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तीन लोकसभा सीटें होंगी हिमाचल में

छोटे राज्‍यों पर पड़ेगी नए परिसीमन की मार...

विशेष संवाददाता

     शिमला : वर्ष 2026 के बाद होने वाले राज्यों की सीटों के परिसीमन में हिमाचल में तीन लोकसभा सीटें रह जाएंगी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में भारत के संविधान में संशोधन करके राज्यों के परिसीमन को 2026 तक टाल दिया था। अब जनसंख्या के आधार पर देश भर में लोकसभा और विधानसभा की सीटों का बंटबारा होगा।
     देश की जनसंख्या का जिस प्रकार से एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन हुआ है इसका असर विभिन्न राज्यों की जनसंख्या पर भी पड़ा है। कुछ राज्यों में जनसंख्या बहुत तीव्र गति से बढ़ गई है और कुछ में कम हो गई है। यूपी, बिहार जैसे जिन राज्यों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है वहां अब लोकसभा और विधानसभा की सीटें बहुत बढ़ जाएंगी जबकि केरल, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे राज्यों में सीटें घट जाएंगी।
     आजादी के बाद पं. जवाहर लाल नेहरू के सरकार ने 1951 में परिसीमन करवाया था। इसके बाद 1961 की जनगणना के बाद फिर पं. नेहरू सरकार ने परिसीमन करवाया था। इसके बाद 1971 की जनगणना के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने जनसंख्या के आधार पर किए जाने वाले परिसीमन को 30 वर्ष के लिए टाल दिया था। अब यह परिसीमन 2001 की जनगणना के बाद होना था। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस संवैधानिक बाद्यता को संविधान संशोधन करके 2026 तक टाल दिया था। ऐसे में जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा की सीटें तो नहीं बढ़ाई गई लेकिन जनसंख्या के आधार पर सीटें जितना संभव था लगभग बराबर जनसंख्या वाली बना दी गई।
     अब मोदी काल में 2026 में लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़नी है और सीटों का परिसीमन होना है। मोदी सरकार ने जिस प्रकार एक नए और बड़े संसद भवन का निर्माण करवाया है, उसे देखकर लगता है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की तरह अब इसको टाला नहीं जाएगा। ऐसे में जिस राज्य में ज्यादा जनसंख्या होगी वहां सीटें बढ़ेंगी और जहां कम होगी वहां घट जाएंगी। ऐसे में देश में बवाल खड़ा होना भी तय है। बड़े राज्यों की हैसियत और बढ़ी हो जाएगी और छोटे राज्यों की हैसियत घट जाएगी।
     परिसीमन पर नजर गढ़ए बैठे विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल और उत्तराखंड में एक एक लोकसभा सीट कम हो जाएगी। इन पहाड़ी राज्यों से बड़ी संख्या में पलायन पिछले 50 वर्षों में हुआ है। ऐसे में यहां विधानसभा सीटें बढ़ेंगी या नहीं अभी कुछ कहा नहीं जा सकता है लेकिन लोकसभा की सीटें कम हो जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। यहां यह भी देखने में आ रहा है कि जिन राज्यों ने परिवार नियोजन पर अधिक ध्यान दिया अब वहां की ही राजनैतिक शक्ति नए परिसीमन में कम कर दी जाएगी। यदि परिसीमन हो गया तो प्रत्यके व्यक्ति मौजूदा राजनीति के हिसाब से खुद अनुमान लगा सकता है कि देश भर में इससे कितना बड़ा राजनैतिक उथल पुथल होगा।

 
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