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परमवीर चक्र संजय
कुमार एक नई जंग के लिए तैयार
चिट्टे के खिलाफ अपनी सेवाएं देंगे कैप्टन संजय...
भारतीय सैन्य इतिहास के हीरोस में शामिल परमवीर
चक्र विजेता सूबेदार मेजर संजय कुमार नए संकल्प के साथ सेना से सेवानिवृत्त हो
गए हैं। अब वह हिमाचल में चिट्टे के खिलाफ चल रही जंग में शामिल होंगे और
युवाओं में देश सेवा का जज्बा पैदा करेंगे। उन्होंने लगभग 29 साल और 8 महीने तक
देश की सेवा की है।
सेवानिवृत्ति के बाद संजय कुमार एक नई जंग के लिए तैयार हैं। उनका मानना है कि
फौजी कभी रिटायर नहीं होता, सिर्फ कार्यक्षेत्र बदलता है। उनकी सेवानिवृत्ति के
बाद की योजना राष्ट्र निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उनका
अगला लक्ष्य भावी पीढ़ी को नशे के चिट्टे (सिंथेटिक नशा) के जहर से बचाना है।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की है कि वह अपने बच्चों पर विशेष ध्यान दें।
परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार के सैन्य सफर की शुरुआत कोलकाता में हुई थी।
इसके बाद उन्होंने श्रीनगर की चुनौतीपूर्ण वादियों में दो साल का कठिन कार्यकाल
पूरा किया। श्रीनगर से वह सीधे द्रास सेक्टर पहुंचे, जहां उन्होंने न केवल
अदम्य साहस दिखाया। बल्कि पाकिस्तानी घुसपैठियों को पस्त कर विजय प्राप्त की।
उन्होंने भारतीय सेना के सर्वोच्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मनित किया जाना ही
इस बात का परिचय है कि उन्होंने रण में जो वीरता दिखाई है वह यकीन करने से भी
परे है। वर्तमान में वह पुणे स्थित नेशनल डिफेंस अकादमी में भविष्य के जांबाज
तैयार कर रहे थे।
हिमाचल सरकार ने भी अब विकट परिस्थितियों को देखते हुए कड़े फैसले लेने शुरू कर
दिए हैं। हिमाचल में कोई भी सरकारी कर्मचारी यदि चिट्टे की तस्करी या रैकेट में
पकड़ा गया तो बिना जांच के ही बर्खास्त हो जाएगा। राज्य सरकार के कार्मिक विभाग
ने सभी महकमों के लिए एक अलर्ट जैसा निर्देश निकला है। इसमें चेतावनी है कि
सरकारी कर्मचारी ऐसी गतिविधियों से दूर रहें। नए निर्देशों में कहा गया है कि
गवर्नमेंट सर्वेट के लिए सीसीएस सीसीए रूल्स के रूल 19 में पहले से विशेष
प्रावधान है कि अति गंभीर अपराधों के मामले में बिना किसी जांच के भी डिस्मिसल
हो सकता है। इसी प्रावधान को अब हिमाचल में सरकार ने लागू किया है। बर्खास्तगी
की इस प्रक्रिया का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 311 में भी है।
हिमाचल में चिट्टे के कारण हालात इतने खराब हैं कि पुलिस कर्मी तक चिट्टा बेचते
हुए पाए गए हैं। कई सभ्रांत परिवार के लोग चिट्टा तस्करी में शामिल पाए गए हैं।
इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए राज्य के कार्मिक विभाग ने सभी प्रशासनिक
सचिवों और विभाग अध्यक्षों को निर्देश जारी किए हैं। अब सभी गवर्नमेंट सर्वेट
के मामले में भी यही कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। कार्मिक विभाग ने सभी
विभागों को कहा है कि अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को इस बारे में अवगत करवा दें
ताकि सभी के ध्यान में रहे।
परमवीर चक्र विजेता संजय कुमार सेवानिवृति के बाद कैप्टन हो जाएंगे। ऐसे में
कैप्टन संजय कुमार का चिट्टे के खिलाफ जंग में उतरना उतना ही महत्वपूर्ण है
जितना सरहद पर जंग लड़ना। इसका कारण यह है कि देश के इतने युवा सरहद पर शहीद
नहीं हुए जितना चिट्टे के कारण उन्होंने अपनी जान गंवा दी। इसलिए अब इस
चुनौतीपूर्ण जंग में कैप्टन संजय कुमार के उतरने से जहां युवाओं का मनोबल बढ़ेगा
वहीं लोगों में भी इस जहर के प्रति लड़ने में एक क्रांति आएगी। कैप्टन संजय
कुमार का प्रभाव न केवल हिमाचल तक ही सीमित रहेगा बल्कि वह पंजाब, हरियाणा,
उत्तराखंड और दिल्ली में भी चिट्टे के खिलाफ काफी प्रभावी रहेंगे। दुनियां भर
में कैप्टन संजय कुमार का जो सम्मान है उसे युवा पीढ़ी को बचाने के लिए वह स्वयं
आगे आ रहे हैं। इसके लिए वह हार्दिक बधाई के पात्र भी हैं। इससे आम जनता में भी
चिट्टे के खिलाफ जंग और अधिक आक्रामक हो जाएगी और सभी लोग इससे जुड़ने का प्रयास
करेंगे।
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