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योगी को निपटाने के चक्‍कर में शंकराचार्य

अब अल्‍टीमेटम के 40 दिन में मुख्‍यमंत्री क्‍या करेंगे...

विशेष संवाददाता

     शिमला : कहीं शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ को निपटाने के चक्कर में तो नहीं आ गए हैं। माघ माह में गंगा स्नान में व्यवधान से शुरू हुआ विवाद अब गौ हत्या के खिलाफ कानून बनाने तक पहुंच गया है।
     यह सभी को विदित है कि प्रयागराज प्रशासन ने शंकराचार्य को माघ के गंगा स्नान से वंचित कर दिया। शंकराचार्य अपनी पालकी सहित गंगा के छोर तक जाना चाहते थे लेकिन उन्हें बलपूवर्क रोक दिया गया। यह सारी घटना देशवासियों को पता है। इसके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानने से ही इंकार कर दिया गया। अब लगता है शंकराचार्य ने भी योगी आदित्यनाथ को निपटा देने का प्रण ले लिया है और उनके जो वक्तव्य आ रहे हैं वह इसी ओर इशारा कर रहे हैं कि उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे व्यक्ति को नहीं होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने अब 40 दिन का अल्टेमेटम योगी को दिया है कि वह गौ हत्या के खिलाफ कानून लेकर आएं अन्यथा वह 11 मार्च को लखनऊ के संतसमागम में योगी को हटाने का खुला ऐलान कर देंगे। यह बात भी सभी जानते हैं कि भाजपा में रहते हुए योगी के लिए ऐसा कानून लाना संभव नहीं है।
     जिस प्रकार का संवाद शंकराचार्य की ओर से निरंतर जारी है उसे देखते हुए लगता है कि वह देश भर में असली हिन्दू और नकली हिन्दू की पहचान पूरे राष्ट्र को करवा देना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने ने कुरुक्षेत्र भी उत्तर प्रदेश को चुना है जहां कुछ ही महीनों में राज्य विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं।
     यह बात भी तय है कि यदि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के हाथ से असली हिन्दू वोट खिसक गया तो उनकी मठवापसी भी हो सकती है। वैसे भी योगी आजकल राजनैतिक रूप से चारों तरफ से घिरे हुए हैं। मुसलमान तो योगी को पहले से ही पसंद नहीं करते हैं और न ही योगी को मुसलमान पसंद हैं। कहते हैं केन्द्र की मोदी सरकार वैसे भी योगी को निपटाने में लगी हुई है। यही नहीं यूपी के पंडित भी योगी के खिलाफ बयान देने से नहीं चूकते हैं। सोने पे सुहागा यह कि पंडित जी भी अब शंकराचार्य की भाषा बोलने लगे हैं। फिर ईवीएम भी वही भाषा बोलेगी जो केन्द्र सरकार चाहेगी। मतलब उत्तर प्रदेश की राजनीति में योगी आदित्यनाथ बुरी तरह फंस गए हैं।
     गंभीर बात तो यह है कि भाजपा को गौ कत्लखाने भारी भरकम चंदा देते हैं और इन गौ कत्ल खानों के मालिक हिन्दू धन्नासेठ ही हैं। शंकराचार्य ने योगी को जहां हिन्दू के नाम पर धार्मिक पाश में बांध दिया है, वहीं गौ कत्ल खानों को बंद करने की शर्त रखकर भाजपा की आर्थिक कमर तोड़ने का भी प्रश्न खड़ा कर दिया है। शंकराचार्य जहां गऊ को राष्ट्र माता घोषित करने की बात करते रहे हैं वहीं उन्होंने योगी को फांसने के लिए गऊ को राज्य माता का दर्जा दिए जाने की बात अपने 40 दिन के अल्टीमेटम में दे दी है।
     यह मामला अब ऐसा बन गया है कि इससे पीछे न तो शंकराचार्य हट सकते हैं और योगी के लिए शंकराचार्य की बात मानना संभव नहीं लगता है। अब योगी एक राजनेता हैं और शंकराचार्य एक संन्यासी हैं। देखना यह है कि योगी इस पर कौन सी चाल चलते हैं कि वह इन कठिनाइयों को साधने में सफल हो जाएं।

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