1st Choice of Indian Politicians

हिन्‍दी साप्‍ताहिक समाचार पत्र

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वोट उसी को जो चंद्रचूड जैसे को राष्‍ट्रपति बनाएगा

     जो राजनैतिक दल या गठबंधन सत्ता में आने पर भारत के मुख्य न्यायधीश डी.वाई. चंद्रचूड जैसे किसी योग्य व्यक्ति को देश का राष्ट्रपति बनाने की गारंटी देगा उसे ही सारे लोग वोट दें। बहुत से लोगों ने इस बात पर अपनी सहमति भी जताई है और इसके लिए उचित समय भी यही बताया है। देश में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि लोगों की तरफ से इस प्रकार की बात चुनावों में कही जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश चंद्रचूड हलांकि अभी मुख्य न्यायधीश के पद पर हैं और अभी उन्हें सेवानिवृत होने में दो तीन माह का समय है। ऐसे में उन्हें राष्ट्रपति के पद पर बिठाए जाने की बात कहना उन्हें सेवानिवृति के बाद किसी पद का प्रलोभन देना जैसा हो जाएगा। इसकी वजह भी स्पष्ट की जा रही है। उनकी भारत के संविधान पर जबरदस्त पकड़ है और उसे अंजाम तक पहुंचाने की कर्तव्यनिष्ठा उन्हें राष्ट्रपति पद तक पहुंचाने के लिए देश की आम साधारण जनता की मनोदशा को व्यक्त करती है।   जारी..

 

इस बार के लोकसभा चुनाव पूरी तरह से साफ सुथरे हो सकेंगे

     भारत वर्ष में आम लोकसभा चुनाव 2024 पूरी तरह से साफ सुथरे होने की आस लगाई जा रही है। कई मीडिया विश्लेषणों में इस बात पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि कहीं ईवीएम मशीन सभी अखबारी विश्लेषणों पर पानी न फेर दे। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में साफ सुथरे और पारदर्शी चुनाव करवाने के लिए एक और जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें कहा गया है कि वीवीपैट से निकलने वाली पर्चियों की सौफीसदी गिनती करवाई जाए। साथ ही वीवीपैट से निकलने वाली पर्ची मतदाता को दी जाए उसके बाद उसे बाॅक्स में डाला जाए। इस याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नेटिस जारी कर रखा है। चुनाव आयोग इसमें क्या डिफेंस लेगा और प्रतिवादी पक्ष इसमें क्या बहस करता है। इस याचिका में आगे क्या होगा अभी से कुछ कहा नहीं जा सकता है। देश भर में सात चरणों के चुनाव शुरू हो चुके हैं। इन चुनावों में यह जनहित याचिका क्या प्रभाव डालेगी, सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं।      जारी...

 

केजरीवाल, मचा बवाल

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद सियासत गरमा गई है। एक तरफ जहां सभी विपक्षी दल मुख्यमंत्री के समर्थन में उतर आए हैं वहीं भाजपा भी हमलावर हो गई है। आप कार्यकताओं ने विपक्षी गठबंधन के साथ मिलकर देशभर में इस गिरफ्तारी का विरोध किया है। उनका उपवास कार्यक्रम जोरों पर है। दिल्ली हाई कोर्ट से उनकी जमानत याचिका खारिज हो जाने के बाद इंडिया गठबंधन इस मामले को लेकर अब बड़े प्रदर्शनों की तैयारी कर रहा है। गिरफ्तारी के दिन आम आदमी पार्टी (आप) के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली सहित विभिन्न प्रांतों में जमकर प्रदर्शन किया। इसके बाद दिल्ली के रामलीला मैदान में केजरीवाल को समर्थन देने इंडिया गठबंधन के लगभग सभी घटक दल वहां पहुंचे थे। हिमाचल जैसे छोटे राज्य में भी आप कार्यकर्ताओं ने मोदी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। देश भर में हुए प्रदर्शन के दौरान कुछ आप नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।         जारी...

 

ममता के सुर इंडिया के साथ नहीं

     जब इंडिया गठबंधन की महारैली दिल्ली के रामलीला मैदान में हो रही थी तभी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बंगाल में कांग्रेस और माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) को भाजपा से मिली हुई बता रही थी। हलांकि ममता बनर्जी के प्रतिनिधि भी दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन को समर्थन देने आए हुए थे। देश के तमाम राजनैतिक पंडित यह अनुमान लगाने में विफल हो रहे हैं कि लोकसभा चुनावों के बाद ममता क्या गुल खिलाएगी। ममता के इस रुझान से यह तस्वीर भी साफ होती चली जा रही है कि बंगाल में भाजपा अपनी 18 सीटों पर फिर से काबिज हो सकती है। यदि भाजपा अपनी पुरानी 18 सीटों से आगे बढ़ती है तो इससे नुक्सान ममता बनर्जी को ही होगा। बंगाल में यदि माकपा और कांग्रेस मिलकर चार-पांच सीटें भी जीत जाएं तो यह उनके लिए बहुत बढ़ी बात होगी। क्योंकि अब वहां मुख्य मुकाबला भाजपा और ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के बीच ही होगा।        जारी...

 

अब हिमाचल प्रदेश में तहस नहस हो सकती है भाजपा

     हिमाचल प्रदेश में अब भाजपा पूरी तरह से तहस नहस हो सकती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि हिमाचल प्रदेश में भाजपा के पास एक भी नेता ऐसा नहीं है जो पहाड़ की राजनीति के दांचपेच को समझ और पकड़ सके। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और प्रदेशाध्यक्ष राजीव बिंदल बस गणेश परिक्रमा तक ही सीमित रह गए हैं। भाजपा राज्यसभा चुनाव से पहले तक अच्छी स्थिति में थीं लेकिन अब वह कांग्रेस के चक्रव्यूह में फंसती चली जा रही है। अब तीन निर्दलीयों के इस्तीफों का मामला ही देख लो जो भाजपा के गले में अटक गया है। भाजपा यह अनुमान नहीं लगा पा रही है कि आजाद विधायकों से इस्तीफे वापस करवाए जाने से लाभ होगा या इस्तीफे स्वीकार करवाने से लाभ मिलेगा। इन विधायकों के इस्तीफे मंजूर होंगे या इनके भी निष्कासन के आदेश विधानसभा अध्यक्ष दे सकते हैं। क्योंकि इन्होंने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने का गुनाह कर लिया है। कांग्रेस ने निष्कासित नेताओं के साथ भाजपा ने कांग्रेस को दोफाड़कर प्रदेश में सत्ता हथियाने का जो स्वपन देखा था वह भी पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।      जारी...

 

कंगना को मंडी संसदीय सीट से टिकट कोई हैरानी नहीं

     फिल्म अभिनेत्री कंगना रणौत को मंडी संसदीय सीट से टिकट मिलना कोई हैरानी की बात नहीं है। ग्रास ने कुछ महीने पहले कंगना को भाजपा की टिकट मिलने की संभावनाओं को जता दिया था। मंडी में सांसद रामस्वरूप के अचानक निधन की खबर के बाद यहां लोकसभा का उप-चुनाव हुआ जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह ने जीत दर्ज की थी। उस समय भी यह कयास लगाए जा रहे थे कि कंगना रणौत को भाजपा मंडी से चुनाव में उतार सकती है। अब इस संसदीय सीट पर तमाम तलबगारों और कार्यकर्ताओं को दरकिनार करते हुए भाजपा हाईकमान ने कंगना रणौत को टिकट थमा दिया है। जाहिर है इससे हिमाचल में बवाल तो खड़ा होना ही था। इसकी मुख्य वजह यह है कि कंगना का हिमाचल में जनसेवा करने का कोई पुराना रिकार्ड नहीं है। उसका हिमाचल में कोई जन संपर्क भी नहीं है। इसके अलावा भी कई आपत्तियां हैं जो कंगना के राजनीति में आने की खबरों के साथ ही उबलनी शुरू हो गई थी और यह लोगों के बीच अब भी जारी है।        जारी...

 

इंदिरा के खिलाफ लड़ने वालों की सम्‍मान राशि नहीं होगी बंद

     आपातकाल के समय इंदिरा गांधी के खिलाफ लड़ने वाले लोगों की सम्मान राशि को मौजूदा सुक्खू सरकार बंद नहीं करवा पाई। पूर्व जयराम सरकार ने लोकतंत्र प्रहरी सम्मान अधिनियम बनाकर यह सम्मान राशि घोषित की थी। इसका उद्देश्य देश में इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लगाए आपातकाल के दौरान जेल अथवा पुलिस थानों में 25 जून, 1975 से 21 मार्च, 1977 के बीच राजनीतिक और सामाजिक कारणों से बंद किए लोकतंत्र प्रहरियों को सम्मान राशि प्रदान करना था। सुक्खू सरकार ने सत्ता में आते ही इस सम्मान राशि को बंद कर दिया था, जिसे हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने फिर से बहाल कर दिया है। प्रदेश सरकार इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को लोकतंत्र प्रहरियों की रोकी गई सम्मान राशि जारी करने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने लोकतंत्र सेनानी संघ हिमाचल प्रदेश की याचिका को स्वीकार करते हुए संघ के सदस्यों को सम्मान राशि जारी करने के आदेश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक सम्मान राशि से जुड़ा कानून प्रभावी है तब तक हिमाचल सरकार इस राशि को नहीं रोक सकती। सरकार ने लोकतंत्र प्रहरियों की सम्मान राशि फरवरी 2023 से रोक रखी है।  जारी

 

पटनायक और भाजपा की पटरी नहीं बैठी

     ओडिशा में भाजपा और बीजेडी नेता नवीन पटनायक के बीच पटरी नहीं बैठ पाई है। अब भारतीय जनता पार्टी ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव अकेले लड़ रही है। भाजपा इस बार लोकसभा की सभी 21 सीटों और विधानसभा की सभी 147 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। यह बंधन टूटना भाजपा के लिए अच्छा नहीं है। बीजेडी को साथ लाकर भाजपा राज्य की सभी सीटों को एनडीए के पाले में लाना चाहती थी लेकिन ऐन वक्त पर बात बिगड़ गई और दोनों ने अलग होने का फैसला ले लिया है। विगत 10 साल से नवीन पटनायक के नेतृत्व में ओडिशा की बीजेडी पार्टी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के अनेक राष्ट्रीय महत्त्व के प्रसंगों में समर्थन देती आई है। देश भर में इस बात की चरचा थी कि पटनायक तो भाजपा के साथ ही जाएंगे। लेकिन अब बात स्पष्ट हो गई है कि दोनों के बीच संबन्धविच्छेद हो गया है। यह भी कहा जा रहा है कि नवीन पटनायक इंडिया गठबंधन के साथ हाथ मिलाकर भाजपा को बड़ा झटका दे सकते हैं।     जारी

 

संपाकीय          चंदे पर गजब की सफाई

     चुनावी चंदे का जिन जिस प्रकार से सुप्रीम कोर्ट ने बाहर निकाला है वह अब आम लोगों के बीच भाजपा की छवि को धवस्त कर रहा है। भाजपा के नेता भी दबे स्वर में इस चुनावी चंदे के जनजाल से बाहर आने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा का अजोबो गरीब तर्क आम जनता के बीच में आया है। भाजपा के नेता कहते हैं कि भाजपा एक बड़ी पार्टी है और उसके सबसे ज्याद सांसद हैं साथ ही कई राज्यों में उसकी सरकारें हैं जाहिर है भाजपा को ही सबसे अधिक चुनावी चंदा मिलना था। जबकि चुनावी चंदे को इस तरह से देखना किसी भी सूरत में उचित नहीं है।
     आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर तेज होती सरगर्मियों के बीच केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इलेक्टोरल बाॅन्ड पर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। वह तर्क देते हैं कि जैसे टीवी जगत में जिनकी टीआरपी ज्यादा होती है उन्हें टीवी पर भी अच्छे रेट पर विज्ञापन मिलते हैं। उसी तरह हम सत्ताधारी दल हैं तो इसलिए हमें ज्यादा चुनावी चंदा मिला। इसी तरह के बयान भाजपा के अन्य नेताओं ने भी चुनावी चंदे को लेकर हो रही फजिहत के बाद दिए हैं। उनकी बात को इसलिए भी सही नहीं माना जा सकता है कि क्योंकि अन्य राजनैतिक दल भी लगभग सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारते हैं और लगभग समान रूप से ही चुनाव प्रचार में पैसा खर्च करते हैं। चुनाव परिणाम तो बाद में ही सामने आते हैं ऐसे में चंदा देने वाले को कैसे पता चल सकता है कि कौन सा दल बड़ा बनकर उभरेगा।  ...जारी

 

नोटबंदी काले धन को सफेद बनाने का जरिया

     भारत सरकार के नोटबंदी से कालाधन बाहर आने के कई कसीदे आपने पढ़े होंगे लेकिन नोटबंदी की आढ़ में कालेधन को सफेद किया गया ऐसा आरोप सुप्रीम कोर्ट की एक जज ने एक कार्यक्रम के दौरान जनता के सामने रख दिया। सुप्रीम कोर्ट की जज बीवी नागरत्ना ने नोटबंदी को कालेधन को सफेद में बदलने का जरिया बता दिया। कालेधन को सफेद बनाने पर उठे संशयों को जस्टिस नागरत्ना ने इस योजना के प्रति अपने संदेहों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वैसे नोटबंदी का आलोचना करते हुए बहुत से राजनेताओं, बृद्धिजीवियों और अर्थशास्त्रियों ने केन्द्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। कई लोग तो अभी तक यह कहते हुए सुने जा सकते हैं कि नोटबंदी के बाद से ही पूरे देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी जो अभी तक पटरी पर नहीं आ पाई है और इसे पटरी पर लाने के लिए अभी कई वर्ष लग जाएंगे, वह भी तब यदि इसके प्रति गंभीर प्रयास शुरू किए जाएं। जस्टिस नागरत्ना बहुत आसान शब्दों में समझाती हैं कि केंद्र सरकार ने 500 और 1000 के नोटों को बंद करने का निर्णय लिया था जो कि कुल करंसी के 86 प्रतिशत थे।       जारी

 

तीन निर्दलीय विधायकों के उपचुनावों में फंस गया पेंच

     हिमाचल विधानसभा से तीन निर्दलीय विधायकों के उपचुनावों में फिलहाल पेंच फंस गया है। क्योंकि अभी तक विधानसभा अध्यक्ष ने तीनों निर्दलीय विधायकों के इस्तीफे को मंजूर नहीं किया है। हलांकि विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के छह बागी विधायकों के निष्कासन को तुरंत मंजूर कर छह सीटें खाली हो जाने की सूचना चुनाव आयोग को भेज दी थी और अब वहां उपचुनाव हो रहे हैं। भाजपा से मिल चुके तीन निर्दलीय विधायकों इस राजनैतिक शतरंग में शह और मात में फंस चुके हैं। अब वह अपने इस्तीफे की मंजूर को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की बातें करने लगे हैं। हलांकि कोर्ट में जाने से भी उन्हें कोई लाभ होने वाला नहीं है। क्योंकि कोर्ट में जाने के लिए भी उन्हें कुछ समय तो चाहिए, तब तक तो छह विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव हो चुका होगा और तब अगर इनके इस्तीफे मंजूर हो भी जाएंगे तो उनके क्षेत्रों में अलग से उपचुनाव होगा। शायद तब तक मौजूद सरकार करीब 40 विधायकों वाली पूर्ण बहुमत प्राप्त सरकार फिर से बन चुकी होगी। इन तीन विधायकों की हालत का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इन तीनों सीटों पर जब उपचुनाव होंगे उस समय भाजपा इन्हें अपना प्रत्याशी बनाएगी भी...    जारी

 

शेयर बाजार में पैसा लगाने के नाम पर साइबर ठग सक्रीय

     कंपनी के शेयर में पैसा लगाने के नाम पर हिमाचल में भी साइबर ठग सक्रीय हो गए हैं। यह शेयर बाजार की तरह ज्यादा मुनाफा देने का लालच देकर भेले-भाले ग्राहकों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। साइबर ठग सोशल ट्रेडिंग के नाम पर यह धंधा चलाते हैं और झांसा देकर बड़ी संख्या में लोगों को चपत लगा जाते हैं। बीते कुछ समय से मार्केट रेग्युलेटर के पास सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स के जरिए साइबर क्रिमिनल्स द्वारा शेयर ट्रेडिंग के जरिए ठगी के कई मामले आए हैं। हिमाचल प्रदेश में भी ट्रेडिंग फ्रॉड के नाम पर 15 लोगों से 3.45 करोड़ की ठगी हुई है। हिमाचल में तीन माह में साइबर ठगों ने ट्रेडिंग फ्रॉड के नाम पर लोगों को ठगी का शिकार बनाया है। शातिरों ने लोगों को ट्रेडिंग के नाम पर हाई रिटर्न दिलाने का झांसा देकर 3.45 करोड़ रुपए की ठगी की है। प्रदेश के साइबर क्राइम पुलिस थाना शिमला, मंडी और धर्मशाला के तहत ट्रेडिंग फ्रॉड के एक मामलों में शातिरों ने लाखों रुपए ठगे हैं। शेयर मार्केट को पहले से ही जोखिम भरा कारोबार माना जाता है। इसमें वहीं लोग पैसा लगाते हैं जो स्टॉक एक्सचेंज की बारिकियों को अच्छी तरह जानते हैं।         जारी

 

अब शराब न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य से बिकेगी

     हिमाचल में शराब की बोतल पर एमएसपी लगने जा रहा है। यानी बोतल पर अब एमआरपी नहीं एमएसपी होगा। आबकारी कराधान विभाग ने पंजाब और चंडीगढ़ की तर्ज पर शराब को बिना रेट बेचने का फैसला किया है। आबकारी कराधान विभाग ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के माध्यम से रेट तय करने का फार्मूला भी ढूंढ लिया है। इस योजना के तहत विक्रेताओं का प्रोफिट मार्जिन 10 से 30 प्रतिशत प्रति बोतल रहेगा। इस फार्मूले का असर प्रदेश में शराब के दाम पर भी नजर आने वाला है और दाम में भी इतनी ही बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। हालांकि जिन क्षेत्रों में दुकानें ज्यादा होने की वजह से प्रतिस्पर्धा रहेगी, वहां प्रतिस्पर्धा के आधार पर भी दाम तय होंगे। आबकारी विभाग ने सिंगल माल्ट व्हिस्की, रम, जिन, वोडका, बायो वीयर, वाइन एंड साइडर एल-10 तक विक्रेता का लाभांश 10 प्रतिशत तय किया है। यानी अंकित एमएसपी से दस प्रतिशत ज्यादा दाम पर दुकानदार शराब की बिक्री कर पाएंगे। इसके अलावा सभी भारतीय बीयर के ब्रांड और देशी शराब पर प्रोफिट मार्जन 30 प्रतिशत तय किया गया है।   जारी

 

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सोलन (हिमाचल प्रदेश)

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