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ईरान युद्ध में अमेरिका ने अपने हाथ जला लिए ट्रंप का अनुमान गलत साबित हो गया ईरान के सामने... विशेष संवाददाता
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामनेई को मारने के बाद यूएस प्रेजिडेंट ट्रंप ने कहा था कि ये लड़ाई ज्यादा दिन तक नहीं चलेगी। ईरान के लोग अब आजाद हैं। उन्हें अब नई सरकार चुनने की आजादी है, लेकिन हुआ इसके ठीक उल्ट। खामनेई की शहदत के बाद ईरान ने दुगनी गति से अमेरिकी ठिकानों को नेस्तानाबूद करना शुरू कर दिया। अब तो भारी संख्या में अमेरिकी सैनिक इस युद्ध में मारे जाने लगे हैं। ईरान का भीष्ण आक्रमण इजराइल और खाड़ी देशों पर जारी है। ट्रंप के अनुमान के अनुसार खामनेई की मौत के बाद लोग भारी संख्या में सरकार बनाने के लिए सड़कों पर नहीं उतरे। उन्हें अपने लीडर को खोने का दुख था। अब अमेरिका द्वारा ईरान की टॉप लीडरशिप की खात्मे और रिजीम चेंज वाली पॉलिसी धरी की धरी रह गई है और अमेरिका की चिंता इस युद्ध से पीछे हटने की हो गई है। अमेरिका चाहता है किसी तरह युद्ध विराम हो लेकिन यह भी संभव नहीं हो पा रहा है। अली खामनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामनेई ईरान के नए सुप्रीम लीडर बने हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, यूएस प्रेजिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के टॉप सलाहकार और नेशनल इकोनॉमिक काउंसिल के डायरेक्टर केविन हैसेट ने कहा कि 28 फरवरी को इजरायल के साथ जॉइंट स्ट्राइक शुरू करने के बाद से यूनाइटेड स्टेट्स ने ईरान के खिलाफ युद्ध पर लगभग 12 बिलियन अमेरिकी डालर खर्च किए हैं। खर्च का यह आंकड़ा ऐसे समय में आया है, जब वाशिंगटन में मिलिट्री कैंपेन के खर्च और लक्ष्यों को लेकर सवाल बढ़ रहे हैं। कुछ सांसदों ने लड़ाई की दिशा को लेकर भी चिंता जताई है। डेमोक्रेटिक लीडर चक शूमर ने कह रहे हैं कि वह युद्ध को लेकर चिंतित हैं। एडमिनिस्ट्रेशन की आलोचना करते हुए वह कहते हैं कि यूनाइटेड स्टेट्स ने बिना किसी अनुमान सजेशन के युद्ध के मैदान की ओर हाथ बढ़ा लिए। अमेरिका में अब खर्च और युद्ध को लेकर बढ़ी चिंता है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले शुरू होने के बाद से ईरान में 1,400 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। तेरह यूएस सैनिक भी मारे गए हैं और 140 से ज्यादा घायल हुए हैं। यूएस के डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ का भी बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ईरान पर हमले और भी ज्यादा आक्रामक हो सकते हैं, इसका मतलब ये है कि ऑपरेशन का खर्च और ज्यादा बढ़ सकता है। उधर नवंबर माह में अमेरिका में मध्यावधि चुनाव भी होने है इसमें ट्रंप को बड़ा झटका भी लग सकता है। अमेरिका में जब सरकारी लोग ही ट्रंप के खिलाफ बोल रहे हैं तो फिर जनता की क्या प्रतिक्रिया हो सकती है इसका अंदाजा वहां सड़कों पर उतरे लोगों से लगाया जा सकता है। जब युद्ध के समय पूरा राष्ट्र अपने सुप्रीम लीडर के पीछे खड़ा रहता है लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं हो रहा है। अमेरिका के साथ खड़े मित्र देशों ने भी इस युद्ध में अमेरिका का साथ देने से इंकार कर दिया है। कहा जा सकता है कि डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्ध में अमेरिका को ले जाकर अपने हाथ जला लिए हैं और इसका उन्हें कोई लाभ भी नहीं हुआ। |
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