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सोलन ने हिमाचल को राष्ट्रीय
पटल पर टॉप में पहुंचाया
प्रति व्यक्ति आय में सोलन के
आसपास कोई नहीं...
सोलन के लोगों ने हिमाचल प्रदेश को सबसे अमीर
राज्य की श्रेणी में ला खड़ा किया है। प्रति न्यक्ति आय में सोलन जिला हिमाचल
में ही टॉप स्थान पर नहीं है बल्कि सोलन जिला में प्रति व्यक्ति आय के अधिक होने
के कारण समूचा हिमाचल राष्ट्रीय औसत आय में भी बहुत आगे निकल गया है। इसका सबसे
बड़ा कारण है कि समूचे देश का हिमाचल के प्रति लगाव। लोगों की मंशा सिर्फ हिमाचल
में धूमने के लिए आने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि लोग यहां पर बसने के लिए आतूर
रहते हैं। प्रति व्यक्ति आय में हिमाचल की राजधानी शिमला हिमाचल के सबसे छोटे
जिला लाहुल स्पिति और सबसे पिछड़े सिरमौर से भी पीछे है।
मजेदार बात यह है कि सोलन जिला को टॉप पर लाने में यहां के राजनेताओं का कोई
विशेष योगदान नहीं है। बल्कि कड़वा सत्य यह है कि सोलन जिला से अर्जित आय का नाम
मात्र हिस्सा भी सोलन जिला के विकास पर खर्च नहीं किया जाता है। यूनाइटेड नेशनज
डिवेलपमेंट प्रोग्राम (यूएनडीपी) की ह्यूमन डिवेलपमेंट रिपोर्ट ने आर्थिक मोर्चे
पर हिमाचल के रोल और अचीवमेंट पर भी फोकस किया है। छोटा पहाड़ी राज्य हिमाचल लंबे
अरसे से प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर देश भर में उल्लेखनीय स्थान पर है।
हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। वर्ष 2024-25 में
हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय 2,57,512 रुपए दर्ज की गई। यह पिछले वित्त वर्ष के
मुकाबले 9.6 फीसदी अधिक है, जबकि देश की प्रति व्यक्ति आय 2,34,859 रुपए है।
हिमाचल की सरकारों का प्रदेश को डुबोने में पूरा योगदान रहा है। हिमाचल में
सरकार तो कर्जा लेकर चलाई जाती है लेकिन यहां के मेहनतकश लोग अपनी आय को बढ़ाकर
प्रदेश की नाक कटवाने से हमेशा बचाते आए हैं। हिमाचल की प्रति व्यक्ति आय का यह
उल्लेखनीय आंकड़ा बागवानी, निर्माण यानी कंस्ट्रक्शन, सर्विस सेक्टर जैसे पर्यटन
आदि के कारण है। हिमाचल का किसान, बागवान, कर्मचारी और युवा कमर तोड़ मेहनत करके
हिमाचल को राष्ट्रीय मानचित्र पर चमकाए रखने के प्रयास में जगा रहता है।
शिमला जिला का स्थान पांचवां है। वहीं कांगड़ा जिला प्रति व्यक्ति आय के हिसाब
से अंतिम पायदान पर है। इसका एक कारण कांगड़ा की आबादी भी है। हिमाचल में सोलन
टॉप पर इसलिए है क्योंकि यहां उद्योग के साथ-साथ टमाटर, बेमौसमी सब्जियां,
स्टोन फ्रूटस और मशरूम उत्पादन भी है। सोलन के दुकानदारों और व्यापारियों का भी
यहां की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान है। प्रति व्यक्ति आय के
विभिन्न कारक होते हैं। उनमें जनसंख्या घनत्व, उद्योग के स्तर, पर्यटकों की आमद
के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच शामिल है।
मानव विकास सूचकांक रिपोर्ट 2025 में ये आंकड़े सामने आए हैं। जिलावार प्रति
व्यक्ति आय का आंकड़ा वर्ष 2022-23 का है। इन आंकड़ों पर नजर डालें, तो सोलन जिला
सबसे आगे है। दिलचस्प बात यह है कि सोलन के साथ ही इस सूची में लाहुल और
किन्नौर जिलों का नाम आते हैं। इनकी समृद्धि का प्रमुख कारण कम जनसंख्या घनत्व
होना है। यहां के लोगों का दुर्गम क्षेत्र में रहने के बावजूद कृषि उत्पादन में
सराहनीय योगदान है। अंतराष्ट्रीय बाजारों में यहां के उत्पादों की मांग अधिक
है। हलांकि यहां कोई चमत्कारी नेता पैदा नहीं हुए हैं जो लोगों की आर्थिक स्थिति
को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाते।
सोलन जिला की प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2022-23 में आठ लाख रुपए प्रति
व्यक्ति आंकी गई है। सोलन के बाद लाहुल-स्पीति है जहां प्रति व्यक्ति आय तीन
लाख रुपए है। इसी प्रकार सिरमौर जिला की प्रति व्यक्ति आय अढ़ाई लाख रुपए से कुछ
अधिक है। किन्नौर का आंकड़ा भी सिरमौर जिला के करीब ही है। पांचवें नंबर पर शिमला
जिला है जहां का आंकड़ा दो लाख रुपए के करीब है। फिर कुल्लू, ऊना, बिलासपुर, चंबा,
मंडी, हमीरपुर व कांगड़ा का स्थान है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि हिमाचल में
मिश्रित अर्थ व्यवस्था ही इसे जिंदा रखे हुए है।
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