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विनय को चुनौती मिली

विशेष संवाददाता

     शिमला : सिरमौर के विनय कुमार हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष बन गए हैं। उन्हीं के नेतृत्व में अब कांग्रेस पार्टी प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों में उतरेगी। उनके समक्ष चुनौती यह है कि लंबे समय से प्रदेश में कांग्रेस का संगठन बन ही नहीं पाया है। वह पहले संगठन बनाएंगे फिर पार्टी को विधानसभा चुनाव में उतारेंगे।
     सिरमौर के रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनय कुमार ने हिमाचल विधानसभा के स्पीकर कुलदीप पठानिया को अपने पद से त्यागपत्र सौंपा दिया था। उनका इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने मंजूर भी कर लिया। मुख्यमंत्री सुक्खू पहले ही दलित वर्ग से पार्टी अध्यक्ष बनाने की वकालत कर चुके थे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी विनय के नाम पर सहमती जता दी थी।
     माना जा रहा था कि कांग्रेस का प्रदेशाध्यक्ष शिमला संसदीय क्षेत्र से हो सकता है। इसका कारण यह था कि मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री जब निचले हिमाचल से बनाया गया है तो क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए ऊपरी हिमाचल से किसी को प्रदेशाध्यक्ष बनाया जा सकता है। तभी ठियोग के विधायक कुलदीप राठौर और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर का नाम लिया जा रहा था। जब मुख्यमंत्री ने किसी दलित को प्रदेशाध्यक्ष बनाने की बात छेड़ी तो बात विनय कुमार पर आकर रुक गई। अब प्रदेश में सरकार को रिपीट करने की जिम्मेदारी भी मुख्यमंत्री और प्रदेशाध्यक्ष पर आ गई है।
     प्रदेश के लोगों की नजर इस बात पर लगी है कि वह कांग्रेस सरकार को प्रदेश में रिपीट करवाने के लिए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह के साथ मिलकर कैसी टीम का चयन करते हैं। देखा जाए तो प्रदेश में कांग्रेस चारों दिशाओं में बंटी हुई है और उसमें एकता लाने के लिए नए प्रदेशाध्यक्ष क्या कदम उठाते हैं। उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि वह प्रदेश में मौजूद वीरभद्र गुट और सुक्खू गुट में कैसे तालमेल बिठाते हैं। चुनौती कड़ी है देखते हैं अब कांग्रेस में क्या होता है।

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