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बिहार चुनाव हो गया,  बवाल जारी

बिहार की तरह बंगाल में ज्ञानादेश लाना कठिन...

विशेष संवाददाता

     शिमला : बिहार चुनाव हो गए, नितीश कुमार भी मुख्यमंत्री बन गए लेकिन राजनैतिक और एसआईआर का बवाल अभी भी जारी है। बिहार चुनाव की शुरुआत चुनाव आयोग की विवादास्पद एसआईआर करवाने की घोषणा के साथ ही हो गई थी।
     भयंकर विवाद के बाद नितीश फिर से मुख्यमंत्री बन गए हैं और मामला विधानसभा अध्यक्ष को लेकर फंस गया है। टकराव में नितीश कितने दिनों तक मुख्यमंत्री रहते हैं यह समय बताएगा। फिलहाल चुनाव परिणाम में ज्ञानादेश के अनुसार एनडीए गठबंधन को मिली 200 से अधिक सीटों को लेकर बवाल मचा हुआ है। बिहार चुनाव में कुल 243 में से अकेले भाजपा को 89, नितीश कुमार की जेडीयू को 85, चिराग पासवान की एलजेपी को 19, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा को 5, राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4, तेजस्वी यादव की आरजेडी को 25, कांग्रेस को 6, कम्युनिष्ट पार्टी को 3, ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम को पांच और अन्य को 2 सीटें मिली हैं।
     इस ज्ञानादेश से साफ जाहिर है कि यहां पूर्ण बहुमत किसी के पास नहीं है और नए नए बवाल समय समय पर उठते रहेंगे। बिहार के बाद अब बंगाल चुनाव को लेकर भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लगातार निशाने पर बने हुए हैं। उन पर विपक्षी पार्टियों और कई राजनैतिक पंडितों ने चुनाव में धांधली करने के आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर इसकी चरचा है और सबूत होने का दावा भी किया जा रहा है।
     ज्ञानादेश के आरोपों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि उसे बयान करने पर एक किताब लिखी जा सकती है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लगने वाले तमाम आरोप आम जनता के बीच हैं। कहते हैं उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ मिलकर वोट चोरी का खेल किया है। ताजा ताजा बिहार इस वोट चोरी का शिकार हो गया है। आरोप यह भी है कि इससे पहले हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली में भी चुनाव आयोग ने केन्द्र की भाजपा सरकार के लिए उसके सहयोगी के तौर पर काम किया है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में चुनाव आयोग पर लगे लगभग सभी आरोप दर्ज हैं।
     अब बिहार में एक ओर जहां नितीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने वाला एनडीए गठबंधन भीतर से सुलग रहा है वहीं इंडिया गठबंधन बिहार को लेकर वोट चोरी की गतिविधियों को यहीं पर दफन कर देने की रणनीति पर कार्य करने लगा है। वोट चोरी पर बवाल फिलहाल थमने वाला नहीं है और चुनाव आयोग की गर्दन इस मुद्दे से छूटने वाली भी नहीं है। क्योंकि कहते हैं कि वोट चोरी का अगला रणक्षेत्र पश्चिम बंगाल बनाने जा रहा है और यहां बिहार से अधिक बवाल खड़ा हो चुका है। इसका कारण यह है कि बिहार में तो नितीश कुमार के नाम पर भाजपा राज्य सरकार को चला रही थी लेकिन बंगाल में ममता बनर्जी की पूर्णबहुमत सरकार चल रही है और वोट चोरे के लिए इस्तेमाल में आने वाले अधिकारियों के सभी पद ममता बनर्जी के कड़े नियंत्रण में हैं।
     यहां इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि चुनाव आयोग में बैठे अधिकारी बंगाल में भी जनादेश को पछाड़कर ज्ञानादेश का परचम लहराने का प्रयास करेंगे। इसके लिए चुनाव आयोग अगल तिकड़में लड़ा सकता है। बंगाल में एसआईआर से वोट घटा बढ़ाकर कुछ करने का प्रयास किया जा सकता है। ऐसा किए बिना बंगाल में भाजपा की सरकार बनाना शेर के जबड़े से गोश्त छीनने जैसा ही होगा।

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