता है कि चुनाव लड़ने के इच्छुक नेता 400-500 वोट बनवा लेते हैं और
मतदान के बाद वही विजयी घोषित हो जाते हैं। वैसे भी आजकल हरियाणा, दिल्ली और
महाराष्ट्र के चुनावों में सबसे बड़ा मुद्दा राहुल गांधी ने वोटर लिस्ट को ही
बना रखा है, जिसमें शंका व्यक्त की जा रही है कि एक ही भवन में सैकड़ों वोट बनवा
लिए जाते हैं। हिमाचल में इस प्रकार का कार्य पिछले कई वर्षों से होता चला आ
रहा है। अब इस बात को हिमाचल में फिर से न दोहराया जाए इसके लिए समय रहते बीएलओ
को घर घर भेजकर वोटर लिस्ट को नए सिरे से बनवा लिया जाना चाहिए।
वोटर लिस्ट को देखकर ही साफ पता चल जाता है कि बीएलओ ने घर घर जाकर वोट नहीं
बनवाए हैं। क्योंकि एक ही परिवार के वोट एक साथ नहीं पाए जाते हैं। कोई कहीं
पाया जाता है तो कोई कहीं दूर। यदि बीएलओ घर घर जाकर वोट बनवाएंगे तो सभी वोट
एक क्रम में मिलेंगे। साथ ही किसी एक स्थान पर हजारों वोट बनवाने के लिए लोगों
को एकत्र नहीं करना पड़ेगा। साथ ही जाली वोट बनवाकर चुनाव जीतने वालों पर भी
अंकुश लगेगा।
अभी पंचायती और निकाय चुनावों में काफी समय है और यदि सरकार चाहे तो समय रहते
मतदाता सूची को संवैधानिक तरीके से बनवा सकती है। साथ ही सरकार को यह भी तय कर
लेना चाहिए कि निगम चुनाव पार्टी के निशान पर नहीं होंगे, क्योंकि यह संस्थाएं
विधायिका की श्रेणी में नहीं आते हैं। सरकार को यह बात भी सुनिश्चित कर देनी
चाहिए कि मतदान बैलेट पेपर से ही होंगे। यदि चुनाव ईवीएम से होंगे तो उसमें
वीवीपेड मशीन को लगाया जाएगा। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि बिना
वीवीपेड के ईवीएम मशीन अधूरी है। सरकार को चाहिए कि नगर निगम, जिला परिषद, नगर
पंचायतों, ब्लाक समिति और पंचायतों के चुनाव प्रदेश सरकार द्वारा बनाए गए
अधिनियम और संविधान के अनुसार ही हों। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो फिर इन
चुनावों को दादागिरीपूर्ण तरीके से करवाए चुनाव ही कहा जाएगा।
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