सुक्खू ने जयराम पर किया
एतिहासिक प्रहार
जयराम की हर बात
का जवाब देना जरूरी नहीं : सुक्खू
विशेष संवाददाता
शिमला : पिछले दिनों मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष जयराम
ठाकुर पर एतिहासिक कड़ा प्रहार करते हुए कह दिया कि ऐसा हिमाचल के इतिहास में
कभी नहीं हुआ है। नेता प्रतिपक्ष की हर बात का जवाब देना जरूरी नहीं है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा है कि जयराम ठाकुर बिना तथ्यों के बात करते हैं।
उनकी हर बात का जवाब देना वह जरूरी नहीं समझते हैं।
पूर्व में जयराम ठाकुर जिस प्रकार बयान देते रहे हैं और उनके बयान जमीन पर धड़ाम
से गिरे रहे हैं शायद इसलिए मुख्यमंत्री ने अब उनके बयान को हल्का साबित करने
जैसा बयान दिया है। मुख्यमंत्री के बयान के बाद सत्तापक्ष के राजनैतिक हल्कों
में यह चरचा तेज हो गई है कि नेता प्रतिपक्ष के बयान को अब कोई गंभीरता पूर्वक
नहीं ले रहा है। पिछले वर्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की पूर्णबहुमत सरकार को
गिराने का जो विफल प्रयास किया और बेतुकी बयानबाजी की उससे उनकी विश्वसनीयता को
धक्का लगा है।
कहते हैं जयराम ठाकुर के गलत फैसले के कारण नौ विधायकों को सदन से बाहर का
रास्ता दिखा दिया गया। इनमें से पांच को तो अपने घर जाकर बैठना पड़ा है। प्रदेश
सरकार को पलटने के जैसे बयान वह लंबे समय से देते चले आ रहे थे, जो बाद में
औंधे मुहं गिरे हैं। अब जयराम ठाकुर के निर्णयों की समीक्षा उनकी पार्टी के
भीतर भी होने लगी है और पार्टी के भीतर पुराने नेता बगावती सुर में बात कर रहे
हैं। कहा जा सकता है कि जयराम ठाकुर के बयान सिर्फ सरकार का विरोध करने के लिए
सामने आते हैं और उनका कोई संतोषजनक परिणाम नहीं निकलता है।
अब तो मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी समय की नज़ाकत को देखते हुए कह
दिया कि उनकी सरकार जनहित के फैसले कर रही है जबकि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर
किसी भी मामले को राजनीतिक तूल देने का प्रयास करते रहते हैं, जिसे अब वह
गंभीरता से नहीं लेते हैं। मुख्यमंत्री ने हाल ही में यह बात नेता प्रतिपक्ष
जयराम ठाकुर के मंदिरों के धन के इस्तेमाल को लेकर दिए गए बयान के जवाब में कही
है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने का
प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री कांग्रेस भवन में हिमाचल प्रभारी से होने वाली
मीटिंग से पहले मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ शब्दों में कहा है कि जयराम ठाकुर के बयान को ज्यादा
गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए, वह समय समय पर ऐसे बयान देते ही रहते हैं।
राजनैतिक गलियारों में अब यह चरचा भी जोर शोर से छिड़ गई है कि नेता प्रतिपक्ष
जयराम ठाकुर को सरकार की आलोचना करते हुए ऐसे बयान देने चाहिए जो लंबे समय तक
धरा पर टिक सकें। उन्होंने पहले प्रदेश की जनता को यह बताना चाहिए कि उन्होंने
नौ विधायकों को विधानसभा से बाहर करवाकर क्या हासिल कर लिया। जबकि नौ विधायक
अपने स्तर पर सुक्खू सरकार को घेरने का काम ही कर रहे थे, जिसमें से चार चुनाव
जीतकर तो वापस आ गए लेकिन उनकी जुबान पर भी अब भाजपा का ताला लटक गया है।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री ने जिस प्रकार नेता प्रतिपक्ष की बातों को गंभीरता से न
लेने की बात कही है वह बहुत बड़ी है जबकि नेता प्रतिपक्ष को यह दावा करना चाहिए
कि उन्होंने अपने तर्कों से सरकार को कौन से कानून को थोपने से रोकने में सफलता
हासिल की है। उन्हें चुटकलों जैसे बयानों से बचना चाहिए। उन्हें ध्यान रखना
चाहिए वह सरकार के खिलाफ भी गुणात्मक आलोचना को सामने लाएं। वह पार्टी के
समझदार नेताओं से सलाह भी ले सकते हैं। वरना कहीं ऐसा न हो कि दो साल बाद
मुख्यमंत्री की जो कुर्सी उनके हाथ आने की उम्मीद है वह भी चली जाए।
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